फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court : Being a director of the company, the case of check bounce cannot be prosecuted

Allahabad High Court : कंपनी के निदेशक होने के नाते चेक बाउंस का नहीं चल सकता मुकदमा 

Thu, 10 Mar 2022 01:03 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 10 Mar 2022 01:03 AM IST
सार

याची ने हाईकोर्ट में गौतमबुद्धनगर जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी। मामले में प्रतिवादी की ओर से याची केखिलाफ चेक भुगतान के संबंध में चार जुलाई 2012 को शिकायत दर्ज कराई थी।

विज्ञापन
Allahabad High Court : Being a director of the company, the case of check bounce cannot be prosecuted
इलाहाबाद उच्च न्यायालय

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि महज कंपनी का निदेशक होने के नाते किसी पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई अधिनियम) की धारा 138 के तहत मुकदमा नहीं चलाया सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी ने जतिंदर पाल सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

विज्ञापन




याची ने हाईकोर्ट में गौतमबुद्धनगर जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी। मामले में प्रतिवादी की ओर से याची केखिलाफ चेक भुगतान के संबंध में चार जुलाई 2012 को शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बैटरी बैंक चार्जर की खरीद में जारी किए गए दो चेक का भुगतान नहीं हुआ।
विज्ञापन




याची कंपनी का निदेशक है। प्रतिवादी ने अपनी शिकायत में कंपनी के साथ निदेशक सहित अन्य (याची) को आरोपी बनाया था। याची की कंपनी और प्रतिवादी के बीच कुल साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक का बैटरी बैंक चार्जर की आपूर्ति के साथ सौदा हुआ था। कंपनी की ओर से दो चेकों के जरिए भुगतान किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन




प्रतिवादी ने दोनों बाउंस चेकों के तहत बकाया राशि के भुगतान की मांग करते हुए कंपनी को कानूनी नोटिस जारी किया। याची निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं सका। जिस पर मामले में निचली अदालत ने सुनवाई करते हुए एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत समन जारी किया। याची ने इस समन के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन निचली कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।




हाईकोर्ट ने एसएमएस फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड बनाम नेता भल्ला व अन्य-2005 केस का हवाला देते हुए कहा कि निदेशक होने के नाते आपराधिक दायित्व नहीं डाला जा सकता है। तथ्य यह भी है कि  याची ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में मजिस्ट्रेट ने ठीक से विचार नहीं किया। याची को तलब करने का आदेश अन्यायपूर्ण और अवैध है। इसे बनाए नहीं रखा जा सकता है। लिहाजा, समन आदेश का रद्द किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed