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Allahabad High Court: सोना तस्करी के आरोपी की जमानत खारिज
Tue, 15 Sep 2020 08:09 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 15 Sep 2020 08:09 PM IST
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- फोटो : court
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के बिस्कुट की तस्करी के मामले में आरोपी फारुख की जमानत खारिज कर दी है। फारुख को कस्टम विभाग के अधिकारियों ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन से गिरफ़तार किया था। उसके खिलाफ वाराणसी में मुकदमा दर्ज किया गया है। फारुक की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने सुनवाई की।
याची का कहना है कि वह निर्दोष है और कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहा था। वह दूसरे का सामान ले जा रहा था। दस्तावेज न दिखा सकने के कारण उसे गिरफ़्तार कर लिया गया है। कस्टम विभाग के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि याची के पास से एक करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक मूल्य के सोने के बिस्कुट बरामद किए गए हैं जिनके संबंध में वह कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सका।
कस्टम विभाग के अधिकारियों को कस्टम ड्यूटी की चोरी और तस्करी रोकने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। उनको किसी व्यक्ति की संदेह होने पर तलाशी, शरीर का एक्स रे करने और गिरफ़तारी करने का अधिकार प्राप्त है। इसका प्रयोग करते हुए याची की गिरफ्तारी की गई है। कस्टम एक्ट के तहत एक करोड़ रुपये से अधिक बरामदगी गैरजमानती अपराध है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थियों को देखते हुए जमानत प्रार्थनापत्र नामंजूर कर दिया।
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याची का कहना है कि वह निर्दोष है और कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहा था। वह दूसरे का सामान ले जा रहा था। दस्तावेज न दिखा सकने के कारण उसे गिरफ़्तार कर लिया गया है। कस्टम विभाग के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि याची के पास से एक करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक मूल्य के सोने के बिस्कुट बरामद किए गए हैं जिनके संबंध में वह कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सका।
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कस्टम विभाग के अधिकारियों को कस्टम ड्यूटी की चोरी और तस्करी रोकने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। उनको किसी व्यक्ति की संदेह होने पर तलाशी, शरीर का एक्स रे करने और गिरफ़तारी करने का अधिकार प्राप्त है। इसका प्रयोग करते हुए याची की गिरफ्तारी की गई है। कस्टम एक्ट के तहत एक करोड़ रुपये से अधिक बरामदगी गैरजमानती अपराध है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थियों को देखते हुए जमानत प्रार्थनापत्र नामंजूर कर दिया।
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