फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court: Abstaining from judicial work to express condolence is contempt of court

Allahabad High Court : शोक जताने के लिए न्यायिक कार्य से विरत रहना अदालत की अवमानना, कोर्ट ने दिया यह आदेश

Sun, 25 Aug 2024 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Aug 2024 06:43 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने जिला जजों को निर्देश दिया कि हड़ताल या न्यायिक कार्य से विरत रहने की जानकारी हाईकोर्ट के महानिबंधक को दी जाए ताकि उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सके।

विज्ञापन
Allahabad High Court: Abstaining from judicial work to express condolence is contempt of court
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अधिवक्ताओं और अदालतकर्मियों के निधन पर शोक जताने के लिए न्यायिक कार्य से विरत रहना अदालत की अवमानना माना जाएगा। हाईकोर्ट ने जिला जजों को निर्देश दिया कि हड़ताल या न्यायिक कार्य से विरत रहने की जानकारी हाईकोर्ट के महानिबंधक को दी जाए ताकि उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सके।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने जिला अदालतों ने आए दिन होने वाली हड़ताल को लेकर स्वत: संज्ञान ली गई आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। वहीं अदालत ने वकीलों की समस्याओं के निवारण के लिए गठित समिति में जिला मजिस्ट्रेट रैंक के अधिकारी को शामिल करने को कहा है। साथ ही कहा कि शोक सभा का आयोजन किसी भी कार्यदिवस में साढ़े तीन बजे से किया जा सकता है। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। संवाद
विज्ञापन


बार कौंसिल की दलील-न्यायिक कार्य से मजबूरन होते हैं विरत
बार ऑफ इंडिया और यूपी बार की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने अदालत को बताया कि वह भी हड़ताल के खिलाफ हैं। लेकिन वकीलों की समस्याओं के निवारण का कोई मंच नहीं है, लिहाजा उन्हें हड़ताल या अदालती कामकाज से विरत रहने का रास्ता मजबूरन अख्तियार करना पड़ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
  • काली पट्टी बांधकर भी कर सकते हैं विरोध ः बार कौंसिल ने कोर्ट को बताया है कि वकील न्यायिक कार्य से विरत रहने के बजाय काली पट्टी बांधकर, पोस्टर बैनर लगा कर और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना विरोध जाहिर कर सकते हैं।

218 में से 127 दिन प्रभावित रहा जिला अदालत का काम
इलाहाबाद जिला अदालत में कुल 218 कार्यदिवस में 127 दिन कामकाज ठप रहने पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। कहा कि अब प्रभावी कदम उठाने का समय आ गया है। जिला जज की रिपोर्ट से पता लगता है कि गैर जिम्मेदार वकीलों का एक वर्ग है, जो खुद के हित को वादकारियों के हित से ऊपर समझता है। ऐसे लोगो के दबाव में न्यायिक व्यवस्था का ढांचा ढहाया नहीं जा सकता। उत्तर प्रदेश में पहले से ही अदालते मुकदमों के बोझ से दबीं हैं। हड़ताल से यह दबाव और बढ़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed