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इलाहाबाद बैंक के साथ खत्म होगी 154 वर्ष पुरानी पहचान, अब कहलाया जाएगा इंडियन बैंक

Sat, 31 Aug 2019 09:09 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Sat, 31 Aug 2019 09:09 PM IST
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Allahabad Bank merge into indian bank
allahabad bank - फोटो : प्रयागराज

प्रयागराज की पहचान को लेकर शहरियों की ओर से शुरू संघर्ष के बीच एक और झटका लगा है। इलाहाबाद बैंक के मर्जर के साथ 154 वर्ष पुरानी पहचान भी खत्म होने जा रही है। देश ही नहीं विदेश में भी बैंक के माध्यम से जिले का नाम पहुंचा लेकिन देश के सबसे पुराने बैंकों में शामिल इलाहाबाद बैंक अब इंडियन बैंक हो जाएगा।

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इलाहाबाद बैंक की शुरुआत चौक स्थित बच्चाजी के भवन (वर्तमान में टंडन ऊन भंडार) से हुई थी। उस समय प्रथम तल के एक कमरे में उसका संचालन शुरू हुआ था। स्थानीय व्यापारियों के साथ यूरोप के उद्यमियों तथा अफसरों ने इस बैंक की शुरुआत की थी। माना जाता है कि इसी के साथ देश में भी बैंकिंग की शुरुआत हुई थी। बाद में 24 अप्रैल 1865 को बैंक की विधिवत शुरुआत हुई और बैंक सिविल लाइंस शाखा में शिफ्ट हो गया। इस तरह से सिविल लाइंस बैंक की पहली शाखा बनी तथा इसी परिसर में मुख्यालय भी रहा।

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Allahabad Bank merge into indian bank
प्रतीकात्मक तस्वीर

19वीं शताब्दी में ही झांसी, कानपुर, लखनऊ, बरेली, नैनीताल, कोलकाता तथा दिल्ली में शाखाएं खुल गई थीं। बैंक का विस्तार होने के बाद 1923 में इसका मुख्यालय शिफ्ट हो गया। भारत सरकार ने 1969 में 13 बैंकों का राष्ट्रीकरण किया था। इसमें इलाहाबाद बैंक भी शामिल रहा। इसके बाद बैंक की शाखाएं देश के हर कोने में खुली। जून 2006 में इसका विस्तार विदेश में भी हुथा चीन में पहला कार्यालय खुला। इसके एक साल बाद हांककांग में बैंक की शाखा भी खुली। इस तरह इस बैंक के विस्तार के साथ इलाहाबाद का परचम भी फैलता गया लेकिन इंडियन बैंक में मर्जर के साथ 154 वर्ष पुरानी पहचान खत्म हो जाएगी।

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allahabad bank - फोटो : प्रयागराज

आज हैं 23 हजार 210 कर्मचारी
स्थानीय व्यापारियों, यूरोप के अफसरों और उद्यमियों ने मिलकर154 वर्ष पहले बैंक की शुरुआत की थी। वहीं वर्तमान में बैंक की पूरे देश में 3 हजार 229 शाखाएं हैं। कर्मचारियों की संख्या भी 23 हजार 210 पहुंच गई है। इलाहाबाद जोन में बैंक की 57 तथा शहर में 16 शाखाएं हैं। कुछ रुपयों से शुरू बैंक का वर्तमान में कुल 3 लाख 77 हजार 887 करोड़ रुपये का कारोबार है।

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allahabad bank - फोटो : प्रयागराज

जमीन बेचनी पड़ी फिर भी नहीं रुका मर्जर
लगातार घाटा के बाद इलाहाबाद बैंक के मर्जर की कवायद लंबे समय से की जा रही है। पूंजी बढ़ाने और मर्जर रोकने के लिए बैंक की संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत इलाहाबाद, बरेली, झांसी, गोरखपुर, जबलपुर, नैनीताल, मंसूरी, लखनऊ, सीतापुर, मुरादाबाद, पैडर रोड मुंबई और अंधेरी में बैंक की जमीन बेचने की घोषणा की गई। इसमें सिविल लाइंस शाखा परिसर का लॉन भी शामिल रहा। हालांकि, विरोध के बाद यह भूखंड नहीं बेचा गया। इस कवायद के बाद भी वित्त मंत्री ने शुक्रवार को बैंक के मर्जर की घोषणा कर दी।

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allahabad bank - फोटो : प्रयागराज

मर्जर के विरोध में कर्मचारी
कर्मचारी संगठनाें ने बैंकों के मर्जर का विरोध किया है। युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की ओर से शनिवार को आंदोलन की घोषणा की गई है। इसके तहत कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। यूनियन की ओर बड़े आंदोलन की भी तैयारी की गई है, जिसकी घोषणा एक-दो दिनों में होगी। उत्तर प्रदेश बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष मदनजी उपाध्याय ने मर्जर का विरोध किया। उनका कहना है कि इलाहाबाद बैंक शहर की पहचान से जुड़ा है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

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