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Prayagraj News: तबादले के बाद सचिव ने ग्राम पंचायत के खाते से निकाले रुपये
Thu, 11 Apr 2024 03:26 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 11 Apr 2024 03:26 AM IST
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मीरगंज। पंचायत सचिव ने तबादले के बाद ग्राम पंचायत के खाते से रुपये निकाल लिए। जांच में 1.89 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। सहायक विकास अधिकारी ने आरोपी सचिव नरेशपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
विकास खंड की ग्राम पंचायत मसीहाबाद, तिलमास और करमपुर में नरेशपाल की तैनाती थी। फरवरी माह में कई ग्राम प्रधान डीएम से मिले। उन्होंने सचिव पर मनमानी से काम कराने का आरोप लगाया। कहा कि उनके हस्ताक्षर कराए बिना ही सचिव ग्राम पंचायतों में काम करा रहे हैं। डीपीआरओ ने जब मामले की जांच की तो उनके सामने तीन पत्रावलियां प्रस्तुत की गईं। इसमें हैंडपंप रीबोर, नाला और गोशाला निर्माण के लिए बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के धन निकालने का मामला सामने आया। ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए थे।
17 फरवरी को नरेशपाल का तबादला कर दिया गया मगर, उन्होंने ट्रांसफर आदेश भी नहीं लिया। इसके बाद आदेश की कॉपी उनके व्हाट्सएप पर भेजी गई। आरोप है कि इसके बाद भी उन्होंने ग्राम प्रधान की स्वीकृति के बिना काम कराए। 1.89 लाख रुपये भी निकाल लिए। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद डीपीआरओ ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद सहायक विकास अधिकारी महेश कुमार तहरीर लेकर पहुंचे। तहरीर के आधार पर मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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विकास खंड की ग्राम पंचायत मसीहाबाद, तिलमास और करमपुर में नरेशपाल की तैनाती थी। फरवरी माह में कई ग्राम प्रधान डीएम से मिले। उन्होंने सचिव पर मनमानी से काम कराने का आरोप लगाया। कहा कि उनके हस्ताक्षर कराए बिना ही सचिव ग्राम पंचायतों में काम करा रहे हैं। डीपीआरओ ने जब मामले की जांच की तो उनके सामने तीन पत्रावलियां प्रस्तुत की गईं। इसमें हैंडपंप रीबोर, नाला और गोशाला निर्माण के लिए बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के धन निकालने का मामला सामने आया। ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए थे।
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17 फरवरी को नरेशपाल का तबादला कर दिया गया मगर, उन्होंने ट्रांसफर आदेश भी नहीं लिया। इसके बाद आदेश की कॉपी उनके व्हाट्सएप पर भेजी गई। आरोप है कि इसके बाद भी उन्होंने ग्राम प्रधान की स्वीकृति के बिना काम कराए। 1.89 लाख रुपये भी निकाल लिए। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद डीपीआरओ ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद सहायक विकास अधिकारी महेश कुमार तहरीर लेकर पहुंचे। तहरीर के आधार पर मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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