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High Court News : नसबंदी के बाद फिर बनी मां की गुहार...बिटिया का खर्च उठाए सरकार

Tue, 04 Mar 2025 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 04 Mar 2025 01:51 AM IST
सार

नसबंदी के बावजूद मां बनने पर महिला मजदूर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा, बिटिया के लालन-पालन का खर्च सरकार उठाए। दिहाड़ी कर तीन बच्चे पालना मेरे बस में नहीं है। इस पर कोर्ट ने सीएमओ प्रयागराज को छह हफ्ते में जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

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After sterilization, the mother again pleaded... the government should bear the expenses of the daughter
गर्भवती महिला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नसबंदी के बावजूद मां बनने पर महिला मजदूर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा, बिटिया के लालन-पालन का खर्च सरकार उठाए। दिहाड़ी कर तीन बच्चे पालना मेरे बस में नहीं है। इस पर कोर्ट ने सीएमओ प्रयागराज को छह हफ्ते में जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डी. रमेश की अदालत ने प्रयागराज निवासी मंजू की ओर से अनचाहे गर्भ की क्षतिपूर्ति की मांग वाली याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। मामला करछना सीएचसी का है। शिवपुरा की मंजू पति शिव मोहन संग मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं।
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दो बेटे पैदा होने के बाद आशाबहू विजय लक्ष्मी ने उन्हें नसबंदी के लिए प्रोत्साहित किया था। आर्थिक स्थिति को देख दंपती इस पर राजी हो गए थे। 20 नवंबर 2020 को सीएचसी के डॉक्टर ने नसबंदी की। इसके बाद याची ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रोत्साहन राशि का दावा भी किया, लेकिन वह नहीं मिला।

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वहीं, तीन साल से प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहीं मंजू को 2023 में आंतरिक परेशानी महसूस हुई। 11 जुलाई 2023 को उन्होंने अस्पताल में दिखाया तो पता लगा कि वह फिर से मां बनने वाली हैं। यह सुन वह सन्न रह गईं। नसबंदी के बाद भी गर्भ ठहरने पर मंजू ने क्षतिपूर्ति का दावा किया। इस पर सीएचसी अधीक्षक ने 22 जुलाई 2023 को दावे के प्रपत्र सीएमओ प्रयागराज को कार्यवाही के लिए अग्रसारित कर दिया। लेकिन, उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

इसी दौरान 23 फरवरी 2024 को याची ने बेटी को जन्म दिया। बिटिया के जन्म के बाद दंपती पर तीन बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी से जूझ रही मां ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। कहा, अनचाहे गर्भ के लिए सरकारी डॉक्टर जिम्मेदार है। लिहाजा, मुआवजे देने के साथ ही सरकार बिटिया के लालन-पालन की जिम्मेदारी भी उठाए। कोर्ट ने सीएमओ प्रयागराज को मामले की जांच छह हफ्ते में पूरी कर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।

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