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प्रधानाध्यापक पद छोड़ने के बाद दुबारा पद मांगने हाईकोर्ट पहुंचा अध्यापक
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After leaving the post of Principal, the teacher reached the High Court seeking the post again
एक बार प्रधानाध्यापक का पद ठुकराने के बाद दुबारा उसी पद को मांगने वाले अध्यापक ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दाखिल की है। अध्यापक का कहना है कि दुबारा पद मांगने पर उसे इस आधार पर इंकार कर दिया गया कि एक बार पहले वह इस पद पर बैठने से इंकार कर चुका है। कोर्ट ने प्रबंधक श्रीकृष्ण आदर्श इंटर कालेज बड़ागांव झांसी और माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने राम प्रसाद आर्य की विशेष अपील पर दिया है। अपील की सुनवाई 16 सितंबर को होगी। याची के अधिवक्ता धनंजय कुमार का कहना है कि प्रधानाचार्य राम प्रसाद वर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद याची को कार्यकारी प्रधानाचार्य पद संभालने के लिए कहा गया, जिस पर उन्होंने असमर्थता व्यक्त की।
बाद में जब प्रधानाचार्य केसी श्रीवास्तव सेवानिवृत्त हुए तो वरिष्ठ होने के आधार पर उन्होंने कार्यकारी प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपे जाने की मांग की। मगर एक बार पद अस्वीकार करने के कारण उनको चार्ज नहीं दिया गया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। एकलपीठ ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची मौका खोने के बाद दुबारा उस पद का दावा नहीं कर सकता। जिसे अपील में चुनौती दी गई है। याची अधिवक्ता का कहना है कि उसने पहले हुई रिक्ति पर पद लेने से इंकार किया था। अब वही पद दूसरे व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने पर रिक्त हुआ है। पहले किए गए इंकार को इस मामले में लागू नहीं किया जा सकता।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने राम प्रसाद आर्य की विशेष अपील पर दिया है। अपील की सुनवाई 16 सितंबर को होगी। याची के अधिवक्ता धनंजय कुमार का कहना है कि प्रधानाचार्य राम प्रसाद वर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद याची को कार्यकारी प्रधानाचार्य पद संभालने के लिए कहा गया, जिस पर उन्होंने असमर्थता व्यक्त की।
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बाद में जब प्रधानाचार्य केसी श्रीवास्तव सेवानिवृत्त हुए तो वरिष्ठ होने के आधार पर उन्होंने कार्यकारी प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपे जाने की मांग की। मगर एक बार पद अस्वीकार करने के कारण उनको चार्ज नहीं दिया गया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। एकलपीठ ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची मौका खोने के बाद दुबारा उस पद का दावा नहीं कर सकता। जिसे अपील में चुनौती दी गई है। याची अधिवक्ता का कहना है कि उसने पहले हुई रिक्ति पर पद लेने से इंकार किया था। अब वही पद दूसरे व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने पर रिक्त हुआ है। पहले किए गए इंकार को इस मामले में लागू नहीं किया जा सकता।
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