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हाईकोर्ट : सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर प्रमुख सचिव से मांगा हलफनामा, 15 सितंबर को होगी सुनवाई
Thu, 03 Sep 2026 04:06 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 03 Sep 2026 04:06 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। साथ ही प्रमुख सचिव (विधि) को मामले की व्यक्तिगत समीक्षा कर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने बलरामपुर की नीतू अग्रवाल व अन्य की याचिका पर दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। साथ ही प्रमुख सचिव (विधि) को मामले की व्यक्तिगत समीक्षा कर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने बलरामपुर की नीतू अग्रवाल व अन्य की याचिका पर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि अक्सर ऐसे सरकारी वकील प्रतिशपथ पत्र तैयार करते हैं, जो संबंधित मामले की सुनवाई में कभी उपस्थित ही नहीं हुए। इससे सुनवाई के दौरान पैरवी करने वाले अधिवक्ता को न तो मामले की पृष्ठभूमि और न ही रिकॉर्ड की पर्याप्त जानकारी होती है। कोर्ट ने कहा कि कई प्रतिशपथ पत्र याचिका में लगाए गए तथ्यों का महज यांत्रिक खंडन होते हैं और न्यायालय की प्रभावी सहायता नहीं करते।
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कोर्ट ने सरकारी वकीलों को मामले आवंटित करने की प्रक्रिया, प्रतिशपथ पत्र तैयार करने के लिए अलग पैनल रखने के कारण, बार-बार वकील बदलने, फाइलों की अभिरक्षा, जवाबदेही, हलफनामा तैयार करने की फीस और भुगतान व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा है। प्रमुख सचिव (विधि) को 15 सितंबर को दोपहर दो बजे वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये उपस्थित होकर कोर्ट की सहायता करने को कहा गया है। तब तक याचिका से संबंधित वसूली कार्रवाई पर रोक रहेगी।
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