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Prayagraj News: गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में अवैध निर्माण की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त
Tue, 22 Sep 2026 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:17 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में बिना निवासियों की सहमति के अतिरिक्त मंजिलों और फ्लैटों के निर्माण के मामले की जांच के लिए दो एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए हैं। कोर्ट ने अधिवक्ता संजय कुमार ओम और प्रखर कुमार श्रीवास्तव को मौका मुआयना कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा सौंपा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने सुरेश चंद्र और 10 अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिल्डर ने यूपी अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के नियमों का उल्लंघन कर निवासियों की सहमति के बिना अतिरिक्त निर्माण शुरू कर दिया। 18 दिसंबर 2024 को जारी तीसरे कंपाउंडिंग आदेश के जरिये अवैध रूप से 112 अतिरिक्त फ्लैटों को मंजूरी दी गई, जिनमें टावर नंबर 16 से 19 में दो-दो अतिरिक्त मंजिलें और टावर 27 व 28 में निर्माण शामिल हैं। निवासियों का तर्क है कि जिन टावरों में लोग पहले से रह रहे हैं, वहां इस तरह का निर्माण कार्य से उन्हें खतरा है।
वहीं, बिल्डर और अन्य प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं के दावों पर आपत्ति जताई। कोर्ट की ओर से वास्तविक स्थिति की पड़ताल के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों ने अपनी सहमति दी। कोर्ट के आदेशों के अनुसार दोनों एडवोकेट कमिश्नर 19 और 20 सितंबर निरीक्षण करेंगे। इस दौरान परियोजना में मौजूद कुल टावरों की संख्या, प्रत्येक टावर में मंजिलों व फ्लैटों की स्थिति, निर्माणाधीन व पूर्ण हो चुके फ्लैटों का ब्योरा और टावर 16 से 19 की ऊपरी मंजिलों की स्थिति की गहन जांच की जाएगी। निरीक्षण की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी। 30 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने सुरेश चंद्र और 10 अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिल्डर ने यूपी अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के नियमों का उल्लंघन कर निवासियों की सहमति के बिना अतिरिक्त निर्माण शुरू कर दिया। 18 दिसंबर 2024 को जारी तीसरे कंपाउंडिंग आदेश के जरिये अवैध रूप से 112 अतिरिक्त फ्लैटों को मंजूरी दी गई, जिनमें टावर नंबर 16 से 19 में दो-दो अतिरिक्त मंजिलें और टावर 27 व 28 में निर्माण शामिल हैं। निवासियों का तर्क है कि जिन टावरों में लोग पहले से रह रहे हैं, वहां इस तरह का निर्माण कार्य से उन्हें खतरा है।
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वहीं, बिल्डर और अन्य प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं के दावों पर आपत्ति जताई। कोर्ट की ओर से वास्तविक स्थिति की पड़ताल के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों ने अपनी सहमति दी। कोर्ट के आदेशों के अनुसार दोनों एडवोकेट कमिश्नर 19 और 20 सितंबर निरीक्षण करेंगे। इस दौरान परियोजना में मौजूद कुल टावरों की संख्या, प्रत्येक टावर में मंजिलों व फ्लैटों की स्थिति, निर्माणाधीन व पूर्ण हो चुके फ्लैटों का ब्योरा और टावर 16 से 19 की ऊपरी मंजिलों की स्थिति की गहन जांच की जाएगी। निरीक्षण की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी। 30 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी।
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