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बालिग पत्नी को नाबालिग पति की अभिरक्षा का अधिकार नहीं- हाईकोर्ट
Tue, 15 Jun 2021 01:16 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 15 Jun 2021 01:16 AM IST
सार
- पति के बालिग होने तक सरकारी आश्रय गृह में रखने का आदेश
- पति की मां को भी कोर्ट ने अभिरक्षा देने से किया इनकार
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allahabad high court
- फोटो : social media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति नाबालिग है तो वह कानूनी रूप से अपनी बालिग पत्नी की अभिरक्षा में नहीं रह सकता है। जब तक कि वह बालिग न हो जाए। कोर्ट ने ऐसे विवाह को शून्य माना है, जिसमें पति या पत्नी में से कोई एक नाबालिग है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी शादी शून्यकरणीय है। यदि नाबालिग पति को उसकी बालिग पत्नी को सौपा गया तो यह पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध होगा ।
16 साल का पति अपनी मां के साथ भी रहना नहीं चाहता है। इसलिए कोर्ट ने मां को भी उसकी अभिरक्षा नही सौपी और जिला प्रशासन को चार फरवरी 2022 (लड़के के बालिग होने तक ) उसे सारी सुविधाओं के साथ आश्रय स्थल में रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट से साफ किया है का चार फरवरी 2022 को बालिग होने के बाद वह अपनी मर्जी से कहीं भी किसी के साथ जाने के लिए स्वतंत्र होगा। तब तक आश्रय स्थल में निवास करेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने लड़के की मां आजमगढ की हौशिला देवी की याचिका पर दिया है। याचिका में मां ने अपने नाबालिग बेटे की अभिरक्षा की मांग की थी। याची का कहना था कि नाबालिग लड़के को किसी लड़की से शादी करने का विधिक अधिकार नहीं है। ऐसी शादी कानूनन शून्य है। कोर्ट के निर्देश पर लड़के को 18 सितंबर 2020 को कोर्ट में पेश किया गया था। बयान से साफ हुआ कि वह जबरन पत्नी के साथ रह रहा है। पत्नी से बच्चे का जन्म भी हुआ है। कोर्ट ने कहा कि वह नाबालिग है, पत्नी की अभिरक्षा में नहीं रह सकता। बच्चे का हित देखा जाएगा। इसलिए बालिग होने तक सरकारी आश्रय स्थल में रहेगा।
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16 साल का पति अपनी मां के साथ भी रहना नहीं चाहता है। इसलिए कोर्ट ने मां को भी उसकी अभिरक्षा नही सौपी और जिला प्रशासन को चार फरवरी 2022 (लड़के के बालिग होने तक ) उसे सारी सुविधाओं के साथ आश्रय स्थल में रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट से साफ किया है का चार फरवरी 2022 को बालिग होने के बाद वह अपनी मर्जी से कहीं भी किसी के साथ जाने के लिए स्वतंत्र होगा। तब तक आश्रय स्थल में निवास करेगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने लड़के की मां आजमगढ की हौशिला देवी की याचिका पर दिया है। याचिका में मां ने अपने नाबालिग बेटे की अभिरक्षा की मांग की थी। याची का कहना था कि नाबालिग लड़के को किसी लड़की से शादी करने का विधिक अधिकार नहीं है। ऐसी शादी कानूनन शून्य है। कोर्ट के निर्देश पर लड़के को 18 सितंबर 2020 को कोर्ट में पेश किया गया था। बयान से साफ हुआ कि वह जबरन पत्नी के साथ रह रहा है। पत्नी से बच्चे का जन्म भी हुआ है। कोर्ट ने कहा कि वह नाबालिग है, पत्नी की अभिरक्षा में नहीं रह सकता। बच्चे का हित देखा जाएगा। इसलिए बालिग होने तक सरकारी आश्रय स्थल में रहेगा।
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