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High Court : जांच के दौरान जमा की गई अतिरिक्त राशि अब अपील दाखिल करने में होगी मददगार
Mon, 20 Apr 2026 04:57 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 20 Apr 2026 04:57 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स नोविटेक हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड बनाम कमिश्नर सीजीएसटी के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कहा है कि अब जांच के दौरान जमा की गई अतिरिक्त धनराशि का उपयोग अपील दाखिल करने के लिए अनिवार्य पूर्व-जमा के रूप में किया जा सकेगा।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स नोविटेक हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड बनाम कमिश्नर सीजीएसटी के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कहा है कि अब जांच के दौरान जमा की गई अतिरिक्त धनराशि का उपयोग अपील दाखिल करने के लिए अनिवार्य पूर्व-जमा के रूप में किया जा सकेगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दिया है। आगरा की याची कंपनी में जीएसटी विभाग ने जांच कर सात करोड़ रुपये विवादित राशि तय की। जांच के दौरान याची ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए। ऐसे में अपील दायर करने के लिए विवादित राशि की अनिवार्य 10 प्रतिशत राशि से अधिक याची ने जमा कर दी। लेकिन, जीएसटी पोर्टल जमा राशि अपील दाखिल करने के लिए अनिवार्य पूर्व-जमा राशि के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा था। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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अधिवक्ता गोपाल वर्मा ने जीएसटीएन की ओर दिए गए निर्देश प्रस्तुत किए। दलील दी कि पोर्टल पर फॉर्म जीएसटी डीआरसी-03ए पेश किया गया है। यह फॉर्म जांच के दौरान जमा राशि को स्वचालित रूप से उसे अपील के लिए आवश्यक पूर्व-जमा के रूप में पहचान लेता है।
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हाईकोर्ट ने इस तकनीकी समाधान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में अपनी अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है। कहा कि यदि याचिकाकर्ता इस प्रक्रिया का पालन करता है तो उसकी अपील को समय का मुद्दा उठाए बिना एक नियमित के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रमुख मुख्य आयुक्तों और राज्य कर आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक निर्देश या सर्कुलर जारी करें, ताकि अन्य करदाताओं को भी इस तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।