{"_id":"8-43534","slug":"Allahabad-43534-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोयला, कपड़ा मंत्रालय की तर्ज पर हो ‘गंगा मंत्रालय’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोयला, कपड़ा मंत्रालय की तर्ज पर हो ‘गंगा मंत्रालय’
Allahabad
Updated Wed, 02 Apr 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषणमुक्त और संरक्षित करने को लेकर अब स्वतंत्र गंगा मंत्रालय गठित करने की मांग उठी है। गंगा संरक्षण अभियान से जुड़े न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जैसे कोयला, कपड़ा, इस्पात मंत्रालय है, उससे ज्यादा जरूरी है कि गंगा को बचाने के लिए गंगा मंत्रालय बनाया जाए। मंत्रालय का काम हो कि वह देश भर में गंगा से जुड़े शहरों, गंगा के कारण प्रभावित हो रहे रोजगार का आंकलन करें और गंगा का प्रदूषण दूर कर, उसे इस तरह विकसित करे कि यह राष्ट्रीय नदी देश के विकास में अहम योगदान दे सके। विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि राष्ट्रीय नदी जिस खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो गई है, उसे बचाने में अब तक की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। स्वतंत्र केंद्रीय गंगा मंत्रालय के गठन से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में मदद मिलेगी।
गंगा संरक्षण अभियान के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय का कहना है कि गंगा देशवासियों की आस्था का प्रतीक और राष्ट्रीय धरोहर है। लेकिन प्रदूषण के चलते गंगा का अस्तित्व खतरेे में है। ऐसे में नदी के संरक्षण को अलग से मंत्रालय का गठन करके ठोस कदम उठाना ही विकल्प है। बकौल न्यायमूर्ति मालवीय यह दुखद है कि ऋषिकेश में गंगा में 26500 क्यूसेक जल होता है। जिसमें से 26350 क्यूसेक जल हरिद्वार से ही नहरों ंमें भेज दिया जाता है। महज 150 क्यूसेक पानी कानपुर तक पहुंचता है। इस जल को भी कानपुर बैराज पर रोककर कानपुर को जलापूर्ति की जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो गंगा का वजूद कानपुर में ही समाप्त हो जाता है। गंगा प्रदूषण को लेकर कई याचिका करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने भी गंगा मंत्रालय के गठन की मांग उठायी है। अधिवक्ता का मानना है कि लोकसभा चुनाव बाद गठित नई सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि तत्काल इस दिशा में कदम उठाए। बकौल अरुण गंगा मंत्रालय का काम हो कि वह देश भर में गंगा से जुड़े शहरों, गंगा के कारण प्रभावित हो रहे रोजगार का आंकलन करें और गंगा का प्रदूषण दूर कर, उसे इस तरह विकसित करे कि यह राष्ट्रीय नदी देश के विकास में अहम योगदान दे सके। गंगा संरक्षण अभियान से ही जुड़े बीएचयू के प्रो. यूके चौधरी भी मानते हैं कि गंगा मंत्रालय का गठन करके ही राष्ट्रीय नदी के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
गंगा संरक्षण अभियान के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय का कहना है कि गंगा देशवासियों की आस्था का प्रतीक और राष्ट्रीय धरोहर है। लेकिन प्रदूषण के चलते गंगा का अस्तित्व खतरेे में है। ऐसे में नदी के संरक्षण को अलग से मंत्रालय का गठन करके ठोस कदम उठाना ही विकल्प है। बकौल न्यायमूर्ति मालवीय यह दुखद है कि ऋषिकेश में गंगा में 26500 क्यूसेक जल होता है। जिसमें से 26350 क्यूसेक जल हरिद्वार से ही नहरों ंमें भेज दिया जाता है। महज 150 क्यूसेक पानी कानपुर तक पहुंचता है। इस जल को भी कानपुर बैराज पर रोककर कानपुर को जलापूर्ति की जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो गंगा का वजूद कानपुर में ही समाप्त हो जाता है। गंगा प्रदूषण को लेकर कई याचिका करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने भी गंगा मंत्रालय के गठन की मांग उठायी है। अधिवक्ता का मानना है कि लोकसभा चुनाव बाद गठित नई सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि तत्काल इस दिशा में कदम उठाए। बकौल अरुण गंगा मंत्रालय का काम हो कि वह देश भर में गंगा से जुड़े शहरों, गंगा के कारण प्रभावित हो रहे रोजगार का आंकलन करें और गंगा का प्रदूषण दूर कर, उसे इस तरह विकसित करे कि यह राष्ट्रीय नदी देश के विकास में अहम योगदान दे सके। गंगा संरक्षण अभियान से ही जुड़े बीएचयू के प्रो. यूके चौधरी भी मानते हैं कि गंगा मंत्रालय का गठन करके ही राष्ट्रीय नदी के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।
विज्ञापन