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ठंड में जमे कल्पवासी, पानी को भी तरसे
Allahabad
Updated Wed, 15 Jan 2014 05:43 AM IST
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इलाहाबाद। माघ मेले में कल्पवासियों का रेला पहुंचने लगा है। हालांकि इस बार मेले में प्रवेश करते हुए कल्पवासियों को भारी समस्या भी झेलनी पड़ रही है। मेला क्षेत्र में पेयजल की जबरदस्त किल्लत पैदा हो गई है और लोगों को गंगाजल से काम चलाना पड़ रहा है। जमीन दलदली होने के कारण कई कल्पवासियों के कैंप नहीं लग सके हैं, सो उन्हें सर्द रात खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ रही है और कल्पवासी ठंड में जमे जा रहे हैं। मेला कुल 1500 बीघा क्षेत्र में बसाया गया है और इसमें तीन सौ बीघा जमीन दलदली है। काफी मशक्कत के बाद दलदली जमीन के एक हिस्से को ठीक कर लिया गया लेकिन गत दिनों हुई मूसलाधार बारिश और उसपर जल निगम की पाइप से जगह-जगह हुए लीकेज के कारण पूरी तैयारी चौपट हो गई। जमीन फिर दलदली हो गई। कई जगह तो दलदली जमीन ने तालाब का रूप ले लिया। ऐसे में कई जगह संस्थाओं और कल्पवासियों के शिविर नहीं लगाए जा सके। अब एक साथ तमाम संस्थाएं शिविर लगाने के लिए ठेकेदार के पहुंच गई हैं लेकिन वहां भी संसाधन सीमित हैं, सो बड़ी संख्या में संस्थाओं को वापस किया जा रहा है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का मुख्य स्नान पर्व है। ऐसे में उस दिन भी मेले में यातायात ठप रहेगा और ठेकेदार की ओर से कल्पवासियों एवं संस्थाओं के शिविर में लगे वाले सामान मौके तक नहीं पहुंचाए जा सकेंगे। ऐसे में कल्पवासियों और संस्थाओं के लोगों को अपना शिविर लगाने के लिए कम से कम एक दिन का इंतजार और करना होगा। 50 हजार से ज्यादा कल्पवासी सोमवार तक मेला क्षेत्र में पहुंच चुके हैं और इनमें से तमाम कल्पवासियों के शिविर न लग पाने के कारण उन्हें कड़ाके की ठंड से जूझना पड़ रहा है। साथ ही उन्हें पेजयल किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है। जल निगम ने पानी की पाइप लाइन तो बिछा दी लेकिन मेला क्षेत्र के तमाम हिस्सों में आपूर्ति बहाल नहीं का सकी। सेक्टर-पांच में भी कल्पवासियों और संस्थाओं के लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। तमाम लोगों झूंसी और दारागंज से पानी की बोतलें खरीदकर ला रहे हैं तो कई लोग गंगाजल से ही काम चला रहे हैं। पानी के साथ बिजली की समस्या भी लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। बड़ी संख्या में ऐसे शिविर हैं, जहां अब तक बिजली के कनेक्शन नहीं दिए गए और लोगों को पूरी रात अंधेरे में बितानी पड़ रही है।
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