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मिड डे मील में एकरूपता पर हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
Allahabad
Updated Fri, 26 Jul 2013 05:33 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने कहा है कि मिड डे मील के वितरण को लेकर सरकारी नीति में एकरूपता होनी चाहिए ताकि प्रदेश के सभी जिलों में एक जैसी व्यवस्था कायम हो सके। प्रदेश के सभी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील वितरण की व्यवस्था को तय करने के लिए हाईकोेर्ट पांच अगस्त को संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को मिड डे मील वितरण के संबंध में अपनी नीति बताने का निर्देश दिया है। प्रधानाचार्य परिषद मेरठ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित याचिकाओें को एक साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
याचिका में मिड डे मील को लेेकर सरकारी व्यवस्था को चुनौती दी गई है। कहा गया कि कई जिलों में दोपहर का भोजन गैर सरकारी संगठनों द्वारा दिया जा रहा है जबकि मेरठ में यह जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों को सौंपी गई है। प्रधानाचार्यों पर शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों का दबाव रहता है। याची के अधिवक्ता अनुराग खन्ना ने कहा कि बागपत और मुजफ्फर नगर जिलों में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण मिड डे मील का जिम्मा एनजीओ को दे दिया गया है। मेरठ में भी 11 एनजीओ काम कर रहे हैं ऐसे में प्रधानाचार्यों पर दबाव डालना उचित नहीं है। कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का निर्देश देते हुए इस मामले से संबंधित अन्य याचिकाएं मंगा ली हैं। सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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याचिका में मिड डे मील को लेेकर सरकारी व्यवस्था को चुनौती दी गई है। कहा गया कि कई जिलों में दोपहर का भोजन गैर सरकारी संगठनों द्वारा दिया जा रहा है जबकि मेरठ में यह जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों को सौंपी गई है। प्रधानाचार्यों पर शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों का दबाव रहता है। याची के अधिवक्ता अनुराग खन्ना ने कहा कि बागपत और मुजफ्फर नगर जिलों में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण मिड डे मील का जिम्मा एनजीओ को दे दिया गया है। मेरठ में भी 11 एनजीओ काम कर रहे हैं ऐसे में प्रधानाचार्यों पर दबाव डालना उचित नहीं है। कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का निर्देश देते हुए इस मामले से संबंधित अन्य याचिकाएं मंगा ली हैं। सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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