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इधर भी देखो, इन मंदिरों में पहुंचेंगे देश विदेश के श्रद्धालु

Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
Allahabad
Allahabad Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। संगम की रेती पर एक ओर जहां अखाड़ों, साधु-संतों और शंकराचार्यो के स्वागत और उनके शिविर, छावनी की तैयारियां तेजी से चल रही हैं, वहीं शहर विशेषकर कुंभ क्षेत्र के करीब के मंदिरों का कोई पुरसाहाल नहीं है। डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु संगम क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए आते हैं, पर अब तक प्रशासन की ओर से उनकी कोई सुधि नहीं ली गई है। मंदिरों की ओर जाने वाले रास्ते जहां क्षतिग्रस्त और उबड़-खाबड़ हैं, वहीं उन पर रोशनी और सफाई का भी समुचित इंतजाम नहीं है।
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नागवासुकि तक पैदल चलना भी मुश्किल
कुंभ मेला क्षेत्र में स्थित नागवासुकि मंदिर की ही बात करें तो भीतर-बाहर असुविधाओं का अंबार है। मंदिर की ओर आने वाला रास्ता उबड़-खाबड़ है। सड़कें जगह-जगह से ऐसी टूटी हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल है। बक्शी बांध से लेकर दशाश्वमेध मंदिर की ओर जाने वाली सड़क भी अब तक नहीं बन सकी है। मार्ग पर कई जगह बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं है जिससे वहां पहुंचने वालों को दिक्कतों का सामना करना होता है। नियमित सफाई व्यवस्था न होने से मुख्य द्वार के पास ही कूड़े का ढेर लगा है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल संकट भी है। परिसर का हैंडपंप ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा तो बाहर भी आपूर्ति का संकट है। पुजारी श्यामधर त्रिपाठी के मुताबिक बाउंड्री वॉल के लिए कई बार प्रशासन को चेताया गया है, पर अब तक इस बारे में कुछ भी नहीं हो सका है।
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वेणी माधव के करीब नाला चोक
वेणी माधव मंदिर के पास भी कूड़े का ढेर लगा हुआ है। मंदिर के सामने माधव द्वार यानी वेणी माधव मंदिर से मोती महल के गणेश मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर हमेशा गंदगी फैली रहती है। मंदिर से दशाश्वमेध की ओर जाने वाली गलियों और स्ट्रीट लाइट्स की स्थिति भी खराब है। पुजारी अभिषेक तिवारी के मुताबिक मंदिर के पास का नाला चोक होने से जलभराव की स्थिति में पानी सड़क पर फैला रहता है।
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महानिर्वाणी अखाड़े के ज्वाला प्रसाद पांडेय का कहना है कि अखाड़े की पेशवाई करीब है, पर ठाकुर प्रसाद वैद्य की गली अब तक नहीं बन सकी है। अखाडे़ के संत इसी रास्ते निकलते हैं। नागवासुकि और वेणीमाधव मंदिरों को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग से ही श्रद्धालु दोनों मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं।
अलोपशंकरी के करीब कूड़े का ढेर
कुंभ मेला क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ अलोपशंकरी के करीब कूड़े का ढेर लगा हुआ है। पुजारी दिगंबर नरेंद्र पुरी के मुताबिक तिकोनिया से ही मंदिर की ओर आने वालों का तांता लगता है, पर अब तक इस ओर आने वाले रास्ता बनकर नहीं तैयार हुआ है। मंदिर के पास का नाला चोक है, जिससे सड़क पर गंदगी फैली रहती है। मंदिर के करीब पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी बेहद खराब है।
बड़े गणेश मंदिर के पास भी गंदगी
मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मोती महल स्थित बड़े गणेश मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आते हैं, पर इसके पास भी तमाम दिक्कतें हैं। मंदिर के कोने पर ही गंदगी का अंबार है तो पास में लगा नल भी अक्सर खराब रहता है। मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था भी बदतर है जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कतें होती हैं।
मेले में अलग बनेगा शंकराचार्य नगर!
इलाहाबाद। संगम की रेती पर बसने वाले तंबुओं के शहर में अबकी शंकराचार्य नगर अलग बसेगा। द्वारका एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि और गंगा सेवा अभियानम के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला अधिकारी से मुलाकात के दौरान ऐसा सुझाव दिया है।

सलाहकार समिति में मुख्यमंत्री की ओर से नामित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि शंकराचार्यों के पद, परंपरा और उनकी मर्यादा के अनुरूप उन्हें अलग स्थान दिया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को पीठों की परंपरा के बारे में जानकारी मिल सके। योजना के तहत शंकराचार्य चौराहा बनाकर वहां आदि शंकराचार्य की प्रतिमा और चारों कोनों पर चारों शंकराचार्यों के शिविर स्थापित किए जाने का सुझाव शामिल है।
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