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जीबी पंत संस्थान की पांच दिवसीय वेबीनार संगोष्ठी हुई संपन्न

Thu, 04 Jun 2020 01:04 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2020 01:04 AM IST
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5 days vebinar meeting ended in gb pant sansthan
गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में 24 मई शुरू हुए समर स्कूल ऑन माइग्रेंट रियलटीज वेबीनार संगोष्ठी का समापन बुधवार को हुआ। शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण ने किया। बताया कि कोरोना महामारी से प्रभावित अधिकतर मजदूर उत्तर भारत से हैं। इसलिए हमारी एकेडमी की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम इस आपदा के विभिन्न आयामों पर गंभीरता से सोचें। वेबीनार का प्रथम व्याख्यान वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर ने विकास, विस्थापन और वनाधिकार से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर चर्चा से की थी।
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दूसरे व्याख्यान में आईआईपीएस मुंबई के माइग्रेशन और अर्बन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आरबी भगत ने बताया था कि वर्तमान में शहरों का स्वरूप मोटे तौर पर प्रवासियों के लिए बहिष्करण को बढ़ावा देता है। तीसरे व्याख्यान को मृत्युंजय कुमार तथा चौथे को टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान मुंबई के प्रोफेसर मनीष झा ने संबोधित किया। कहा कि हम सभी एक अप्रत्याशित दौर से दो-चार हो रहे हैं। इस महामारी की वजह से मजदूर वर्ग का जीवन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पांचवे व्याख्यान में सामाजिक व राजैतिक विश्लेषक प्रोफेसर योगेंद्र यादव ने कोरोना महामारी के आईने में भारतीय राज का बदलता चेहरा विषय पर अपनी बात राखी थी। आज अंतिम दिन दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुभद्रा चन्ना मित्रा ने कहा कि जेंडर लेंस केवल महिलाओं की समस्यायों की ही बात नही करता है। ये एक गलत भ्रांति है। समापन सत्र में संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेन हर्षे ने भी अपने विचार रखे।
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