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सिपाही भर्ती का परिणाम संशोधित करने का आदेश
Updated Fri, 08 Sep 2017 08:23 PM IST
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सिपाही भर्ती का परिणाम संशोधित करने का आदेश
41610 पदों पर भर्ती का 2015 में जारी हुआ था परिणाम
महिला वर्ग को गलत क्षैतिज आरक्षण देने पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने नागरिक पुलिस, पीएसी और अग्निशमन विभाग में 41610 आरक्षियों की भर्ती का घोषित परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया है। भर्ती प्रक्रिया में विशेष आरक्षित वर्ग को क्षैतिज आरक्षण का गलत लाभ देने के खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कहा गया कि महिलाओं को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण गलत तरीके से लागू करते हुए आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य की सीटों पर चयनित कर लिया गया। न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए नियमानुसार आरक्षण लागू करने और उसके अनुसार तीन माह में परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया है।
बृजेश कुमार तिवारी, रवि कुमार शर्मा, अर्जुन सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थी। इनके अधिवक्ता सीमांत सिंह ने दलील दी कि सिपाही भर्ती के लिए 14 मई 2013 को जारी विज्ञापन का अंतिम चयन परिणाम 16 जुलाई 2015 को जारी किया गया। इसमें विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित) को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण गलत तरीके से लागू किया गया। महिलाओं को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण के तहत सामान्य की कई सीटें अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण रिक्त रह गईं। नियमानुसार इनको अन्य सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए था। मगर पुलिस भर्ती बोर्ड ने इन रिक्त सीटों पर आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी-एसटी) की महिला अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी। जबकि क्षैतिज आरक्षण उसी वर्ग के तहत दिया जा सकता है जिस वर्ग का अभ्यर्थी है।
दरोगा भर्ती में भी इसी आधार पर बदला था परिणाम
ठीक इन्हीं कारणों से दरोगा भर्ती का परिणाम भी संशोधित करना पड़ा था। कोर्ट को बताया गया कि आशीष कुमार पांडेय केस में हाईकोर्ट ने 16 मार्च 2016 को गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के आधार पर परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था। इस फैसले की हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी पुष्टि की और सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में इसे चुनौती नहीं दी है। लिहाजा आदेश लागू कर दिया गया है। कोर्ट ने सिपाही भर्ती मामले में भी आशीष कुमार पांडेय केस के निर्णय को लागू करते हुए संशोधन का आदेश दिया है।
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फेरबदल से चार हजार नए अभ्यर्थियों को होगा लाभ
प्रदेश सरकार ने 10 अप्रैल 2017 को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि यदि परिणाम संशोधित किया जाता है तो इससे करीब चार हजार अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। करीब चार हजार नए लोगों को मौका मिलेगा, जबकि इतनी ही संख्या में लोग बाहर जाएंगे। क्योंकि कोर्ट के आदेश के तहत महिलाओं को उनके वर्गों में ले जाने पर उस वर्ग के कुछ चयनित अभ्यर्थियों को बाहर करना पड़ेगा। जबकि रिक्त हुए पदों पर इतने ही नए लोगों को मौका मिल सकेगा।
किसको कितना क्षैतिज आरक्षण
नियमानुसार महिला अभ्यर्थियों को 20 प्रतिशत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित को दो प्रतिशत और एक्स सर्विस मैन को पांच प्रतिशत आरक्षण उनके वर्ग में अर्थात सामान्य, ओबीसी या एससी-एसटी कोटे के भीतर मिलना चाहिए।
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41610 पदों पर भर्ती का 2015 में जारी हुआ था परिणाम
महिला वर्ग को गलत क्षैतिज आरक्षण देने पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने नागरिक पुलिस, पीएसी और अग्निशमन विभाग में 41610 आरक्षियों की भर्ती का घोषित परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया है। भर्ती प्रक्रिया में विशेष आरक्षित वर्ग को क्षैतिज आरक्षण का गलत लाभ देने के खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कहा गया कि महिलाओं को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण गलत तरीके से लागू करते हुए आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य की सीटों पर चयनित कर लिया गया। न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए नियमानुसार आरक्षण लागू करने और उसके अनुसार तीन माह में परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया है।
बृजेश कुमार तिवारी, रवि कुमार शर्मा, अर्जुन सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थी। इनके अधिवक्ता सीमांत सिंह ने दलील दी कि सिपाही भर्ती के लिए 14 मई 2013 को जारी विज्ञापन का अंतिम चयन परिणाम 16 जुलाई 2015 को जारी किया गया। इसमें विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित) को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण गलत तरीके से लागू किया गया। महिलाओं को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण के तहत सामान्य की कई सीटें अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण रिक्त रह गईं। नियमानुसार इनको अन्य सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए था। मगर पुलिस भर्ती बोर्ड ने इन रिक्त सीटों पर आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी-एसटी) की महिला अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी। जबकि क्षैतिज आरक्षण उसी वर्ग के तहत दिया जा सकता है जिस वर्ग का अभ्यर्थी है।
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दरोगा भर्ती में भी इसी आधार पर बदला था परिणाम
ठीक इन्हीं कारणों से दरोगा भर्ती का परिणाम भी संशोधित करना पड़ा था। कोर्ट को बताया गया कि आशीष कुमार पांडेय केस में हाईकोर्ट ने 16 मार्च 2016 को गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के आधार पर परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था। इस फैसले की हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी पुष्टि की और सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में इसे चुनौती नहीं दी है। लिहाजा आदेश लागू कर दिया गया है। कोर्ट ने सिपाही भर्ती मामले में भी आशीष कुमार पांडेय केस के निर्णय को लागू करते हुए संशोधन का आदेश दिया है।
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फेरबदल से चार हजार नए अभ्यर्थियों को होगा लाभ
प्रदेश सरकार ने 10 अप्रैल 2017 को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि यदि परिणाम संशोधित किया जाता है तो इससे करीब चार हजार अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। करीब चार हजार नए लोगों को मौका मिलेगा, जबकि इतनी ही संख्या में लोग बाहर जाएंगे। क्योंकि कोर्ट के आदेश के तहत महिलाओं को उनके वर्गों में ले जाने पर उस वर्ग के कुछ चयनित अभ्यर्थियों को बाहर करना पड़ेगा। जबकि रिक्त हुए पदों पर इतने ही नए लोगों को मौका मिल सकेगा।
किसको कितना क्षैतिज आरक्षण
नियमानुसार महिला अभ्यर्थियों को 20 प्रतिशत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित को दो प्रतिशत और एक्स सर्विस मैन को पांच प्रतिशत आरक्षण उनके वर्ग में अर्थात सामान्य, ओबीसी या एससी-एसटी कोटे के भीतर मिलना चाहिए।