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चकबंदी लेखपालों के रिक्त पद कैरी फारवर्ड करने पर रोक

Mon, 21 Aug 2017 08:43 PM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 08:43 PM IST
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चकबंदी लेखपालों के रिक्त पद कैरी फारवर्ड करने पर रोक
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चकबंदी लेखपाल की रिक्तियां कैरी फारवर्ड करने पर रोक
0 सरकार बताए हॉरिजंटल और वर्टिकल रिर्जेवेशन साथ कैसे लागू होगा
0 मूल एक्ट का अतिक्रमण नहीं कर सकता शासनादेश: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। चंकबंदी लेखपालों की भर्ती में विशेष आरक्षित कोटे के रिक्त रह गए पदों को अगली भर्ती के लिए कै री फारवर्ड करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण लागू करने पर अहम सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि किसी भर्ती प्रक्रिया में वर्टिकल और हॉरिजेंटल रिर्जेवेशन एक साथ कैसे लागू किया जा सकता है। इसे लेकर सरकार की क्या नीति है। अदालत ने यह भी बताने को कहा है कि आरक्षण पूरे संवर्ग पर लागू किया जाता है या रिक्त पदों पर।
लेखपाल अभ्यर्थी हरिकेश और अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह की दलील थी कि कुल 2831 पदों पर भर्ती का परिणाम 16 अगस्त 2016 को जारी किया गया। कुल 2783 पदों पर नियुक्ति की गई। इसमें विशेष आरक्षित कोटे के आने वाले (विकलांग, पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) अभ्यर्थी न मिल पाने के कारण 48 पदों को अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड करने का निर्णय लिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। एकल न्यायपीठ ने याचिका खारिज दी तो विशेष अपील दाखिल की गई।
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अधिवक्ता की दलील थी कि सात अप्रैल 2016 को सरकार ने उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस रिर्जेवेशन एक्ट की धारा 3(5) में संशोधन करते हुए कैरी फारवर्ड करने का नियम समाप्त कर दिया है। इसलिए रिक्त रह गए पदों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए। सरकारी वकील का कहना था कि 17 जून 2016 को शासनादेश जारी कर निर्णय लिया गया है कि संशोधन के पूर्व जारी विज्ञापनों के पद कैरी फारवर्ड किए जाएंगे।
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कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने एक्ट में संशोधन कर दिया तो कोई भी शासनादेश मूल एक्ट का अतिक्रमण नहीं कर सकता है। यदि शासनादेश को सही भी मान लिया जाए तो कैरी फारवर्ड की गई सीटें और अगली भर्ती की सीटों को मिलाकर कुल सीटों की संख्या बढ़ जाएगी और इससे अधिकतम तीन प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी प्रावधान का उल्लंघन होगा जो एक्ट के विपरीत है। कोर्ट ने सरकार से जानना है कि एक ही भर्ती में हॉरिजेंटल और वर्टिकल रिर्जेवेशन कैसे लागू किया जा सकता है। हॉरिजेंटल रिर्जेवेशन पूरे संवर्ग पर लागू होता है या सिर्फ रिक्त पदों पर। कोर्ट इस मामले पर 29 अगस्त को सुनवाई करेगी।
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