{"_id":"5ade3bb84f1c1b85028b61af","slug":"31524513720-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अखाड़ा परिषद ने दलित साधु का महामंडलेश्वर बनाने का किया एलान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अखाड़ा परिषद ने दलित साधु का महामंडलेश्वर बनाने का किया एलान
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सभी केंद्र
000000000000000000
अखाड़ा परिषद ने दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने का किया एलान
0 पंजाब के जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि के दलित शिष्य कन्हैया प्रभु नंद गिरि बनेंगे महामंडलेश्वर
0 प्रयाग में यमुना किनारे जूना अखाड़े के मौज गिरि आश्रम में पूर्ण संन्यास की दीक्षा दिलाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सोमवार की शाम प्रयाग में यमुना तट पर दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा की। सनातन संस्कृति के इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्वर उपाधि देने का अखाड़े का यह पहला निर्णय है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने इसकी पुष्टि की। वहीं महामंत्री महंत हरि गिरि ने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा आध्यात्मिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे कुंभ से पहले देश में सामाजिक गैर बराबरी और जातीय भेदभाव दूर करने में मदद मिलेगी।
आजमगढ़ के ग्राम बरौनी दिवाकर पट्टी, थाना बिलरियागंज के निवासी कन्हैया कुमार कश्यप ने वर्ष 2016 के उज्जैन स्थित सिंहस्थ कुंभ में पटियाला (पंजाब) काली मंदिर स्थित जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि महाराज से पहली बार संन्यास दीक्षा ली थी। तब महंत पंचानन गिरि महाराज ने उनका नामकरण कन्हैया प्रभुनंद गिरि के रूप में किया था। कन्हैया कुमार से महंत प्रभुनंद गिरि तक का सफर तय करने वाले दलित साधु को सोमवार की शाम यमुना किनारे मौज गिरि आश्रम में पूर्ण संन्यास दिलाया गया। केश मुंडन के बाद संन्यास संस्कार की दीक्षा अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और जूना अखाड़े के संतों की मौजूदगी में सविधि मंत्रोच्चार के साथ हुई। इससे पहले स्नान के बाद उनको संन्यास वेश धारण कराया गया। दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने का एलान काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी नरेंद्रानंद सररस्वती महाराज की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, महामंत्री के अलावा कन्हैया प्रभुनंद के गुरु पंचानन गिरि महाराज भी उपस्थित थे।
आदिवासी, वनवासी समुदाय के साधुओं को तो महामंडलेश्वर बनाया गया था, लेकिन किसी दलित को इस शीर्ष पद पर सुशोभित करने का अखाड़ा परिषद का यह पहला फैसला है। इससे देश भर में सामाजिक समरसता की दिशा में सुखद संदेश जाएगा। - नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।
विज्ञापन
विज्ञापन
000000000000000000
अखाड़ा परिषद ने दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने का किया एलान
0 पंजाब के जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि के दलित शिष्य कन्हैया प्रभु नंद गिरि बनेंगे महामंडलेश्वर
0 प्रयाग में यमुना किनारे जूना अखाड़े के मौज गिरि आश्रम में पूर्ण संन्यास की दीक्षा दिलाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सोमवार की शाम प्रयाग में यमुना तट पर दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा की। सनातन संस्कृति के इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्वर उपाधि देने का अखाड़े का यह पहला निर्णय है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने इसकी पुष्टि की। वहीं महामंत्री महंत हरि गिरि ने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा आध्यात्मिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे कुंभ से पहले देश में सामाजिक गैर बराबरी और जातीय भेदभाव दूर करने में मदद मिलेगी।
आजमगढ़ के ग्राम बरौनी दिवाकर पट्टी, थाना बिलरियागंज के निवासी कन्हैया कुमार कश्यप ने वर्ष 2016 के उज्जैन स्थित सिंहस्थ कुंभ में पटियाला (पंजाब) काली मंदिर स्थित जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि महाराज से पहली बार संन्यास दीक्षा ली थी। तब महंत पंचानन गिरि महाराज ने उनका नामकरण कन्हैया प्रभुनंद गिरि के रूप में किया था। कन्हैया कुमार से महंत प्रभुनंद गिरि तक का सफर तय करने वाले दलित साधु को सोमवार की शाम यमुना किनारे मौज गिरि आश्रम में पूर्ण संन्यास दिलाया गया। केश मुंडन के बाद संन्यास संस्कार की दीक्षा अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और जूना अखाड़े के संतों की मौजूदगी में सविधि मंत्रोच्चार के साथ हुई। इससे पहले स्नान के बाद उनको संन्यास वेश धारण कराया गया। दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाने का एलान काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी नरेंद्रानंद सररस्वती महाराज की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, महामंत्री के अलावा कन्हैया प्रभुनंद के गुरु पंचानन गिरि महाराज भी उपस्थित थे।
विज्ञापन
आदिवासी, वनवासी समुदाय के साधुओं को तो महामंडलेश्वर बनाया गया था, लेकिन किसी दलित को इस शीर्ष पद पर सुशोभित करने का अखाड़ा परिषद का यह पहला फैसला है। इससे देश भर में सामाजिक समरसता की दिशा में सुखद संदेश जाएगा। - नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।
विज्ञापन