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मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति अपवाद स्परूप
Updated Tue, 11 Dec 2018 08:35 PM IST
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मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति
अपवाद स्वरूप : हाई कोर्ट
- आश्रित के लिए पद नहीं आरक्षित किया जा सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देना सामान्य अधिकार नहीं है। यह अपवाद स्वरूप है। सभी को नौकरी का समान अवसर मिले यह सामान्य अधिकार है और मृतक कर्मचारी के आश्रित को नियुक्ति मिले यह सामान्य अधिकार का अपवाद है।
मिर्जापुर की पूनम यादव की अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने कहा कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली का उद्देश्य आश्रित के लिए पद आरक्षित करना नहीं है। यह कर्मचारी की मौत से परिवार पर आए तात्कालिक संकट का सामना करने की एक अनुकंपा है। यह सामान्य नियम का अपवाद है। इससे आश्रित को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने याची के मामले को अपवाद मानने से इंकार कर दिया और एकलपीठ के फैसले को सही करार देते हुए आदेश के खिलाफ विशेष अपील खारिज कर दी।
अपील पर राज्य सरकार के अधिवक्ता बीपी सिंह कच्छवाह ने कहा कि सरकार आश्रित के लिए अनिश्चित समय तक पद आरक्षित नहीं रख सकती। एक निश्चित अवधि में दाखिल अर्जी पर ही विचार हो सकता है। याची के ससुर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 22 दिसंबर 1999 को उनकी मृत्यु हो गई। याची के पति ने 2004 में मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग में अर्जी दी थी। इस पर निर्णय होने से पूर्व ही 29 मई 2004 को पति की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई।
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23 जनवरी 2014 को याची ने ससुर के आश्रित के रूप में नौकरी की मांग में अर्जी दी। विभाग ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि याची के पति सेवा में नहीं थे। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर कोर्ट ने पुलिस विभाग को नए सिरे से सकारण निर्णय लेने का निर्देश दिया। विभाग ने कहा कि परिवार में मृतक की विधवा पुत्रवधु शामिल है। ससुर की मृत्यु के समय याची विधवा नहीं थी। विभाग ने हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के शिव कुमार दुबे केस के फैसले के सिद्धांतों के आधार पर एक सितंबर 18 को अर्जी खारिज कर दी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई थी।
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अपवाद स्वरूप : हाई कोर्ट
- आश्रित के लिए पद नहीं आरक्षित किया जा सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देना सामान्य अधिकार नहीं है। यह अपवाद स्वरूप है। सभी को नौकरी का समान अवसर मिले यह सामान्य अधिकार है और मृतक कर्मचारी के आश्रित को नियुक्ति मिले यह सामान्य अधिकार का अपवाद है।
मिर्जापुर की पूनम यादव की अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने कहा कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली का उद्देश्य आश्रित के लिए पद आरक्षित करना नहीं है। यह कर्मचारी की मौत से परिवार पर आए तात्कालिक संकट का सामना करने की एक अनुकंपा है। यह सामान्य नियम का अपवाद है। इससे आश्रित को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने याची के मामले को अपवाद मानने से इंकार कर दिया और एकलपीठ के फैसले को सही करार देते हुए आदेश के खिलाफ विशेष अपील खारिज कर दी।
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अपील पर राज्य सरकार के अधिवक्ता बीपी सिंह कच्छवाह ने कहा कि सरकार आश्रित के लिए अनिश्चित समय तक पद आरक्षित नहीं रख सकती। एक निश्चित अवधि में दाखिल अर्जी पर ही विचार हो सकता है। याची के ससुर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 22 दिसंबर 1999 को उनकी मृत्यु हो गई। याची के पति ने 2004 में मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग में अर्जी दी थी। इस पर निर्णय होने से पूर्व ही 29 मई 2004 को पति की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई।
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23 जनवरी 2014 को याची ने ससुर के आश्रित के रूप में नौकरी की मांग में अर्जी दी। विभाग ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि याची के पति सेवा में नहीं थे। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर कोर्ट ने पुलिस विभाग को नए सिरे से सकारण निर्णय लेने का निर्देश दिया। विभाग ने कहा कि परिवार में मृतक की विधवा पुत्रवधु शामिल है। ससुर की मृत्यु के समय याची विधवा नहीं थी। विभाग ने हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के शिव कुमार दुबे केस के फैसले के सिद्धांतों के आधार पर एक सितंबर 18 को अर्जी खारिज कर दी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई थी।