{"_id":"5c51bbf6bdec22738004ebee","slug":"191548860406-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मऊ के पूर्व डीआईओएस को तीन की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मऊ के पूर्व डीआईओएस को तीन की कैद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ के पूर्व डीआईओएस सुनील दत्त को तीन माह की सजा
अवमानना में हाईकोर्ट ने सुनाई सजा, दो हजार जुर्माना लगा
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर मऊ के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक और वर्तमान में उपसचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद सुनील दत्त को तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है। उन पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने सुनील दत्त को सजा भोगने के लिए एक माह के भीतर सीजेएम इलाहाबाद (प्रयागराज) के समक्ष समर्पण करने का आदेश दिया है।
विश्वनाथ लाल की अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस ने हाईकोर्ट के आदेश को समझे बिना उससे ऊपर जाकर आदेश दिया है। ऐसा करके उन्होंने हाईकोर्ट की अवमानना की है। हाईकोर्ट ने याची विश्वनाथ लाल को 21 जुलाई 1977 से 2009 तक की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना कर भुगतान का आदेश दिया था। तत्कालीन डीआईओएस सुनील दत्त ने याची का प्रत्यावेदन निस्तारित करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने 1977 से 1994 तक के याची के दावे को अस्वीकार कर दिया है। इस स्थिति में वह सेवा और पेंशन आदि पाने का हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे अवमानना मानते हुए कहा है कि डीआईओएस को अपने किए का कोई पक्षतावा भी नहीं है इसलिए वह सजा के हकदार हैं।
विज्ञापन
अवमानना में हाईकोर्ट ने सुनाई सजा, दो हजार जुर्माना लगा
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर मऊ के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक और वर्तमान में उपसचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद सुनील दत्त को तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है। उन पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने सुनील दत्त को सजा भोगने के लिए एक माह के भीतर सीजेएम इलाहाबाद (प्रयागराज) के समक्ष समर्पण करने का आदेश दिया है।
विश्वनाथ लाल की अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस ने हाईकोर्ट के आदेश को समझे बिना उससे ऊपर जाकर आदेश दिया है। ऐसा करके उन्होंने हाईकोर्ट की अवमानना की है। हाईकोर्ट ने याची विश्वनाथ लाल को 21 जुलाई 1977 से 2009 तक की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना कर भुगतान का आदेश दिया था। तत्कालीन डीआईओएस सुनील दत्त ने याची का प्रत्यावेदन निस्तारित करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने 1977 से 1994 तक के याची के दावे को अस्वीकार कर दिया है। इस स्थिति में वह सेवा और पेंशन आदि पाने का हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे अवमानना मानते हुए कहा है कि डीआईओएस को अपने किए का कोई पक्षतावा भी नहीं है इसलिए वह सजा के हकदार हैं।
विज्ञापन