{"_id":"59a96d044f1c1be9278b4c06","slug":"181504275716-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वविद्यालय देगा डिजिटल पेमेंट का हिसाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वविद्यालय देगा डिजिटल पेमेंट का हिसाब
Updated Fri, 01 Sep 2017 07:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्वविद्यालय देगा डिजिटल पेमेंट का हिसाब
0 नेशनल डिजिटल पेमेंट्स मिशन को लेकर यूजीसी गंभीर
0 विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर मांगीं कई जरूरी सूचनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत देश के तमाम विश्वविद्यालयों को हिसाब देना होगा कि उन्होंने केंद्र सरकार की योजना नेशनल डिजिटल पेमेंट्स मिशन (एनडीपीएम) के तहत साल भर में कितना डिजिटल लेनदेन किया। इसके साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय से संबंधित अन्य सूचनाएं भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को उपलब्ध करानी होंगी। इस बाबत यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर दिया है।
यूजीसी की ओर से कुलपतियों को जारी पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की मंशा है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों से लिया जाने वाला शुल्क एवं अन्य प्रकार के भुगतान डिजिटल मोड पर हों। यानी भुगतान ऑनलाइन हो। इस व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करने के लिए यूजीसी की ओर से पहले भी विश्वविद्यालयों को कई पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस मामले में विश्वविद्यालयों ने साल भर क्या किया, अब उन्हें इसका हिसाब देना होगा। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर पूछा है कि साल भर में कितने छात्रों से डिजिटल पेमेंट के तहत शुल्क लिया गया, अन्य सेवाओं के लिए वेंडर्स को कितना डिजिटल भुगतान किया गया, कितने शिक्षकों एवं स्टाफ को वेतन के रूप में डिजिटल भुगतान किया गया, विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध कॉलेजों में विद्यार्थियों की कितनी संख्या है और संस्थान में कैंटीन है या नहीं। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को एक हफ्ते में यह सूचना प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
0 नेशनल डिजिटल पेमेंट्स मिशन को लेकर यूजीसी गंभीर
0 विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर मांगीं कई जरूरी सूचनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत देश के तमाम विश्वविद्यालयों को हिसाब देना होगा कि उन्होंने केंद्र सरकार की योजना नेशनल डिजिटल पेमेंट्स मिशन (एनडीपीएम) के तहत साल भर में कितना डिजिटल लेनदेन किया। इसके साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय से संबंधित अन्य सूचनाएं भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को उपलब्ध करानी होंगी। इस बाबत यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर दिया है।
यूजीसी की ओर से कुलपतियों को जारी पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की मंशा है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों से लिया जाने वाला शुल्क एवं अन्य प्रकार के भुगतान डिजिटल मोड पर हों। यानी भुगतान ऑनलाइन हो। इस व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करने के लिए यूजीसी की ओर से पहले भी विश्वविद्यालयों को कई पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस मामले में विश्वविद्यालयों ने साल भर क्या किया, अब उन्हें इसका हिसाब देना होगा। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर पूछा है कि साल भर में कितने छात्रों से डिजिटल पेमेंट के तहत शुल्क लिया गया, अन्य सेवाओं के लिए वेंडर्स को कितना डिजिटल भुगतान किया गया, कितने शिक्षकों एवं स्टाफ को वेतन के रूप में डिजिटल भुगतान किया गया, विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध कॉलेजों में विद्यार्थियों की कितनी संख्या है और संस्थान में कैंटीन है या नहीं। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को एक हफ्ते में यह सूचना प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन