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जल्दबाजी में हुए रजिस्ट्रेशन, अब रिटर्न भरने में होगी मु सीबत
Updated Tue, 22 Aug 2017 08:15 PM IST
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जल्दबाजी में हुए माइग्रेशन, अब रिटर्न भरने में होगी मुसीबत
0 वैट में रजिस्टर्ड व्यापारियों की आईडी पासवर्ड के जरिए ए और बी दो पार्ट में पूरी होनी थी माइग्रेशन की प्रक्रिया
0 ज्यादातर व्यापारियों ने माइग्रेशन के लिए भरा ए पार्ट, अफसरों ने भी व्यापारियों को नहीं दी पूरी जानकारी
0 अब बी पार्ट भरने के लिए 31 अगस्त तक का वक्त, ऐसा करने पर ही सितंबर में ऑनलाइन भर सकेंगे रिटर्न
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बड़ी संख्या में व्यापारी जीएसटी में माइग्रेशन करा चुके हैं लेकिन उनमें से अधिकतर का पूरी तरह से माइग्रेशन अब तक हुआ ही नहीं है। ऐसे व्यापारियों के लिए सितंबर में रिटर्न भरना मुश्किल होगा, क्योंकि ऑनलाइन जीएसटीआर तभी भर सकेंगे, जब जीएसटी में पूरी तरह माइग्रेशन होगा। अब व्यापारियों को अधूरे माइग्रेशन का पता चल रहा है तो वे उसे पूरा कराने के लिए सीए से लेकर अधिवक्ताओं तक के चक्कर लगा रहे हैं।
दरअसल वैट में रजिस्टर्ड व्यापारियों को वाणिज्य कर विभाग की ओर से आवंटित आईडी पासवर्ड के आधार पर जीएसटी में ऑनलाइन माइग्रेशन कराना था। माइग्रेशन ए और बी दो पार्ट में होता था। विभाग के अफसरों ने आईडी पासवर्ड जारी करते समय व्यापारियों को दोनों पार्ट की जानकारी ही नहीं दी, सो ज्यादातर व्यापारियों ने आईडी पासवर्ड के आधार पर ए पार्ट में माइग्रेशन करा लिया और बी पार्ट पर ध्यान ही नहीं दिया, जबकि पूर्ण रूप से माइग्रेशन होने के बाद ही परमानेंट जीएसटीएन मिलना है। पूरी तरह माइग्रेशन न होने के कारण व्यापारी सितंबर में ऑनलाइन रिटर्न दाखिल नहीं कर सकेंगे।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि इसके लिए सीधे तौर पर अफसर जिम्मेदार हैं, जिन्होंने व्यापारियों के जल्दबाजी में माइग्रेशन कराने का दबाव बनाया और बी पार्ट के बारे में जानकारी ही नहीं दी। हालांकि व्यापारियों के पास अब 31 अगस्त तक का समय है, जब वे बी पार्ट को भरकर माइग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ऐसा करने पर ही एक से पांच सितंबर के बीच में रिटर्न दाखिल हो सकेगा।
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नई हो गईं टिन पर रजिस्ट्रेशन कराने वालीं वर्षों पुरानी फर्में
इलाहाबाद। वर्षों पहले वैट में रजिस्टर्ड जिन व्यापारियों ने टिन के आधार पर जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया अब वे पुराने व्यापारी नहीं रहे, बल्कि नया रजिस्ट्रेशन हो गया है और उनकी फर्म अनियमित हो गई। ऐसे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि अब उनके पास मौजूद जून तक के स्टाक का क्या होगा, आईटीसी का लाभ कैसे मिलेगा और जुलाई का रिटर्न कैसे भरेंगे। दरअसल यह गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि जिन व्यापारियों को आईडी पासवर्ड नहीं मिले, अफसरों ने उनसे टिन के आधार पर जीएसटी में माइग्रेशन कराने को कहा और टिन नंबर दर्ज करने के दौरान कारण के रूप में ‘अब तक आईडी पार्स प्राप्त नहीं हुआ’ लिखने को कहा गया। व्यापारियों ने ऐसा ही किया। जिसका नतीजा यह हुआ कि पुराने व्यापारियों का नए सिरे से रजिस्ट्रेशन हो गया। इसे लेकर व्यापारी परेशान हैं और जीएसटी की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण अफसरों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मारवाड़ी धर्मशाला में 26 को मेगा कैंप
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति तथा राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग की ओर से 26 अगस्त को मारवाड़ी धर्मशाला में मेगा कैंप का आयोजन किया गया है। इसमें खंड एक से 14 तक के अफसर मौजूद रहेंगे और व्यापारियों के जीएसटी में नए रजिस्ट्रेशन, समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
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0 वैट में रजिस्टर्ड व्यापारियों की आईडी पासवर्ड के जरिए ए और बी दो पार्ट में पूरी होनी थी माइग्रेशन की प्रक्रिया
0 ज्यादातर व्यापारियों ने माइग्रेशन के लिए भरा ए पार्ट, अफसरों ने भी व्यापारियों को नहीं दी पूरी जानकारी
0 अब बी पार्ट भरने के लिए 31 अगस्त तक का वक्त, ऐसा करने पर ही सितंबर में ऑनलाइन भर सकेंगे रिटर्न
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बड़ी संख्या में व्यापारी जीएसटी में माइग्रेशन करा चुके हैं लेकिन उनमें से अधिकतर का पूरी तरह से माइग्रेशन अब तक हुआ ही नहीं है। ऐसे व्यापारियों के लिए सितंबर में रिटर्न भरना मुश्किल होगा, क्योंकि ऑनलाइन जीएसटीआर तभी भर सकेंगे, जब जीएसटी में पूरी तरह माइग्रेशन होगा। अब व्यापारियों को अधूरे माइग्रेशन का पता चल रहा है तो वे उसे पूरा कराने के लिए सीए से लेकर अधिवक्ताओं तक के चक्कर लगा रहे हैं।
दरअसल वैट में रजिस्टर्ड व्यापारियों को वाणिज्य कर विभाग की ओर से आवंटित आईडी पासवर्ड के आधार पर जीएसटी में ऑनलाइन माइग्रेशन कराना था। माइग्रेशन ए और बी दो पार्ट में होता था। विभाग के अफसरों ने आईडी पासवर्ड जारी करते समय व्यापारियों को दोनों पार्ट की जानकारी ही नहीं दी, सो ज्यादातर व्यापारियों ने आईडी पासवर्ड के आधार पर ए पार्ट में माइग्रेशन करा लिया और बी पार्ट पर ध्यान ही नहीं दिया, जबकि पूर्ण रूप से माइग्रेशन होने के बाद ही परमानेंट जीएसटीएन मिलना है। पूरी तरह माइग्रेशन न होने के कारण व्यापारी सितंबर में ऑनलाइन रिटर्न दाखिल नहीं कर सकेंगे।
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उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि इसके लिए सीधे तौर पर अफसर जिम्मेदार हैं, जिन्होंने व्यापारियों के जल्दबाजी में माइग्रेशन कराने का दबाव बनाया और बी पार्ट के बारे में जानकारी ही नहीं दी। हालांकि व्यापारियों के पास अब 31 अगस्त तक का समय है, जब वे बी पार्ट को भरकर माइग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ऐसा करने पर ही एक से पांच सितंबर के बीच में रिटर्न दाखिल हो सकेगा।
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नई हो गईं टिन पर रजिस्ट्रेशन कराने वालीं वर्षों पुरानी फर्में
इलाहाबाद। वर्षों पहले वैट में रजिस्टर्ड जिन व्यापारियों ने टिन के आधार पर जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया अब वे पुराने व्यापारी नहीं रहे, बल्कि नया रजिस्ट्रेशन हो गया है और उनकी फर्म अनियमित हो गई। ऐसे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि अब उनके पास मौजूद जून तक के स्टाक का क्या होगा, आईटीसी का लाभ कैसे मिलेगा और जुलाई का रिटर्न कैसे भरेंगे। दरअसल यह गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि जिन व्यापारियों को आईडी पासवर्ड नहीं मिले, अफसरों ने उनसे टिन के आधार पर जीएसटी में माइग्रेशन कराने को कहा और टिन नंबर दर्ज करने के दौरान कारण के रूप में ‘अब तक आईडी पार्स प्राप्त नहीं हुआ’ लिखने को कहा गया। व्यापारियों ने ऐसा ही किया। जिसका नतीजा यह हुआ कि पुराने व्यापारियों का नए सिरे से रजिस्ट्रेशन हो गया। इसे लेकर व्यापारी परेशान हैं और जीएसटी की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण अफसरों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मारवाड़ी धर्मशाला में 26 को मेगा कैंप
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति तथा राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग की ओर से 26 अगस्त को मारवाड़ी धर्मशाला में मेगा कैंप का आयोजन किया गया है। इसमें खंड एक से 14 तक के अफसर मौजूद रहेंगे और व्यापारियों के जीएसटी में नए रजिस्ट्रेशन, समस्याओं का समाधान किया जाएगा।