{"_id":"5a9d9f8f4f1c1ba32a8bad45","slug":"171520279439-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सा जगत में ध्यान ने जमाई धाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सा जगत में ध्यान ने जमाई धाक
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिकित्सा जगत में ध्यान ने जमाई धाक
0 मेडिटेशन पर विदेश से आए वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए पेपर
0 ध्यान और योग के क्षेत्र में तलाशी गईं भविष्य की संभावनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
चिकित्सा जगत में भी ध्यान और योग ने अपनी धाक जमा ली है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संज्ञान विज्ञान केंद्र (सीबीसीएस) में ‘ध्यान और योग’ पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. केके दीपक ने चिकित्सा के क्षेत्र में ध्यान और योग की अहमियत से लोगों को अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि मरीजों को स्वस्थ रखने में दवाओं के साथ ध्यान और योग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक रूप से बीमार व्यक्ति को भी ध्यान और योग के माध्यम से स्वस्थ बनाया जा रहा है। इस दौरान वक्ताओं ने यह भी बताया कि भविष्य में मेडिटेशन के क्षेत्र में क्या नया किया जा सकता है। यह चर्चा भी हुई कि शिक्षा के क्षेत्र में मेडिटेशन को किस तरह आगे बढ़ाया जा सके। संगोष्ठी में इटली के वैज्ञानिक प्रो. एंटोनिनो एवं प्रो. पैट्रिजिओ और इजरायली वैज्ञानिक प्रो. अवीवा ने मेडिटेशन पर अपने पेपर भी प्रस्तुत किए।
इसके अलावा ब्रेन इमेज पर चर्चा की और बुद्धिस्ट मेडिटेशन के फायदे बताए। इटली के वैज्ञानिक प्रो. पैट्रिजिओ ने मेडिटेशन पर मॉडल भी प्रस्तुत किया। सभी वैज्ञानिकों ने कहा कि मेडिटेशन एक ऐसी विधि है जो व्यक्ति के मानसिक विकास को उच्च सीमा तक ले जाती है। वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. नारायन श्रीनिवासन ने बताया कि ब्रेन में लगातार किस तरह के परिवर्तन होते हैं और मेडिटेशन का इन पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस मौके पर प्रो. जनक पांडेय, प्रो. भूमिका आर. कर, डॉ. सुप्रिया, डॉ. निहारिका सिंह आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
0 मेडिटेशन पर विदेश से आए वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए पेपर
0 ध्यान और योग के क्षेत्र में तलाशी गईं भविष्य की संभावनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
चिकित्सा जगत में भी ध्यान और योग ने अपनी धाक जमा ली है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संज्ञान विज्ञान केंद्र (सीबीसीएस) में ‘ध्यान और योग’ पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. केके दीपक ने चिकित्सा के क्षेत्र में ध्यान और योग की अहमियत से लोगों को अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि मरीजों को स्वस्थ रखने में दवाओं के साथ ध्यान और योग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक रूप से बीमार व्यक्ति को भी ध्यान और योग के माध्यम से स्वस्थ बनाया जा रहा है। इस दौरान वक्ताओं ने यह भी बताया कि भविष्य में मेडिटेशन के क्षेत्र में क्या नया किया जा सकता है। यह चर्चा भी हुई कि शिक्षा के क्षेत्र में मेडिटेशन को किस तरह आगे बढ़ाया जा सके। संगोष्ठी में इटली के वैज्ञानिक प्रो. एंटोनिनो एवं प्रो. पैट्रिजिओ और इजरायली वैज्ञानिक प्रो. अवीवा ने मेडिटेशन पर अपने पेपर भी प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
इसके अलावा ब्रेन इमेज पर चर्चा की और बुद्धिस्ट मेडिटेशन के फायदे बताए। इटली के वैज्ञानिक प्रो. पैट्रिजिओ ने मेडिटेशन पर मॉडल भी प्रस्तुत किया। सभी वैज्ञानिकों ने कहा कि मेडिटेशन एक ऐसी विधि है जो व्यक्ति के मानसिक विकास को उच्च सीमा तक ले जाती है। वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. नारायन श्रीनिवासन ने बताया कि ब्रेन में लगातार किस तरह के परिवर्तन होते हैं और मेडिटेशन का इन पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस मौके पर प्रो. जनक पांडेय, प्रो. भूमिका आर. कर, डॉ. सुप्रिया, डॉ. निहारिका सिंह आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन