MNNIT : इसरो के अध्यक्ष बोले- 2035 तक चंद्रमा पर उतरेगा भारत का स्वदेशी मिशन, 2040 तक होगा पूर्ण स्वदेशी मिशन
MNNIT News : मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) संस्थान का दीक्षांत समारोह शनिवार को आयोजित किया गया। इसमें मेधावी छात्रों को 46 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इस वर्ष 1569 डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉ. वी नारायण रहे। उन्होंने दीक्षांत भाषण दिया।
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) के दीक्षांत समारोह में इसरो (ISRO) के चेयरमैन व सचिव, अंतरिक्ष विभाग डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्वदेशी मिशन के तहत चंद्रमा पर उतरेंगे और 2040 तक देश पूरी तरह स्वदेशी मानव मिशन को अंजाम देगा। कहा कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
डॉ. नारायणन ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने बीते 60 वर्षों में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है। चंद्रयान, मंगलयान से लेकर अब तक 100 प्रक्षेपण सफलतापूर्वक पूरा किया है। आज भारत दुनिया की उन चुनिंदा शक्तियों में है, जिसने क्रायोजेनिक इंजन विकास में महारत हासिल की और अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉ. वी नारायण शनिवार एमएनएनआईटी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने के दिए दिए नौ मूलमंत्र
डॉ. नारायणन ने डिग्री धारण करने वाले टेक्नोक्रेट्स से कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को कुछ लौटाने की जिम्मेदारी भी है। अब समय है कि आप अपने ज्ञान और कौशल से समाज और राष्ट्र की सेवा करें। बड़े सपने, कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास, सतत सीखना, मेहनत और खुशी, चरित्र निर्माण, बड़े सपनों की ओर लक्ष्य, कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता आदि सफलता के मूलमंत्र हैं।
अब तक 133 उपग्रह कर चुके हैं प्रक्षेपित
डॉ. नारायणन ने कहा कि भारत ने 1975 में पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ अंतरिक्ष में भेजा था और आज हम 133 उपग्रह प्रक्षेपित कर चुके हैं। भारत 104 उपग्रह एक साथ लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड भी कायम कर चुका है। छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि आप अब जीवन के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। अपने ज्ञान और संस्कार से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। संगठन और राष्ट्र हमेशा व्यक्ति से ऊपर होते हैं। संगठन और देश की प्रगति ही आपकी असली उपलब्धि होगी।
46 मेधावियों को मिला गोल्ड मेडल
मेधावी छात्रों को 46 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इस वर्ष 1569 डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 1032 बीटेक, 267 एमटेक, 114 एमसीए, 62 एमबीए, 23 एमएससी व 71 पीएचडी की डिग्रियां शामिल रहीं। इनमें देश के विभिन्न राज्यों समेत जम्मू-कश्मीर के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। समारोह में डायरेक्ट एडमिशन ऑफ स्टूडेंट्स अब्राॅड (दासा) योजना के तहत दाखिला लेने वाले 51 विदेशी छात्रों को भी उपाधियां दी गईं।
समारोह में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डाॅ. वी नारायणन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) के वैभव कंसल को ‘ओवरऑल इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल’ मिला। वहीं, वर्षवार गोल्ड मेडल श्रेणी में ईसीई के निशांत अग्रवाल (तृतीय वर्ष), सिविल इंजीनियरिंग के सिद्धांत प्रजापति (द्वितीय वर्ष) व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अवनीश कुमार मिश्रा (प्रथम वर्ष) को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि इसरो के चेयरमैन डॉ. वी नारायण ने कहा कि मेडल इतनी आसानी से नहीं मिलता है। टॉपर बनने और मेडल पाने के लिए कड़ी परिश्रम और समर्पण करनी पड़ती है। कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचार, उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1961 में जब एमएनएनआईटी की स्थापना हुई थी, इसी वर्ष इसरो के कार्यक्रम की भी नींव रखी गई थी। उन्होंने संगमनगरी आकर काफी प्रसन्नता जाहिर की।
83 फीसदी रहा एमएनएनआईटी का प्लेसमेंट
निदेशक प्रो. आरएस वर्मा ने बताया कि एमएनएनआईटी ने इस वर्ष प्लेसमेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। स्नातक छात्रों का प्लेसमेंट 83.29 फीसदी और स्नातकोत्तर का 81.79 फीसदी रहा।
72 लाख सालाना का सर्वाधिक पैकेज
निदेशक ने बताया कि एप्पल ने बीटेक के चार छात्रों को 72 लाख रुपये वार्षिक का सर्वाधिक पैकेज ऑफर किया। बीटेक का औसत पैकेज 20.43 लाख वार्षिक रहा जबकि 192 छात्रों को इससे अधिक का पैकेज मिला। इनमें 86 छात्रों को 20 से 30 लाख, 47 छात्रों को 30 से 40 लाख, 14 छात्रों को 40 से 50 लाख, 35 छात्रों को 50 से 60 लाख और 27 छात्रों को 60 लाख रुपये से अधिक का पैकेज मिला।
440 से अधिक कंपनियों ने भर्ती के लिए एमएनएनआईटी का दौरा किया। साल में 19 पेटेंट स्वीकृत, सात नए दाखिल वित्त वर्ष 2024-25 में संस्थान को 5.31 करोड़ रुपये की 19 नई शोध परियोजनाएं मिलीं। इस दौरान 19 पेटेंट स्वीकृत हुए और सात नए दाखिल किए गए। परीक्षण व परामर्श क्षेत्र में 303 परियोजनाओं से 6.58 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। हाल ही में सीआईआर में 5.35 करोड़ रुपये की लागत से एफई-एसईएम और 53.98 लाख रुपये की लागत से टीजीए-डीएससी मशीनें स्थापित की गईं।
पूर्व छात्रों ने प्रदान की 58.34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति
एमएनएनआईटी पूर्व छात्रों ने ईडब्ल्यूएस छात्रों के लिए एमएनआर 99 छात्रवृत्ति के तौर पर 5,83,425 रुपये और इंजीनियर विजय वधावन छात्रवृत्ति के लिए 1,08,433 रुपये की धनराशि प्रदान की। नवाचार व शोध को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक स्वीकृत भारतीय पेटेंट पर 11 हजार का पुरस्कार देने की घोषणा की गई। बीई 1998 बैच ने नए छात्र गतिविधि केंद्र ‘एसएसी-98’ के निर्माण के लिए 81,61,942 रुपये संस्थान को हस्तांतरित कर दिए हैं। एनबीटी ग्रुप बंगलूरू के संस्थापक निदेशक डाॅ. विवेक गर्ग ने छात्रवृत्ति पहल के लिए 25 लाख देने का संकल्प लिया है।
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