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खूब चले, फिर भी थके नहीं पांव
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कुंभ
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खूब चले, फिर भी थके नहीं पांव
संगम की रेती पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने किया फेसबुक अपडेट
गंगा की लहरों पर किया नौका विहार
जगह-जगह बाबाओं के शिविर में गूंजता रहा मंत्रोच्चार
अमर उजाला ब्यूरो
कुंभ नगर (प्रयागराज)। देश के तमाम राज्यों और विदेशों से कुंभ नगरी तक पहुंचने के लिए लोगों को कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ी, लेकिन जैसे ही श्रद्धालु संगम की रेती पर पहुंचे उनकी सारी थकान गायब हो गई। चेहरे पर मुस्कान लिए हर उम्र के श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचते ही सबसे पहला काम इंस्ट्राग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर स्टेटस अपडेट किया। जो बुजुर्ग श्रद्धालु थे, उनके साथ बेटे, बहुएं और नाती पोते भी यहां पहुंचकर उत्साहित हो रहे थे।
दुनिया के तमाम जगहों से आए विदेशी श्रद्धालु भी कुंभ की दिव्यता और भव्यता को देखकर हैरान दिखे। पायलट बाबा के ज्यादातर शिष्यों को अमेजिंग कुंभ, ऑसम संगम जैसे लाइनें कहते सुना गया। एक हाथ में लोगों ने अपने बैग संभाल रखे थे तो दूसरे हाथ से मोबाइल से सेल्फी भी लेना नहीं भूल रहे थे। जैसे जैसे दिन ढलता गया बाबाओं के शिविर में मकर संक्रांति के स्नान की महत्ता का बखान शुरू हो गया। सत्संग करने वाले महात्मा बताते जा रहे थे कि संक्रांति के दिन चावल, गुड़, गाय और द्रव्य दान के क्या-क्या क्या महत्व हैं। उधर, संगम के किनारे ऐसे लोगों की भीड़ भी इकट्टा थी, जो श्रद्धालु के बजाय पर्यटक ज्यादा लग रहे थे। उन्हें गंगा की लहरों पर उतरी एलइडी लाइट की रंग बिरंगी रोशनी ने काफी प्रभावित किया।
इधर, यायावर बाबाआें का भी एक ग्रुप बिना किसी डेरे के जहां जगह मिली, वहीं अपनी धूनी रमाएं पड़ा दिखा। ऐसे बाबा लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसकी वजह यह है कि उनका रंग ढंग और पहनावा बाकी बाबाओं से निराला दिखा। जैसे-जैसे रात गहराती गई मेले की दिव्यता बढ़ती गई।
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खूब चले, फिर भी थके नहीं पांव
संगम की रेती पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने किया फेसबुक अपडेट
गंगा की लहरों पर किया नौका विहार
जगह-जगह बाबाओं के शिविर में गूंजता रहा मंत्रोच्चार
अमर उजाला ब्यूरो
कुंभ नगर (प्रयागराज)। देश के तमाम राज्यों और विदेशों से कुंभ नगरी तक पहुंचने के लिए लोगों को कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ी, लेकिन जैसे ही श्रद्धालु संगम की रेती पर पहुंचे उनकी सारी थकान गायब हो गई। चेहरे पर मुस्कान लिए हर उम्र के श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचते ही सबसे पहला काम इंस्ट्राग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर स्टेटस अपडेट किया। जो बुजुर्ग श्रद्धालु थे, उनके साथ बेटे, बहुएं और नाती पोते भी यहां पहुंचकर उत्साहित हो रहे थे।
दुनिया के तमाम जगहों से आए विदेशी श्रद्धालु भी कुंभ की दिव्यता और भव्यता को देखकर हैरान दिखे। पायलट बाबा के ज्यादातर शिष्यों को अमेजिंग कुंभ, ऑसम संगम जैसे लाइनें कहते सुना गया। एक हाथ में लोगों ने अपने बैग संभाल रखे थे तो दूसरे हाथ से मोबाइल से सेल्फी भी लेना नहीं भूल रहे थे। जैसे जैसे दिन ढलता गया बाबाओं के शिविर में मकर संक्रांति के स्नान की महत्ता का बखान शुरू हो गया। सत्संग करने वाले महात्मा बताते जा रहे थे कि संक्रांति के दिन चावल, गुड़, गाय और द्रव्य दान के क्या-क्या क्या महत्व हैं। उधर, संगम के किनारे ऐसे लोगों की भीड़ भी इकट्टा थी, जो श्रद्धालु के बजाय पर्यटक ज्यादा लग रहे थे। उन्हें गंगा की लहरों पर उतरी एलइडी लाइट की रंग बिरंगी रोशनी ने काफी प्रभावित किया।
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इधर, यायावर बाबाआें का भी एक ग्रुप बिना किसी डेरे के जहां जगह मिली, वहीं अपनी धूनी रमाएं पड़ा दिखा। ऐसे बाबा लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसकी वजह यह है कि उनका रंग ढंग और पहनावा बाकी बाबाओं से निराला दिखा। जैसे-जैसे रात गहराती गई मेले की दिव्यता बढ़ती गई।
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