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तीन हत्याअभियुक्तों को फांसी देने से इंकार
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वाराणसी के ध्यानार्थ
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तीन हत्याभियुक्तों को फांसी देने से इंकार
0 हाईकोर्ट ने सेशनकोर्ट मिर्जापुर का रेफरेंस अस्वीकार किया
0 फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील की, जुर्माना बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मिर्जापुर के विंध्याचल थानाक्षेत्र में आठ वर्ष पूर्व हुई एक ही परिवार के तीन लोगों (पिता, पुत्र और पोते) की हत्या में हाईकोर्ट ने तीन हत्यारोपियों को फांसी की सजा स्वीकार करने से इंकार कर दिया है। तीनों को सेशनकोर्ट मिर्जापुर ने फांसी और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट को संदर्भित किया गया था। अभियुक्तों ने सजा के खिलाफ अपील भी दाखिल की थी।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की खंडपीठ ने रेफरेंस और अपील पर एक साथ सुनवाई करते हुए घटनाक्रम, अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में फांसी की सजा उपयुक्त नहीं है। इसके बजाए अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा उचित होगी। कोर्ट ने जुर्माने की सजा को यथावत रखा है।
घटना 24/25 अप्रैल 2011 की रात करीब साढ़े 12 बजे की है। विंध्याचल थानाक्षेत्र के अमरावती गांव की शीलादेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि रात में पूरा परिवार सोया हुआ था, तभी करीब साढ़े 12 बजे संगम पासी, पुद्दी पासी, संजय दुबे उर्फ पंडा और दोे तीन लोगों के साथ आए और शीला के ससुर चुलबुल, पति बृजलाल और बेटे नागेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर लगातार गोलियां चलाकर उसके देवर रामबली के बारे में पूछ रहे थे। शोर मचाने पर गांव के लोग जग गए तो हमलावर भाग निकले।
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पुलिस तीनों अभियुक्तों के अलावा खुन्नी यादव और हलीम को भी गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। चश्मदीद गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर सेशनकोर्ट ने इसे गंभीर और रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए संगम, पुद्दी और संजय दुबे को फांसी की सजा सुनाई तथा खुन्नी यादव और हलीम को दोषमुक्त कर दिया। सरकार की ओर से दोषमुक्ति के खिलाफ अपील भी दाखिल की गई थी जिसे हाईकोर्ट ने अस्वीकार करते हुए सेशनकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
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तीन हत्याभियुक्तों को फांसी देने से इंकार
0 हाईकोर्ट ने सेशनकोर्ट मिर्जापुर का रेफरेंस अस्वीकार किया
0 फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील की, जुर्माना बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मिर्जापुर के विंध्याचल थानाक्षेत्र में आठ वर्ष पूर्व हुई एक ही परिवार के तीन लोगों (पिता, पुत्र और पोते) की हत्या में हाईकोर्ट ने तीन हत्यारोपियों को फांसी की सजा स्वीकार करने से इंकार कर दिया है। तीनों को सेशनकोर्ट मिर्जापुर ने फांसी और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट को संदर्भित किया गया था। अभियुक्तों ने सजा के खिलाफ अपील भी दाखिल की थी।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की खंडपीठ ने रेफरेंस और अपील पर एक साथ सुनवाई करते हुए घटनाक्रम, अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में फांसी की सजा उपयुक्त नहीं है। इसके बजाए अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा उचित होगी। कोर्ट ने जुर्माने की सजा को यथावत रखा है।
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घटना 24/25 अप्रैल 2011 की रात करीब साढ़े 12 बजे की है। विंध्याचल थानाक्षेत्र के अमरावती गांव की शीलादेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि रात में पूरा परिवार सोया हुआ था, तभी करीब साढ़े 12 बजे संगम पासी, पुद्दी पासी, संजय दुबे उर्फ पंडा और दोे तीन लोगों के साथ आए और शीला के ससुर चुलबुल, पति बृजलाल और बेटे नागेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर लगातार गोलियां चलाकर उसके देवर रामबली के बारे में पूछ रहे थे। शोर मचाने पर गांव के लोग जग गए तो हमलावर भाग निकले।
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पुलिस तीनों अभियुक्तों के अलावा खुन्नी यादव और हलीम को भी गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। चश्मदीद गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर सेशनकोर्ट ने इसे गंभीर और रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए संगम, पुद्दी और संजय दुबे को फांसी की सजा सुनाई तथा खुन्नी यादव और हलीम को दोषमुक्त कर दिया। सरकार की ओर से दोषमुक्ति के खिलाफ अपील भी दाखिल की गई थी जिसे हाईकोर्ट ने अस्वीकार करते हुए सेशनकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।