{"_id":"593420de4f1c1b024e8b45c3","slug":"14965885235-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरशाही में दब गई फरियादियों की आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरशाही में दब गई फरियादियों की आवाज
Updated Sun, 04 Jun 2017 08:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफसरशाही, नारों में दब गई पीड़ितों की चीख
0 एसआरएन में सीआईसी ऑफिस के बाहर मुख्यमंत्री का इंतजार करते रहे तीमारदार
इलाहाबाद (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री के सामने फरियाद लेकर पहुंचे लोगों की आवाज सुरक्षा घेरा और कार्यकर्ताओं के नारों के बीच में दबकर रह गई। मुख्यमंत्री स्वरूपरानी अस्पताल मरीजों और तीमारदारों की पीड़ा सुनने के लिए पहुंचे थे लेकिन उनका दौरा एक वार्ड तक ही सीमित रहा। बाहर खड़े लोगों को उनसे मिलने तक नहीं दिया गया।
टीबी की मरीज छाया देवी 10 दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पति संजय अपना दुखड़ा मुख्यमंत्री को सुनाना चाहते थे। उनका कहना था कि अस्पताल में ज्यादातर दवाएं बाहर से मंगाई जाती हैं। पीने के लिए पानी नहीं है। एक वाटर कूलर रविवार को ही चालू किया गया। वार्ड नंबर 10 में भर्ती अंतिमा देवी के पति का कहना था कि हर दवा बाहर से लानी पड़ती है। सफाई वाले तक को पैसा देना पड़ता है। एसआईसी ऑफिस के बाहर मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे सीताराम का भी यही भी कहना था कि दवाएं नहीं मिलतीं। उनके भाई को पेड़ से गिरने पर गंभीर चोट लगी है। वहीं पर संगीता चिल्ला-चिल्लाकर कह रहीं थीं कि उनके पास घर नहीं है, बेटा बीमार है। सीआईसी ऑफिस के बाहर कई अन्य तीमारदार भी मुख्यमंत्री को अस्पताल का सच बताने के लिए खड़े रहे लेकिन उन्हें मिलने ही नहीं दिया गया। जब मुख्यमंत्री बाहर निकले तो सुरक्षा कर्मियों ने फरियादियाें को किनारे कर दिया और कार्यकर्ताओं की शोर में उनकी आवाज भी दब गई।
000
विज्ञापन
0 एसआरएन में सीआईसी ऑफिस के बाहर मुख्यमंत्री का इंतजार करते रहे तीमारदार
इलाहाबाद (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री के सामने फरियाद लेकर पहुंचे लोगों की आवाज सुरक्षा घेरा और कार्यकर्ताओं के नारों के बीच में दबकर रह गई। मुख्यमंत्री स्वरूपरानी अस्पताल मरीजों और तीमारदारों की पीड़ा सुनने के लिए पहुंचे थे लेकिन उनका दौरा एक वार्ड तक ही सीमित रहा। बाहर खड़े लोगों को उनसे मिलने तक नहीं दिया गया।
टीबी की मरीज छाया देवी 10 दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पति संजय अपना दुखड़ा मुख्यमंत्री को सुनाना चाहते थे। उनका कहना था कि अस्पताल में ज्यादातर दवाएं बाहर से मंगाई जाती हैं। पीने के लिए पानी नहीं है। एक वाटर कूलर रविवार को ही चालू किया गया। वार्ड नंबर 10 में भर्ती अंतिमा देवी के पति का कहना था कि हर दवा बाहर से लानी पड़ती है। सफाई वाले तक को पैसा देना पड़ता है। एसआईसी ऑफिस के बाहर मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे सीताराम का भी यही भी कहना था कि दवाएं नहीं मिलतीं। उनके भाई को पेड़ से गिरने पर गंभीर चोट लगी है। वहीं पर संगीता चिल्ला-चिल्लाकर कह रहीं थीं कि उनके पास घर नहीं है, बेटा बीमार है। सीआईसी ऑफिस के बाहर कई अन्य तीमारदार भी मुख्यमंत्री को अस्पताल का सच बताने के लिए खड़े रहे लेकिन उन्हें मिलने ही नहीं दिया गया। जब मुख्यमंत्री बाहर निकले तो सुरक्षा कर्मियों ने फरियादियाें को किनारे कर दिया और कार्यकर्ताओं की शोर में उनकी आवाज भी दब गई।
विज्ञापन
000