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संशोोधित परिणाम में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्तिपत्र देने की छूट
Updated Sat, 24 Nov 2018 07:51 PM IST
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संशोधित परिणाम में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्तिपत्र देने की छूट
0 जल निगम जूनियर इंजीनियर भर्ती
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने जलनिगम उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के संशोधित परिणाम में सफल याचिकाकर्ताओं को नियुक्तिपत्र देने की छूट दी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार चाहे तो याचीगण को नियुक्तिपत्र दे सकती है। कोर्ट ने इसके साथ ही महाप्रबंधक जलनिगम को हलफनामा देकर बताने के लिए कहा है कि क्या संशोधित परिणाम में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज मुकदमे में जांच की प्रगति भी पूछी है। अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।
मुकेश कुमार राठौर और अमरीश कुमार सहित अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा सुनवाई रही हैं। याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक जूनियर इंजीनियर के 863 पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया 28 अक्तूबर 2016 को शुरू हुई थी। चयन और नियुक्ति के बाद प्रक्रिया में धांधली की शिकायत हुई, जिस पर एसआईटी जांच बैठा दी गई। एसआईटी जांच रिपोर्ट से पता चला कि परीक्षा में पूछे गए 22 प्रश्नों के उत्तर गलत थे और इन्हीं के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। इसके बाद असफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
कोर्ट के आदेश से पुनर्मूल्यांकन किया गया और 30 याचिकाकर्ता के अंक कट ऑफ मेरिट से ऊपर चले गए। इन्होंने याचिका दाखिल कर नियुक्तिपत्र देने की मांग की है। कोर्ट को बताया गया कि विज्ञापित कुल पदों में से सिविल इंजीनियर के 361 और इलेक्ट्रिकल के 75 पद अब भी रिक्त हैं, जिन पर याचीगण को नियुक्ति दी जा सकती है।
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0 जल निगम जूनियर इंजीनियर भर्ती
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने जलनिगम उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के संशोधित परिणाम में सफल याचिकाकर्ताओं को नियुक्तिपत्र देने की छूट दी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार चाहे तो याचीगण को नियुक्तिपत्र दे सकती है। कोर्ट ने इसके साथ ही महाप्रबंधक जलनिगम को हलफनामा देकर बताने के लिए कहा है कि क्या संशोधित परिणाम में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज मुकदमे में जांच की प्रगति भी पूछी है। अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।
मुकेश कुमार राठौर और अमरीश कुमार सहित अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा सुनवाई रही हैं। याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक जूनियर इंजीनियर के 863 पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया 28 अक्तूबर 2016 को शुरू हुई थी। चयन और नियुक्ति के बाद प्रक्रिया में धांधली की शिकायत हुई, जिस पर एसआईटी जांच बैठा दी गई। एसआईटी जांच रिपोर्ट से पता चला कि परीक्षा में पूछे गए 22 प्रश्नों के उत्तर गलत थे और इन्हीं के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। इसके बाद असफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
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कोर्ट के आदेश से पुनर्मूल्यांकन किया गया और 30 याचिकाकर्ता के अंक कट ऑफ मेरिट से ऊपर चले गए। इन्होंने याचिका दाखिल कर नियुक्तिपत्र देने की मांग की है। कोर्ट को बताया गया कि विज्ञापित कुल पदों में से सिविल इंजीनियर के 361 और इलेक्ट्रिकल के 75 पद अब भी रिक्त हैं, जिन पर याचीगण को नियुक्ति दी जा सकती है।
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