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राजमागोऱं् पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर जवाब तलब
Updated Tue, 03 Jul 2018 08:16 PM IST
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यूपी के राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की मांग
0 ऑटो फ्यूल पॉलिसी लागू करने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाए जाने के संबंध में प्रदेश सरकार से उसकी नीति पूछी है। कोर्ट ने नेशनल ऑटो फ्यूल पॉलिसी के तहत बनी फेम स्कीम लागू करने के बाबत प्रदेश सरकार को तीन सप्ताह मेें जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जौनपुर के डॉ. वीके मिश्र ने जनहित याचिका दाखिल कर फेम स्कीम लागू किए जाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ताओं से इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि प्रदेश में जितनी भी स्मार्ट सिटी बन रही हैं और महानगरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से डीजल और पेट्रोल वाहन बाहर किए जाएं। नगर निगम क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग जोन बनाए जाएं। एनसीआर में बने ग्रेडेड एक्शन प्लान की तरह ही अन्य शहरों में भी योजना लागू की जाए।
क्या फेम स्कीम
फेम यानी फास्टर एडाप्शन एंड मैन्युफेक्चरिंग ऑफ (हाईब्रिड) इलेक्ट्रिक वेहिकल्स ऑफ इंडिया को शहरी परिवहन में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए लागू किया गया है। योजना के तहत तीन से पांच साल के भीतर डीजल और पेट्रोल वाहनों को बाहर कर उनके स्थान पर इलेक्ट्रिक या अन्य वैकिल्पक ईंधनों से चलने वाले वाहन लाए जाएंगे। इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना है। उत्तर प्रदेश में योजना किस स्तर पर है, इस संबंध में हाईकोर्ट ने जानकारी मांगी है।
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0 ऑटो फ्यूल पॉलिसी लागू करने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाए जाने के संबंध में प्रदेश सरकार से उसकी नीति पूछी है। कोर्ट ने नेशनल ऑटो फ्यूल पॉलिसी के तहत बनी फेम स्कीम लागू करने के बाबत प्रदेश सरकार को तीन सप्ताह मेें जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जौनपुर के डॉ. वीके मिश्र ने जनहित याचिका दाखिल कर फेम स्कीम लागू किए जाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ताओं से इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि प्रदेश में जितनी भी स्मार्ट सिटी बन रही हैं और महानगरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से डीजल और पेट्रोल वाहन बाहर किए जाएं। नगर निगम क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग जोन बनाए जाएं। एनसीआर में बने ग्रेडेड एक्शन प्लान की तरह ही अन्य शहरों में भी योजना लागू की जाए।
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क्या फेम स्कीम
फेम यानी फास्टर एडाप्शन एंड मैन्युफेक्चरिंग ऑफ (हाईब्रिड) इलेक्ट्रिक वेहिकल्स ऑफ इंडिया को शहरी परिवहन में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए लागू किया गया है। योजना के तहत तीन से पांच साल के भीतर डीजल और पेट्रोल वाहनों को बाहर कर उनके स्थान पर इलेक्ट्रिक या अन्य वैकिल्पक ईंधनों से चलने वाले वाहन लाए जाएंगे। इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना है। उत्तर प्रदेश में योजना किस स्तर पर है, इस संबंध में हाईकोर्ट ने जानकारी मांगी है।
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