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सरकारी वकीलों की नियुक्ति के खिलाफ याचिका खारिज
Updated Tue, 03 Jul 2018 09:48 PM IST
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सरकारी वकीलों की नियुक्ति के खिलाफ याचिका खारिज
इलाहाबाद। हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों के पैनल में मनमानी नियुक्तियां करने के आरोप में दाखिल याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। इस प्रकरण को लेकर लखनऊ खंडपीठ में पहले से याचिका लंबित है। कोर्ट ने याची से कहा कि वह चाहे तो लखनऊ में दाखिल याचिका में अर्जी देकर अपना पक्ष रख सकता है। अधिवक्ता सुनीता शर्मा की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति में एलआर मैन्युअल की अनदेखी की गई है। सुप्रीमकोर्ट ने भी बृजेश्वर सिंह चहल केस में दी गई गाइड लाइन का भी उल्लंघन किया गया है। याचिका में मांग की गई कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए जारी अधिसूचनाओं को रद्द कर नए सिरे से मानके के अनुसार नियुक्तियां की जाएं। सुप्रीमकोर्ट ने कमेटी गठित कर योग्य वकीलों की नियुक्ति हेतु गाइड लाइन दी है। मौजूदा सूची में पहले से काम कर रहे योग्य वकीलों को बिना किसी आधार के हटा दिया गया तथा महिला अधिवक्ताओं की भी अनदेखी की गई है। कोर्ट ने याची से कहा कि वह लखनऊ खंडपीठ में इसी मामले को लेकर दाखिल महेंद्र सिंह पवार की याचिका में अर्जी देकर अपनी बात रख सकता है।
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों के पैनल में मनमानी नियुक्तियां करने के आरोप में दाखिल याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। इस प्रकरण को लेकर लखनऊ खंडपीठ में पहले से याचिका लंबित है। कोर्ट ने याची से कहा कि वह चाहे तो लखनऊ में दाखिल याचिका में अर्जी देकर अपना पक्ष रख सकता है। अधिवक्ता सुनीता शर्मा की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति में एलआर मैन्युअल की अनदेखी की गई है। सुप्रीमकोर्ट ने भी बृजेश्वर सिंह चहल केस में दी गई गाइड लाइन का भी उल्लंघन किया गया है। याचिका में मांग की गई कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए जारी अधिसूचनाओं को रद्द कर नए सिरे से मानके के अनुसार नियुक्तियां की जाएं। सुप्रीमकोर्ट ने कमेटी गठित कर योग्य वकीलों की नियुक्ति हेतु गाइड लाइन दी है। मौजूदा सूची में पहले से काम कर रहे योग्य वकीलों को बिना किसी आधार के हटा दिया गया तथा महिला अधिवक्ताओं की भी अनदेखी की गई है। कोर्ट ने याची से कहा कि वह लखनऊ खंडपीठ में इसी मामले को लेकर दाखिल महेंद्र सिंह पवार की याचिका में अर्जी देकर अपनी बात रख सकता है।
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