अनुसूचित जाति सम्मेलन: प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंकेंगे योगी, अलीगढ़-हाथरस आ जाएगा चुनावी मोड में
योगी हाथरस और अलीगढ़ में भाजपा की ओर से आयोजित अनुसूचित जाति के सम्मेलन में शिरकत भी करेंगे। सियासत की नब्ज पर हाथ रखने वालों का कहना है कि विकास कार्य तो बहाना है, असल मकसद तो वोटरों को रिझाना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 अक्तूबर को अलीगढ़ और हाथरस में होंगे। बताया जा रहा है कि दोनों जिलों में योगी करोड़ों रुपये की लागत वाली विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। योगी हाथरस और अलीगढ़ में भाजपा की ओर से आयोजित अनुसूचित जाति के सम्मेलन में शिरकत भी करेंगे। सियासत की नब्ज पर हाथ रखने वालों का कहना है कि विकास कार्य तो बहाना है, असल मकसद तो वोटरों को रिझाना है। मुख्यमंत्री के साथ तीन और काबीना मंत्री भी आ रहे हैं। योगेंद्र उपाध्याय ने तो तैयारियों का जायजा लेने के लिए बुधवार को ही अलीगढ़ में डेरा डाल लिया है।
योगी के आगमन के साथ ही जिला चुनावी मोड में
लोकसभा चुनाव में अब बमुश्किल छह माह का वक्त बचा है। मुख्यमंत्री योगी के बहुप्रचारित दौरे के साथ ही अलीगढ़ और हाथरस जिला चुनावी मोड में आ जाएगा। प्रदेश में ये पहले जातिगत सम्मेलन हैं। बताया गया है कि योगी दोनों जिलों में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की घोषणा करेंगे। राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय में योगी की खास तौर पर दिलचस्पी है। समय-समय पर न सिर्फ वह इसका जायजा लेते रहे हैं बल्कि इसके निर्माण की सुस्त रफ्तार पर अफसरों को आड़े हाथ भी लेते रहे हैं।
जाट मतदाताओं के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह बेहद सम्मानित शख्सियत हैं। एएमयू नगरी अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय का निर्माण हिंदू और खास तौर पर जाट बिरादरी के वोटरों को साधने के लक्ष्य से भी किया जा रहा है। महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की प्रगति जानना भी योगी के अलीगढ़ दौरे के कार्यवृत्त में शामिल है।
अनुसूचित जाति के वोटरों पर क्यों है जोर
पहले सवर्णों की पार्टी की छवि वाली भाजपा बड़ी तेजी से अनुसूचित जाति के वोटरों को अपने पाले में करने की कवायद करती नजर आ रही है। कई भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले कुछ चुनावों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के वोटरों ने भाजपा का साथ दिया था। लिहाजा इस बार भी उन्हें अपने पाले से खिसकने नहीं देना है। हाथरस लोकसभा तो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या लगभग पौने तीन लाख है।
मौजूदा समय भाजपा के ही सांसद राजवीर सिंह दिलेर हाथरस का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा इस सीट को किसी भी सूरत में हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। हाथरस में ब्राह्मण वोटर भी बड़ी संख्या में हैं। इनकी संख्या दो लाख पंद्रह हजार के लगभग है। भाजपाई इसे अपना पारंपरिक वोट मानते हैं। भाजपा की असली चिंता अनुसूचित जाति के वोटरों की है। बसपा ने अगर मुस्लिम और कुछ अन्य जातियों में सेंध लगा दी तो यह पार्टी अपने परंपरागत वोटरों के साथ भाजपा के समक्ष बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आ सकती है।
अलीगढ़ लोकसभा सीट में तो अनुसूचित जाति के लगभग 21 फीसदी वोटर हैं। ये वोटर किसी भी पार्टी के पक्ष में चुनावी पलड़ा झुका सकते हैं। काछी, धोबी, कुम्हार वोटरों की संख्या ही दो लाख से ज्यादा है। मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग साढ़े चार लाख है। धार्मिक तौर पर मुस्लिम वोटर सबसे ज्यादा हैं। अलीगढ़ लोकसभा सीट पर ब्राह्मण ढाई लाख, जाट ढाई लाख, वैश्य दो लाख, नाई तीन लाख. यादव 1.60 लाख, लोध राजपूत 1.70 लाख हैं। भाजपा को मुस्लिम वोटरों से उतनी अपेक्षा नहीं है। लेकिन मुस्लिम और अनुसूचित जाति का गठजोड़ भाजपा की परेशानियां बढ़ा सकता है। लिहाजा भाजपा अभी से अनुसूचित जाति के वोटरों को साधने में जुट गई है।
मुख्यमंत्री योगी के साथ हाथरस और अलीगढ़ में दो मंत्री बेबी रानी मौर्य और गुलाब देवी शिरकत करेंगी। दोनों ही अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती हैं और आसपास के ही इलाके की हैं। गुलाब देवी संभल और बेबी रानी मौर्य आगरा की हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि दोनों मंत्रियों का असर अपनी जाति के वोटरों पर जरूर पड़ेगा। लेकिन भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद अपने तेजतर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही है जिनकी लोकप्रियता हर धर्म और जाति में है, इससे तो उनके धुर विरोधी भी इंकार नहीं कर सकते।