{"_id":"5967cc604f1c1b075f8b4616","slug":"why-not-in-19-years-the-insulator-in-the-city","type":"story","status":"publish","title_hn":"19 साल से क्यों नहीं लगा शहर में इन्सिनरेटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
19 साल से क्यों नहीं लगा शहर में इन्सिनरेटर
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Fri, 14 Jul 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
नगर आयुक्त के साथ मथुरा के मांट में इन्सिनरेटर प्लांट का जायजा लेती टीम।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में नगर निगम ने 19 साल पहले बने कानून का पालन नहीं किया। यही वजह है कि आज तक शहर में इन्सिनरेटर (बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल प्लांट) नहीं लगवाया गया। इस संबंध में हाईकोर्ट में लंबित याचिका में प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन को जीत हासिल हुई है।
हाईकोर्ट ने सीधा-सीधा सवाल मुख्य सचिव से पूछा है कि अब तक प्लांट क्यों नहीं लगा? प्लांट न लगा पाने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? हाईकोर्ट के यह आदेश मिलने के बाद पीडीए ने बैठक कर खुशी जताई है और नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर शहर में प्लांट लगाने का अनुरोध किया है।
वर्ष 2011 में पीडीए की ओर से दायर हुई इस जनहित याचिका में प्रदेश सरकार, अलीगढ़ महानगर पालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि अधिकारियों को पार्टी बनाया गया था। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के विद्वान न्यायाधीश अरुण टंडन व अरविंद कुमार मिश्रा ने 3 जुलाई को एक आदेश दिया है, जिसमें 20 जुलाई तक प्रदेश के मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है कि आखिर 19 साल में यह प्लांट अलीगढ़ में क्यों नहीं लगा? और न लगने के कारण रहे अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? इस आदेश को पीडीए ने अपनी जीत माना है।
विज्ञापन
इस संबंध में प्लांट संबंधी टीम के संयोजक डॉ. सीपी गुप्ता के क्लीनिक पर हुई बैठक में हर्ष जताया गया और एक मांग पत्र नगर आयुक्त आदि को भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि पीडीए इस प्लांट को लगवाने में हरसंभव सहयोग को तैयार है।
डाक्टरों का तर्क है कि निजी क्षेत्र के प्लांट में अधिक धन खर्च होता है और यदि सरकारी प्लांट शुरू हो जाएगा तो डाक्टरों को कम खर्च में सुविधा मिलेगी। चूंकि नगर निगम कामर्शियल टेक्स लेता है, इसलिए यह सुविधा मिलनी चाहिए।
इस बैठक में डॉ. एसपी सिंह, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. भरत वार्ष्णेय, डॉ.विनोद सक्सेना, डॉ. प्रवीण गर्ग, डॉ. मीनाक्षी सूद, डॉ. निति गोयल, डॉ. विपिन गोयल, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, डॉ. सुवेक वार्ष्णेय, डॉ. राजीव वार्ष्णेय, डॉ. अनूप, डॉ. आयुष सिंघल, डॉ. नितिन अग्रवाल आदि मौजूद थे।
कमेटी ने देखा राया प्लांट का हाल
हाईकोर्ट में इन्सिनरेटर को लेकर हुई सख्ती और मुख्य सचिव से सवाल पूछे जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम के निर्देश पर बुधवार को पीडीए के साथ बैठक नगर निगम में बुलाई गई। इसके बाद नगर आयुक्त की अगुवाई में गठित कमेटी गुरुवार को मथुरा के राया के मांट में निजी प्लांट का निरीक्षण करने गई।
इस प्लांट में अलीगढ़ के साथ हाथरस व मथुरा जनपद का मेडिकल वेस्ट भी निस्तारण के लिए पहुंचता है। नगर आयुक्त संतोष शर्मा की अगुवाई वाली टीम में एसीएम रेनू सिंह, सीओ खैर तेजवीर सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी कुलदीप कुमार, प्रदूषण नियंत्रण अभियंता पीडी शर्मा के साथ पीआरओ अहसान रब आदि गए।
पाया कि मेडिकल वेस्ट वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित होता है। यहां 200 किलो प्रति घंटा की क्षमता के दो इन्सिनरेटर स्थापित मिले, जो 62.5 केवीए क्षमता के जेनरेटर से चलते हैं। इस प्लांट में अलीगढ़ के प्राइवेट डॉक्टर्स का 1500 से 1600 किलो वेस्ट हर रोज आता है। इसके लिए 5 टाटा एस लगे हुए हैं। यहां नगर आयुक्त ने संचालक विशाल साठे को जरूरी निर्देश दिए।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने सीधा-सीधा सवाल मुख्य सचिव से पूछा है कि अब तक प्लांट क्यों नहीं लगा? प्लांट न लगा पाने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? हाईकोर्ट के यह आदेश मिलने के बाद पीडीए ने बैठक कर खुशी जताई है और नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर शहर में प्लांट लगाने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
वर्ष 2011 में पीडीए की ओर से दायर हुई इस जनहित याचिका में प्रदेश सरकार, अलीगढ़ महानगर पालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि अधिकारियों को पार्टी बनाया गया था। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के विद्वान न्यायाधीश अरुण टंडन व अरविंद कुमार मिश्रा ने 3 जुलाई को एक आदेश दिया है, जिसमें 20 जुलाई तक प्रदेश के मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है कि आखिर 19 साल में यह प्लांट अलीगढ़ में क्यों नहीं लगा? और न लगने के कारण रहे अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? इस आदेश को पीडीए ने अपनी जीत माना है।
विज्ञापन
इस संबंध में प्लांट संबंधी टीम के संयोजक डॉ. सीपी गुप्ता के क्लीनिक पर हुई बैठक में हर्ष जताया गया और एक मांग पत्र नगर आयुक्त आदि को भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि पीडीए इस प्लांट को लगवाने में हरसंभव सहयोग को तैयार है।
डाक्टरों का तर्क है कि निजी क्षेत्र के प्लांट में अधिक धन खर्च होता है और यदि सरकारी प्लांट शुरू हो जाएगा तो डाक्टरों को कम खर्च में सुविधा मिलेगी। चूंकि नगर निगम कामर्शियल टेक्स लेता है, इसलिए यह सुविधा मिलनी चाहिए।
इस बैठक में डॉ. एसपी सिंह, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. भरत वार्ष्णेय, डॉ.विनोद सक्सेना, डॉ. प्रवीण गर्ग, डॉ. मीनाक्षी सूद, डॉ. निति गोयल, डॉ. विपिन गोयल, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, डॉ. सुवेक वार्ष्णेय, डॉ. राजीव वार्ष्णेय, डॉ. अनूप, डॉ. आयुष सिंघल, डॉ. नितिन अग्रवाल आदि मौजूद थे।
कमेटी ने देखा राया प्लांट का हाल
हाईकोर्ट में इन्सिनरेटर को लेकर हुई सख्ती और मुख्य सचिव से सवाल पूछे जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम के निर्देश पर बुधवार को पीडीए के साथ बैठक नगर निगम में बुलाई गई। इसके बाद नगर आयुक्त की अगुवाई में गठित कमेटी गुरुवार को मथुरा के राया के मांट में निजी प्लांट का निरीक्षण करने गई।
इस प्लांट में अलीगढ़ के साथ हाथरस व मथुरा जनपद का मेडिकल वेस्ट भी निस्तारण के लिए पहुंचता है। नगर आयुक्त संतोष शर्मा की अगुवाई वाली टीम में एसीएम रेनू सिंह, सीओ खैर तेजवीर सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी कुलदीप कुमार, प्रदूषण नियंत्रण अभियंता पीडी शर्मा के साथ पीआरओ अहसान रब आदि गए।
पाया कि मेडिकल वेस्ट वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित होता है। यहां 200 किलो प्रति घंटा की क्षमता के दो इन्सिनरेटर स्थापित मिले, जो 62.5 केवीए क्षमता के जेनरेटर से चलते हैं। इस प्लांट में अलीगढ़ के प्राइवेट डॉक्टर्स का 1500 से 1600 किलो वेस्ट हर रोज आता है। इसके लिए 5 टाटा एस लगे हुए हैं। यहां नगर आयुक्त ने संचालक विशाल साठे को जरूरी निर्देश दिए।