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Aligarh News: गंगा में छोड़े पानी में डूबी खरबूज, तरबूज और पेठे की फसल
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सांकरा क्षेत्र में गंगा नदी से छोड़े गए पानी से खरबूज की फसल हुई खराब। संवाद
- फोटो : samvad
गंगा नदी में ऊपर से छोड़े गए अतिरिक्त पानी में सांकरा के खादर क्षेत्र के टोडरपुर, रुस्तम नगर, बबरोतिया, आलिया नगला, हारनपुर, किस्तौली, गंगावास, सीकरी, कंचनपुर आदि गांवों के खेतों में पानी भरने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इन गांवों में करीब तीन हजार बीघा में पेठा और इतने ही बीघा में इस बार खरबूज, तरबूज की फसल की गई है। किसानों के अनुसार, एक बीघा खेत में करीब 50 से 100 क्विंटल तक उत्पादन होता है, जबकि लागत 10 से 15 हजार रुपये प्रति बीघा आती है।
किसानों ने कहा खेती उजड़ी तो उजड़ गए हम भी
- किसान शाहिद खान ने बताया कि उसकी 35 बीघा में पेठा की फसल है। इसमें प्रति बीघा 12 से 15 हजार रुपये लागत आई है। पेठा आगरा, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा आदि स्थानों पर बेचा जाता है।
- सांकरा निवासी दुर्गेश कुमार ने बताया कि उसकी 20 बीघा तरबूज व खरबूज की फसल में बारिश और गंगा का पानी भरने के कारण खरबूज पूरी तरह खराब हो गया है। फसल में करीब एक लाख रुपये की लागत आई है।
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- फतेहपुर निवासी कालीचरण ने बताया कि 20 बीघा तरबूज की खेती में लागत के अनुरूप दाम नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में मायूसी है।
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किसानों ने कहा खेती उजड़ी तो उजड़ गए हम भी
- किसान शाहिद खान ने बताया कि उसकी 35 बीघा में पेठा की फसल है। इसमें प्रति बीघा 12 से 15 हजार रुपये लागत आई है। पेठा आगरा, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा आदि स्थानों पर बेचा जाता है।
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- सांकरा निवासी दुर्गेश कुमार ने बताया कि उसकी 20 बीघा तरबूज व खरबूज की फसल में बारिश और गंगा का पानी भरने के कारण खरबूज पूरी तरह खराब हो गया है। फसल में करीब एक लाख रुपये की लागत आई है।
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- फतेहपुर निवासी कालीचरण ने बताया कि 20 बीघा तरबूज की खेती में लागत के अनुरूप दाम नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में मायूसी है।