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जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता : वसीम बरेलवी
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कोहिनूर मंच पर कुल हिंद मुशायरे में मंचासीन डीएम चंद्र भूषण सिंह, मेयर मोहम्मद फुरकान, डॉ. अंजना स?
- फोटो : CITY OFFICE
जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता ... सुप्रसिद्ध शायर वसीम बरेलवी के शेर की पंक्तियां जब गूंजीं तो श्रोता गदगद हो गए। मौका था राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी के कोहिनूर मंच पर आयोजित कुल हिंद मुशायरे का।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि व कवियत्री डॉ अंजना सिंह सेंगर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सुप्रसिद्ध शायर मंजर भोपाली ने मुशायरे की शुरुआत की। उन्होंने एक गीत प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये धरती सोने का कंगन, ये धरती चांदी का दर्पण, ये धरती मस्जिद का आंगन, ये धरती संतों का चंदन, ये किसने शूल बो दिए। डॉ कलीम कैसर ने कहा कि चाहतों की जरा सी दस्तक पर, दिल का दरवाजा खोल सकता है, इश्क ऐसी जुबां है प्यारे, जिसको गूंगा भी बोल सकता है। नुसरत अतीक गोरखपुरी ने कहा कि हम तुम्हें बददुआ नहीं देंगे, इतनी लंबी सजा नहीं देंगे। हसीब सोज ने कहा कि यहां मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है, कई झूठे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है।
अंजुम रहबर ने कहा कि तेरा वादा न पूरा हुआ, आज भी रातभर हो गई, मुझको खिड़की पे बैठे हुए शाम ए गम सहर हो गई। सुनील कुमार तंग ने फरमाया कि जिस गेट पर लिखा था, आजादी हुकूमत का देखिए नजारा, रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा। शबीना अदीब ने कहा कि जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा, तुम आकर बैठे हो पहली सफ में, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है। इनके अतिरिक्त डॉ नसीम निकहत, अचानक मऊवी, मजीद देवबंदी आदि शायरों ने अपने कलाम प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने शाल ओढ़ाकर सभी शायरों का स्वागत किया। इस मौके पर सीडीओ अनुनय झा, एडीएम सिटी राकेश मालपाणी, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत सिंह आदि उपस्थित थे।
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कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि व कवियत्री डॉ अंजना सिंह सेंगर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सुप्रसिद्ध शायर मंजर भोपाली ने मुशायरे की शुरुआत की। उन्होंने एक गीत प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये धरती सोने का कंगन, ये धरती चांदी का दर्पण, ये धरती मस्जिद का आंगन, ये धरती संतों का चंदन, ये किसने शूल बो दिए। डॉ कलीम कैसर ने कहा कि चाहतों की जरा सी दस्तक पर, दिल का दरवाजा खोल सकता है, इश्क ऐसी जुबां है प्यारे, जिसको गूंगा भी बोल सकता है। नुसरत अतीक गोरखपुरी ने कहा कि हम तुम्हें बददुआ नहीं देंगे, इतनी लंबी सजा नहीं देंगे। हसीब सोज ने कहा कि यहां मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है, कई झूठे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है।
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अंजुम रहबर ने कहा कि तेरा वादा न पूरा हुआ, आज भी रातभर हो गई, मुझको खिड़की पे बैठे हुए शाम ए गम सहर हो गई। सुनील कुमार तंग ने फरमाया कि जिस गेट पर लिखा था, आजादी हुकूमत का देखिए नजारा, रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा। शबीना अदीब ने कहा कि जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा, तुम आकर बैठे हो पहली सफ में, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है। इनके अतिरिक्त डॉ नसीम निकहत, अचानक मऊवी, मजीद देवबंदी आदि शायरों ने अपने कलाम प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने शाल ओढ़ाकर सभी शायरों का स्वागत किया। इस मौके पर सीडीओ अनुनय झा, एडीएम सिटी राकेश मालपाणी, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत सिंह आदि उपस्थित थे।
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