Aligarh: वक्फ बोर्ड के 45000 किरायेदार, 30 साल से हैं काबिज... किराया नहीं हुआ 1000 के, 800 नहीं दे रहे किराया
अलीगढ़ महानगर में सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां कोल तहसील में हैं। यहां 2900 संपत्तियां हैं।यहां मकान, दुकान के साथ पूरा बाजार तैयार हो गया है। लेकिन कई जगह तो किराया इतना कम है कि उससे ज्यादा इन दुकानों का बिजली का बिल आ जाता है।
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वक्फ बिल को लेकर मचे घमासान के बीच वक्फ बोर्ड के किरायेदारों का भी आंकड़ा सामने आने लगा है। अलीगढ़ में 45000 किरायेदार हैं। यह सभी 30 साल या फिर उससे भी अधिक समय से इन संपत्तियों पर काबिज हैं। लेकिन किराया कहीं 1000 है तो कहीं इससे भी कम। कुछ कस्बाई इलाकों में तो 300 रुपये का किराया देकर लोग बड़े -बड़े मकानों में रह रहे हैं। 800 किरायेदार तो ऐसे भी हैं जिन्होंने आज तक किराया दिया ही नहीं है। कुछ तो इन पर अपना मालिकाना हक भी जताने लगे हैं।
अलीगढ़ महानगर की बात करें तो सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां कोल तहसील में हैं। यहां 2900 संपत्तियां हैं। इनमें सर्वाधिक दानपुर कंपाउंड, बेगपुर, दोदपुर, बरगदहाउस, धौर्रामाफी, जमालपुर माफी, देहली गेट, शाहजमाल में हैं। यहां मकान, दुकान के साथ पूरा बाजार तैयार हो गया है। लेकिन कई जगह तो किराया इतना कम है कि उससे ज्यादा इन दुकानों का बिजली का बिल आ जाता है। शहर के प्रमुख बाजारों में ही वक्फ बोर्ड की 100 से ज्यादा दुकानें ऐसी हैं जिनका किराया एक हजार के पार नहीं हो पाया है।
शासन के जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसके अनुसार राजस्व टीमों की मदद लेकर वक्फ संपत्तियों की मौजूदा तस्वीर, अवैध कब्जे आदि का सर्वे शुरू कराया जाएगा। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।- निधि गोस्वामी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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इन संपत्तियों पर हुए अवैध निर्माण
दानपुर कंपाउंड, बेगपुर, दोदपुर, बरगद हाउस, धौर्रा माफी, जमालपुर माफी, देहली गेट में कई वक्फ संपत्तियां ऐसी हैं, जहां पिछले कुछ दशकों में अवैध रूप से मकान, इमारतें और दुकानें बना ली गई हैं। इनको लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं, शिकायतें वक्फ बोर्ड तक हुईं। यहां के किरायेदार न तो बढ़ा हुआ किराया देने के लिए राजी हो रहे हैं और न ही जमीन खाली कर रहे हैं। उल्टा फर्जी दस्तावेज बनाकर मालिकाना हक जता रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह इनको बेचना चाहते हैं।
एक रुपये प्रति गज के हिसाब से काटे गए प्लॉट, 99 साल के पट्टे पर दिए
वर्ष 1987 के गजट में वक्फ नंबर 63 पर 250 कच्चा बीघा शाहजमाल कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं। पहले भी यह कब्रिस्तान वक्फ संपत्ति रहा है। मगर इस पर अवैध कब्जे की शुरुआत 1971-72 के आसपास हुई। मुतवल्ली ने इस जमीन पर एक रुपये प्रति गज के हिसाब से छोटे-छोटे प्लाॅट 99 साल के पट्टे पर दे दिए थे। झोपड़ी से मकान बन गए। पट्टे के आधार पर लोग नगर निगम को गृहकर देने लगे। इसकी रसीदें मकान स्वामी के नाम से कटीं तो बिजली कनेक्शन, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड समेत कई सरकारी दस्तावेज बन गए।
वक्फ नंबर 63 पर दर्ज दरगाह हजरत शम्सुल आरफीन शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्ति भी सिकुड़ती जा रही है। इसकी पुष्टि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व तहसीलदार कोल ने की है। वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद तारिक ने सर्वे कराया था, जिसमें यहां करीब 45 हजार परिवारों के बसे होने का ब्योरा एकत्र हुआ। एक प्रस्ताव वक्फ बोर्ड को भेजा गया कि इन्हें हटाना संभव नहीं है तो नियमित करने पर किराया मिल सकता है। दूसरा प्रस्ताव 2020 में भेजा गया, जिसमें कब्जा हटाने की संस्तुति मांगी गई, दोनों प्रस्ताव अटके हुए हैं।
वक्फ संपत्ति का विवरण
- कुल 4251 वक्फ संपत्तियों में से शिया की 113 और सुन्नी की 4138 हैं।
- कोल तहसील में शिया की 79 और सुन्नी की 2746 समेत कुल 2825 संपत्तियां हैं।
- गभाना तहसील में शिया की 01 और सुन्नी की 32 समेत कुल 33 संपत्तियां हैं।
- अतरौली तहसील में शिया की 32 और सुन्नी की 939 समेत कुल 971 संपत्तियां हैं।
- इगलास तहसील में सुन्नी की 153 संपत्तियां हैं।
- खैर तहसील में शिया की 01 और सुन्नी की 268 समेत कुल 269 संपत्तियां हैं।