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आधी आबादी के हक का हो रहा हनन
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Tue, 07 Mar 2017 01:33 AM IST
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राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित करते आगरा बीआर अम्बेडकर युनिवर्सिटी के कुलपति अरविंद कुमार दीक्षित।
- फोटो : Amar Ujala
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डीएस कॉलेज में संस्थापक दिवस समारोह ‘अर्पण’ शुरू हो गया। समापन आठ मार्च को होगा। ‘महिलाओं के अधिकार व स्वतंत्रता, लिंगानुपात अंतर’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ डॉ. बीआर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने दीप जलाकर किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ की प्रोफेसर डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि हर युग में महिलाओं के अधिकारों व स्वतंत्रता का हनन होता रहा है, बिना स्वतंत्रता के सामाजिक न्याय की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती। साहित्यकार डॉ. नमिता सिंह ने कहा लिंग के आधार पर सामाजिक भेदभाव रोका जाए। न्यायाधीश कामिनी पाठक ने कहा कि शिक्षा व स्वतंत्रता से ही महिलाएं समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एएमयू की प्रो. समीना खान आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कुलपति को प्रबंध समिति के सचिव राजीव अग्रवाल अनु ने स्मृति चिह्न भेंट किया। अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. अंजना बंसल ने की। इस मौके पर डॉ. बीना अग्रवाल, डॉ. पीके जैन, डॉ. पीके शर्मा, डॉ. ओपी बंसल, डॉ. सुनीता, डॉ. मुकेश भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
लैब की रखी आधारशिला
कुलपति ने केमिस्ट्री लैब की आधारशिला रखी। पूजा-पाठ के बाद उन्होंने लैब की नींव में ईंट रखी। 70 लाख की लागत से यहां माडर्न लैब बनेगी।
छात्रों को प्रवेश न देने पर एबीवीपी ने जताया आक्रोश
डीएस कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में छात्रों के प्रवेश न देने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आक्रोश जताया है। परिषद के प्रदेश मंत्री योगेंद्र वर्मा ने कहा कि हर साल प्रति छात्र से सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर 56 रुपये लिए जाते हैं। कॉलेज में तकरीबन 8 हजार विद्यार्थी हैं। इस हिसाब से कुल चार लाख 48 हजार रुपये हुए, लेकिन उन्हें कॉलेज में घुसने नहीं दिया गया। गेट पर फोर्स तैनात कर दिया गया। इस मामले में एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से भेंट करेगा। उधर, चीफ प्रॉक्टर डॉ पीके शर्मा का कहना है कि सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में आने दिया गया है, जो आईडी कार्ड व यूनिफार्म में थे। वैसे भी तीन दिन के लिए कक्षाएं बंद हैं। सात व आठ को भी बिना यूनिफार्म वाले विद्यार्थियों की इंट्री नहीं दी जाएगी।
स्वागत करने को किया मना
लैब की शिलान्यास के बाद कुलपति का स्वागत करने को लोग उमड़ पड़े, लेकिन वो स्वागत करने को मना करने लगे। कहा, इसकी जरूरत नहीं है। बहरहाल, बाद में उन्होंने पुष्प गुच्छ ग्रहण कर लिया। फिर उन्हें लाइब्रेरी दिखाई गई। उन्होंने पढ़ने के लिए किताबें इश्यू की जाती हैं, इसकी भी जानकारी ली।
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मेरे काम के तरीके काे नहीं पचा पा रहे लोग : डॉ. दीक्षित
देखिए, मेरा काम करने का तरीका अलग है। शायद इस तरीके को कई लोग पचा नहीं पा रहे हैं। प्राथमिकताओं की फेहरिस्त लंबी है, फिर भी समय से परीक्षा कराना, परिणाम, अंकपत्र, डिग्री देना। इसके बाद डिग्री का सत्यापन कराना अव्वल पायदान पर है।
सोमवार को ये बातें डॉ. बीआर अंबेडकर विवि के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने ‘अमर उजाला’ से कहीं। वो डीएस कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे। कहा, विधि परीक्षा कराने में कुछ कड़े कदम उठाने पड़े। उन्हें नेता की भी संज्ञा दी गई। कॉपियों का मूल्यांकन सीसीटीवी में कराया गया। 18 साल बाद रिजल्ट चार्ट पर डिप्टी रजिस्ट्रार व रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर कराए गए। ओएमआर शीट पर परीक्षा कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्र को पटरी पर लाने के लिए कुछ तो करना ही था। जुलाई में डिग्री मेला लगेगा। ऑनलाइन डिग्री का भी इंतजाम किया गया।
बिना ट्रैक शूट के यूनिवर्सिटी टीम का प्रतिनिधित्व करने पर बोले कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं हैं, वो अब खेल में खेल नहीं होने देंगे। विजिटर रजिस्टर में उन्होंने ‘महाविद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार के प्रयास अपेक्षित एवं सराहनीय है’।
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लैब की रखी आधारशिला
कुलपति ने केमिस्ट्री लैब की आधारशिला रखी। पूजा-पाठ के बाद उन्होंने लैब की नींव में ईंट रखी। 70 लाख की लागत से यहां माडर्न लैब बनेगी।
छात्रों को प्रवेश न देने पर एबीवीपी ने जताया आक्रोश
डीएस कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में छात्रों के प्रवेश न देने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आक्रोश जताया है। परिषद के प्रदेश मंत्री योगेंद्र वर्मा ने कहा कि हर साल प्रति छात्र से सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर 56 रुपये लिए जाते हैं। कॉलेज में तकरीबन 8 हजार विद्यार्थी हैं। इस हिसाब से कुल चार लाख 48 हजार रुपये हुए, लेकिन उन्हें कॉलेज में घुसने नहीं दिया गया। गेट पर फोर्स तैनात कर दिया गया। इस मामले में एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से भेंट करेगा। उधर, चीफ प्रॉक्टर डॉ पीके शर्मा का कहना है कि सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में आने दिया गया है, जो आईडी कार्ड व यूनिफार्म में थे। वैसे भी तीन दिन के लिए कक्षाएं बंद हैं। सात व आठ को भी बिना यूनिफार्म वाले विद्यार्थियों की इंट्री नहीं दी जाएगी।
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स्वागत करने को किया मना
लैब की शिलान्यास के बाद कुलपति का स्वागत करने को लोग उमड़ पड़े, लेकिन वो स्वागत करने को मना करने लगे। कहा, इसकी जरूरत नहीं है। बहरहाल, बाद में उन्होंने पुष्प गुच्छ ग्रहण कर लिया। फिर उन्हें लाइब्रेरी दिखाई गई। उन्होंने पढ़ने के लिए किताबें इश्यू की जाती हैं, इसकी भी जानकारी ली।
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मेरे काम के तरीके काे नहीं पचा पा रहे लोग : डॉ. दीक्षित
देखिए, मेरा काम करने का तरीका अलग है। शायद इस तरीके को कई लोग पचा नहीं पा रहे हैं। प्राथमिकताओं की फेहरिस्त लंबी है, फिर भी समय से परीक्षा कराना, परिणाम, अंकपत्र, डिग्री देना। इसके बाद डिग्री का सत्यापन कराना अव्वल पायदान पर है।
सोमवार को ये बातें डॉ. बीआर अंबेडकर विवि के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने ‘अमर उजाला’ से कहीं। वो डीएस कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे। कहा, विधि परीक्षा कराने में कुछ कड़े कदम उठाने पड़े। उन्हें नेता की भी संज्ञा दी गई। कॉपियों का मूल्यांकन सीसीटीवी में कराया गया। 18 साल बाद रिजल्ट चार्ट पर डिप्टी रजिस्ट्रार व रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर कराए गए। ओएमआर शीट पर परीक्षा कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्र को पटरी पर लाने के लिए कुछ तो करना ही था। जुलाई में डिग्री मेला लगेगा। ऑनलाइन डिग्री का भी इंतजाम किया गया।
बिना ट्रैक शूट के यूनिवर्सिटी टीम का प्रतिनिधित्व करने पर बोले कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं हैं, वो अब खेल में खेल नहीं होने देंगे। विजिटर रजिस्टर में उन्होंने ‘महाविद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार के प्रयास अपेक्षित एवं सराहनीय है’।