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2007 का विधानसभा चुनाव: प्रदेश में बसपा का राज, जिले में दो सीटों पर पहना ताज
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अभिषेक शर्मा
इस चुनाव से ऐन पहले कल्याण सिंह की भाजपा में वापसी के कदम ने पार्टी को जिले में संजीवनी जरूर दी। भाजपा ने जिले में दो सीटें जीतीं। मगर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के सहारे चुनाव लड़ी बसपा सरकार बनाने में सफल रही। साथ में जिले की दो सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज कर और अधिकांश सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर भी अपनी ताकत का अहसास कराया। कुल मिलाकर इस चुनाव में जिले में ताकतवर नेता के रूप में बनकर उभरे ठा. जयवीर सिंह ने प्रदेश में अपना सियासी रसूख बनाया। हां, जाटलैंड की दोनों सीटों खैर व इगलास पर रालोद की वापसी हुई।
जिले की सियासत में हुआ कई नए नेताओं का उदय
पिछले चुनाव में कल्याण सिंह भाजपा से अलग थे। उसका ही नुकसान था कि जिले में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। इस बार भाजपा में वापसी के बाद अतरौली से उनकी पुत्रवधु प्रेमलता वर्मा चुनाव लड़ीं और जीतीं। वहीं उनके प्रभाव वाली गंगीरी सीट पर भी डॉ. राम सिंह वापस चुनाव जीते। सबसे खास बात यह रही कि इन दोनों सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही। अतरौली में नए नेता अभय शर्मा व गंगीरी में मुजाहिद गुड्डू ने दोनों को कड़ी टक्कर दी। हालांकि दोनों दूसरे स्थान पर रहे। इसी तरह शहर में सपा से नए चेहरे जमीरउल्लाह ने धार्मिक ध्रुवीकरण और 2006 के सांप्रदायिक बलवे में मुखर बयानबाजी के दम पर भाजपा को कड़ी टक्कर दी। इस सीट पर भाजपा के संजीव राजा को हार का सामना करना पड़ा। वहीं इगलास में पति की हत्या के बाद बिमलेश सिंह ने सहानुभूति लहर व रालोद के सहारे जीत दर्ज की। यहां भी बसपा के मुकुल उपाध्याय हारे। खैर पर रालोद ने बसपा के प्रमोद गौड़ को हराया। बरौली पर जयवीर सिंह व कोल पर महेंद्र सिंह ने बसपा से जीत दर्ज की। जिनमें से जयवीर सिंह प्रदेश में ताकतवर मंत्री बने।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस व एनसीपी मैदान में थे, जबकि राज्य स्तरीय सपा सहित 12 पार्टियां मैदान में थीं। इसके अलावा सहित 112 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 51 पर भाजपा, 22 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 206 और सपा ने 97 सीटें जीतीं। इसी परिणाम के सहारे बसपा की सरकार बनी।
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ये था सात सीटों का परिणाम
-2 लाख 40 हजार 589 मतों वाली गंगीरी सीट पर भाजपा के डॉ. राम सिंह 37575 मत पाकर जीते और बसपा के मुजाहिद हसन गुड्डू 35998 मत पाकर हारे।
-2 लाख 44 हजार 094 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा की प्रेमलता वर्मा 50390 मत पाकर जीतीं और बसपा के हरीश शर्मा 29240 मत पाकर हारे।
-2 लाख 99 हजार 831 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर सपा के जमीरउल्लाह 44541 मत पाकर जीते और भाजपा के संजीव राजा 36689 मत पाकर हारे।
-3 लाख 27 हजार 526 मतों वाली कोल सीट पर बसपा के महेंद्र सिंह 54161 मत पाकर जीते और भाजपा के सुरेंद्र सहयोगी 49926 मत पाकर हारे।
-2 लाख 36 हजार 734 मतों वाली इगलास सीट पर रालोद की बिमलेश सिंह 53522 मत पाकर जीतीं और बसपा के मुकुल उपाध्याय 46822 मत पाकर हारे।
-2 लाख 43 हजार 272 मतों वाली बरौली सीट पर बसपा के जयवीर सिंह 49028 मत पाकर जीते और रालोद के दलवीर सिंह 44327 मत पाकर हारे।
-2 लाख 50 हजार 861 मतों वाली खैर सीट पर रालोद के सत्यपाल सिंह 62483 मत पाकर जीतीं और बसपा के प्रमोद गौड़ 48704 मत पाकर हारे।
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इस चुनाव से ऐन पहले कल्याण सिंह की भाजपा में वापसी के कदम ने पार्टी को जिले में संजीवनी जरूर दी। भाजपा ने जिले में दो सीटें जीतीं। मगर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के सहारे चुनाव लड़ी बसपा सरकार बनाने में सफल रही। साथ में जिले की दो सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज कर और अधिकांश सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर भी अपनी ताकत का अहसास कराया। कुल मिलाकर इस चुनाव में जिले में ताकतवर नेता के रूप में बनकर उभरे ठा. जयवीर सिंह ने प्रदेश में अपना सियासी रसूख बनाया। हां, जाटलैंड की दोनों सीटों खैर व इगलास पर रालोद की वापसी हुई।
जिले की सियासत में हुआ कई नए नेताओं का उदय
पिछले चुनाव में कल्याण सिंह भाजपा से अलग थे। उसका ही नुकसान था कि जिले में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। इस बार भाजपा में वापसी के बाद अतरौली से उनकी पुत्रवधु प्रेमलता वर्मा चुनाव लड़ीं और जीतीं। वहीं उनके प्रभाव वाली गंगीरी सीट पर भी डॉ. राम सिंह वापस चुनाव जीते। सबसे खास बात यह रही कि इन दोनों सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही। अतरौली में नए नेता अभय शर्मा व गंगीरी में मुजाहिद गुड्डू ने दोनों को कड़ी टक्कर दी। हालांकि दोनों दूसरे स्थान पर रहे। इसी तरह शहर में सपा से नए चेहरे जमीरउल्लाह ने धार्मिक ध्रुवीकरण और 2006 के सांप्रदायिक बलवे में मुखर बयानबाजी के दम पर भाजपा को कड़ी टक्कर दी। इस सीट पर भाजपा के संजीव राजा को हार का सामना करना पड़ा। वहीं इगलास में पति की हत्या के बाद बिमलेश सिंह ने सहानुभूति लहर व रालोद के सहारे जीत दर्ज की। यहां भी बसपा के मुकुल उपाध्याय हारे। खैर पर रालोद ने बसपा के प्रमोद गौड़ को हराया। बरौली पर जयवीर सिंह व कोल पर महेंद्र सिंह ने बसपा से जीत दर्ज की। जिनमें से जयवीर सिंह प्रदेश में ताकतवर मंत्री बने।
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ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस व एनसीपी मैदान में थे, जबकि राज्य स्तरीय सपा सहित 12 पार्टियां मैदान में थीं। इसके अलावा सहित 112 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 51 पर भाजपा, 22 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 206 और सपा ने 97 सीटें जीतीं। इसी परिणाम के सहारे बसपा की सरकार बनी।
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ये था सात सीटों का परिणाम
-2 लाख 40 हजार 589 मतों वाली गंगीरी सीट पर भाजपा के डॉ. राम सिंह 37575 मत पाकर जीते और बसपा के मुजाहिद हसन गुड्डू 35998 मत पाकर हारे।
-2 लाख 44 हजार 094 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा की प्रेमलता वर्मा 50390 मत पाकर जीतीं और बसपा के हरीश शर्मा 29240 मत पाकर हारे।
-2 लाख 99 हजार 831 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर सपा के जमीरउल्लाह 44541 मत पाकर जीते और भाजपा के संजीव राजा 36689 मत पाकर हारे।
-3 लाख 27 हजार 526 मतों वाली कोल सीट पर बसपा के महेंद्र सिंह 54161 मत पाकर जीते और भाजपा के सुरेंद्र सहयोगी 49926 मत पाकर हारे।
-2 लाख 36 हजार 734 मतों वाली इगलास सीट पर रालोद की बिमलेश सिंह 53522 मत पाकर जीतीं और बसपा के मुकुल उपाध्याय 46822 मत पाकर हारे।
-2 लाख 43 हजार 272 मतों वाली बरौली सीट पर बसपा के जयवीर सिंह 49028 मत पाकर जीते और रालोद के दलवीर सिंह 44327 मत पाकर हारे।
-2 लाख 50 हजार 861 मतों वाली खैर सीट पर रालोद के सत्यपाल सिंह 62483 मत पाकर जीतीं और बसपा के प्रमोद गौड़ 48704 मत पाकर हारे।