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1993 का विधानसभा चुनाव : जिले में जीतीं छह सीटें...प्रदेश में सत्ता न पा सका भगवादल
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अभिषेक शर्मा
प्रदेश में चले ध्रुवीकरण व जातीय समीकरण के दौर में हुए 1993 के चुनाव में जिले में भाजपा लगातार दूसरी बार मजबूत रही। दस सीटों वाले जिले में छह सीटों पर भाजपा जीती। मगर प्रदेश में सरकार न बन पाने के कारण निर्वाचित विधायकों को मलाल रहा। खास बात यह रही कि हमेशा चेहरों के दम पर राजनीति करने वाली बरौली सीट पर पहली बार भाजपा के नए चेहरे को जीत मिली। वहीं प्रदेश में बसपा के गठबंधन से सरकार बनाने वाली सपा को दो सीटें ही मिलीं। हां, बसपा जरूर ऐसा दल रहा, जो जिले की कई हारने वाली सीटों पर दूसरे स्थान पर रहा। कुल मिलाकर भगवादल के विधायकों को जीत के बाद भी विपक्ष में बैठने का मौका मिला।
जाटलैंड को छोड़ जिले पर हावी रहा ध्रुवीकरण
अयोध्या से जुड़े विवाद के बाद जिस तरह प्रदेश में धार्मिक ध्रुवीकरण व जातीय समीकरण की बयार यूपी में बही। उसका असर इस चुनाव में साफ देखने को मिला। इसी का परिणाम रहा कि जिले की अतरौली, कोल व शहर सीट पर लगातार जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने इस बार बरौली, हाथरस सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा। इसी का परिणाम रहा कि जिले में कुछ छह सीटों पर ध्रुवीकरण के आधार पर जीत दर्ज की। हालांकि यादव बाहुल्य गंगीरी व सिकंदराराऊ पर सपा ने जीत दर्ज की। इधर, जाटलैंड के इगलास में कांग्रेस व खैर में जनतादल ने जीत दर्ज की।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी मैदान में थे, जबकि पांच राज्य स्तरीय दल बहुजन समाज पार्टी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, शिवसेना व रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा, सपा सहित 60 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 177 पर भाजपा, 28 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि सत्ता बनाने वाले बसपा-सपा गठबंधन ने क्रमश: 61 व 109 सीटें जीतीं।
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ये था दसों सीटों का परिणाम
- 2 लाख 07 हजार 957 मतों वाली हाथरस सीट पर भाजपा के राजवीर सिंह 29896 मत पाकर जीते और बसपा के हिलाल कुरैशी 29148 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 83 मतों वाली सासनी सीट पर भाजपा के हरिशंकर माहौर 44951 मत पाकर जीते और बसपा के राय साहब 23082 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 4 हजार 084 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर सपा के अमर सिंह यादव 45599 मत पाकर जीते और भाजपा के सेक्रेटरी सिंह 25166 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 98 हजार 180 मतों वाली गंगीरी सीट पर सपा के वीरेश यादव 48209 मत पाकर जीते और भाजपा के डॉ. राम सिंह 43272 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 6 हजार 057 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा के कल्याण सिंह 73789 मत पाकर जीते और कांग्रेस के डॉ. अनवार खां 55423 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 28 हजार 880 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर भाजपा के केके नवमान 58027 मत पाकर जीते और बसपा के अब्दुल खालिक 56005 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 30 हजार 675 मतों वाली कोल सीट पर भाजपा के किशनलाल दिलेर 72615 मत पाकर जीते और बसपा के श्याम सुंदर 20566 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 94 हजार 050 मतों वाली इगलास सीट पर कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 42916 मत पाकर जीतीं और बीजेपी के विक्रम सिंह हिंडौल 31261 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 97 हजार 076 मतों वाली बरौली सीट पर भाजपा के मुनीष गौड़ 36223 मत पाकर जीते और जनता दल के दलवीर सिंह 27633 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 1 हजार 925 मतों वाली खैर सीट पर जनता दल के जगवीर सिंह 25785 मत पाकर जीते और बसपा के चंद्रप्रकाश 21328 मत पाकर हारे।
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प्रदेश में चले ध्रुवीकरण व जातीय समीकरण के दौर में हुए 1993 के चुनाव में जिले में भाजपा लगातार दूसरी बार मजबूत रही। दस सीटों वाले जिले में छह सीटों पर भाजपा जीती। मगर प्रदेश में सरकार न बन पाने के कारण निर्वाचित विधायकों को मलाल रहा। खास बात यह रही कि हमेशा चेहरों के दम पर राजनीति करने वाली बरौली सीट पर पहली बार भाजपा के नए चेहरे को जीत मिली। वहीं प्रदेश में बसपा के गठबंधन से सरकार बनाने वाली सपा को दो सीटें ही मिलीं। हां, बसपा जरूर ऐसा दल रहा, जो जिले की कई हारने वाली सीटों पर दूसरे स्थान पर रहा। कुल मिलाकर भगवादल के विधायकों को जीत के बाद भी विपक्ष में बैठने का मौका मिला।
जाटलैंड को छोड़ जिले पर हावी रहा ध्रुवीकरण
अयोध्या से जुड़े विवाद के बाद जिस तरह प्रदेश में धार्मिक ध्रुवीकरण व जातीय समीकरण की बयार यूपी में बही। उसका असर इस चुनाव में साफ देखने को मिला। इसी का परिणाम रहा कि जिले की अतरौली, कोल व शहर सीट पर लगातार जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने इस बार बरौली, हाथरस सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा। इसी का परिणाम रहा कि जिले में कुछ छह सीटों पर ध्रुवीकरण के आधार पर जीत दर्ज की। हालांकि यादव बाहुल्य गंगीरी व सिकंदराराऊ पर सपा ने जीत दर्ज की। इधर, जाटलैंड के इगलास में कांग्रेस व खैर में जनतादल ने जीत दर्ज की।
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ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी मैदान में थे, जबकि पांच राज्य स्तरीय दल बहुजन समाज पार्टी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, शिवसेना व रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा, सपा सहित 60 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 177 पर भाजपा, 28 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि सत्ता बनाने वाले बसपा-सपा गठबंधन ने क्रमश: 61 व 109 सीटें जीतीं।
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ये था दसों सीटों का परिणाम
- 2 लाख 07 हजार 957 मतों वाली हाथरस सीट पर भाजपा के राजवीर सिंह 29896 मत पाकर जीते और बसपा के हिलाल कुरैशी 29148 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 83 मतों वाली सासनी सीट पर भाजपा के हरिशंकर माहौर 44951 मत पाकर जीते और बसपा के राय साहब 23082 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 4 हजार 084 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर सपा के अमर सिंह यादव 45599 मत पाकर जीते और भाजपा के सेक्रेटरी सिंह 25166 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 98 हजार 180 मतों वाली गंगीरी सीट पर सपा के वीरेश यादव 48209 मत पाकर जीते और भाजपा के डॉ. राम सिंह 43272 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 6 हजार 057 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा के कल्याण सिंह 73789 मत पाकर जीते और कांग्रेस के डॉ. अनवार खां 55423 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 28 हजार 880 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर भाजपा के केके नवमान 58027 मत पाकर जीते और बसपा के अब्दुल खालिक 56005 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 30 हजार 675 मतों वाली कोल सीट पर भाजपा के किशनलाल दिलेर 72615 मत पाकर जीते और बसपा के श्याम सुंदर 20566 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 94 हजार 050 मतों वाली इगलास सीट पर कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 42916 मत पाकर जीतीं और बीजेपी के विक्रम सिंह हिंडौल 31261 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 97 हजार 076 मतों वाली बरौली सीट पर भाजपा के मुनीष गौड़ 36223 मत पाकर जीते और जनता दल के दलवीर सिंह 27633 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 1 हजार 925 मतों वाली खैर सीट पर जनता दल के जगवीर सिंह 25785 मत पाकर जीते और बसपा के चंद्रप्रकाश 21328 मत पाकर हारे।