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1957 का दूसरा विधानसभा चुनाव : निर्दलों की आमद...कांग्रेस से एक सीट छीनी
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अभिषेक शर्मा
आजादी के बाद जैसे-जैसे लोकतांत्रिक सिस्टम मजबूत हुआ। वैसे-वैसे सियासी रसूख की खातिर सियासी रणबांकुरे कुछ भी कर गुजरने के लिए मैदान में कूदने लगे। इसी का नतीजा उत्तर प्रदेश विधानसभा के दूसरे यानि 1957 के चुनाव में देखने को मिला। कहने को प्रदेश भर में कांग्रेस का राज कायम था। मगर दूसरे चुनाव में सियासी महत्वाकांक्षा पाले बैठे निर्दलों या कहें तो अपनों ने कांग्रेस को टक्कर देना शुरू कर दिया। दूसरे ही चुनाव में जिले की एक सीट इगलास कांग्रेस से निर्दल किशोरी रमण सिंह ने छीन ली। यही नहीं, सिर्फ सिकंदराराऊ को छोड़ दें तो सभी सीटों पर निर्दलों ने ही कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। सिकंदराराऊ एकमात्र ऐसी सीट रही, जहां कांग्रेस के सामने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे।
चार राष्ट्रीय व एक राज्य स्तरीय दल थे पंजीकृत
1957 में यूपी विधानसभा के लिए दूसरा चुनाव हुआ था। इस चुनाव में सिर्फ चार राष्ट्रीय व एक राज्य स्तरीय दल के रूप में पंजीकृत थे, जिनमें राष्ट्रीय दल के रूप में भारतीय जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय कांग्रेस व प्रजा सोशलिस्ट पार्टी शामिल थीं, जबकि राज्य स्तरीय दल के रूप में अखिल भारतीय राम राज्य परिषद पंजीकृत थी। पहले चुनाव के 14 व 2 दलों के बजाय इन्हीं दलों के बैनरतले या फिर निर्दल प्रत्याशियों ने चुनाव में भाग्य आजमाया था।
सभी सीटों पर इस तरह मिली कांग्रेस को कड़ी टक्कर
जिले की अब खैर तब टप्पल के नाम से बनी सीट पर कुल 91956 मतदाता थे, जिनमें से 44978 ने मतदान किया। उस चुनाव में कांग्रेस के देवदत्त सिंह 24080 वोट पाकर जीते, जबकि निर्दल महावीर सिंह ने 10730 मत हासिल किए थे। इसी तरह कुल 71225 मतदाताओं वाली अलीगढ़ सीट पर कुल 41231 मतदाताओं ने मतदान किया, जिसमें से कांग्रेस के अनंतराम वर्मा को 20655 मत मिले और दूसरे स्थान पर निर्दल एलएन माथुर 7270 मत लेकर आए। कोल व बरौली के दो हिस्सों में विभाजित कोल सीट पर 1 लाख 77 हजार 70 मतदाता थे, जिसमें से 1 लाख 59 हजार 705 ने मतदान किया। इस सीट पर कोल से कांग्रेस के रामप्रसाद देशमुख व बरौली से कांग्रेस के मोहनलाल गौतम निर्वाचित हुए। अतरौली पर कुल 94016 मतदाता थे, जिनमें से 54336 ने मतदान किया। यहां कांग्रेस के नेकराम शर्मा 30168 मत मिले, जबकि निर्दल दिग्गज यादव नेता व स्वतंत्रता सेनानी बाबू सिंह 24168 मत लेकर आए थे। कांटे की टक्कर में यह सीट उस समय मात्र 6 हजार मतों से कांग्रेस जीत पाई थी। गंगीरी सीट पर कुल 93999 में से 51228 ने मतदान किया, जिसमें कांग्रेस के श्रीनिवास 29918 मत लेकर निर्वाचित हुए, जबकि निर्दल श्याम सुंदर को 13774 मत मिले थे। सिकंदराराऊ पर कुल 87275 वोटरों में से 49408 ने मतदान किया, जिसमें से कांग्रेस के ठा.मलखान सिंह को 18707 मत मिले और जनसंघ के ओंकार सिंह को 13450 मत मिले। इस सीट पर भी कांग्रेस कांटे की टक्कर में मात्र 5257 मतों के अंतर से जीती। जिले की दूसरी सबसे बड़ी हाथरस सीट पर कुल 1 लाख 75 हजार 496 में से 1 लाख 61 हजार 352 मत पड़े, जिसमें हरदयाल सासनी क्षेत्र व नंद कुमार देव वाशिष्ठ हाथरस क्षेत्र के विधायक बने। दोनों कांग्रेसी थे। आखिरी इगलास सीट पर 84421 मतों में से 49361 मत पड़े, जिसमें निर्दल किशोरीरमण सिंह 19856 मत पाए, जबकि दूसरी निर्दल लक्ष्मी सिंह 14542 मत पाकर पराजित हुईं।
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अब जितने से हार जीत, तब पड़ते थे उतने वोट
उस दौर के चुनाव व इस दौर के चुनाव के अंतर पर गौर करें तो इस दौर में जितने मत के अंतर से हार जीत होती है। उस दौर में उतने मत पड़ते थे। ये आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं।
ये थे विधानसभा वार विधायक
1-टप्पल-देवदत्त सिंह
2-अलीगढ़-अनंतराम वर्मा
3-कोल-रामप्रसाद देशमुख (आरक्षित वर्ग, अलीगढ़ देहात/कोल क्षेत्र)
4-कोल-मोहनलाल गौतम (बरौली क्षेत्र)
5-अतरौली-नेकराम शर्मा
6-गंगीरी-कुं.श्रीनिवास शर्मा
7-सिकंदराराऊ-ठा.मलखान सिंह
8-हाथरस-हरदयाल सिंह (आरक्षित वर्ग, सासनी क्षेत्र)
9-हाथरस-नंद कुमार देव वाशिष्ठ (हाथरस क्षेत्र)
10-इगलास-किशोरी रमण सिंह
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आजादी के बाद जैसे-जैसे लोकतांत्रिक सिस्टम मजबूत हुआ। वैसे-वैसे सियासी रसूख की खातिर सियासी रणबांकुरे कुछ भी कर गुजरने के लिए मैदान में कूदने लगे। इसी का नतीजा उत्तर प्रदेश विधानसभा के दूसरे यानि 1957 के चुनाव में देखने को मिला। कहने को प्रदेश भर में कांग्रेस का राज कायम था। मगर दूसरे चुनाव में सियासी महत्वाकांक्षा पाले बैठे निर्दलों या कहें तो अपनों ने कांग्रेस को टक्कर देना शुरू कर दिया। दूसरे ही चुनाव में जिले की एक सीट इगलास कांग्रेस से निर्दल किशोरी रमण सिंह ने छीन ली। यही नहीं, सिर्फ सिकंदराराऊ को छोड़ दें तो सभी सीटों पर निर्दलों ने ही कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। सिकंदराराऊ एकमात्र ऐसी सीट रही, जहां कांग्रेस के सामने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे।
चार राष्ट्रीय व एक राज्य स्तरीय दल थे पंजीकृत
1957 में यूपी विधानसभा के लिए दूसरा चुनाव हुआ था। इस चुनाव में सिर्फ चार राष्ट्रीय व एक राज्य स्तरीय दल के रूप में पंजीकृत थे, जिनमें राष्ट्रीय दल के रूप में भारतीय जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय कांग्रेस व प्रजा सोशलिस्ट पार्टी शामिल थीं, जबकि राज्य स्तरीय दल के रूप में अखिल भारतीय राम राज्य परिषद पंजीकृत थी। पहले चुनाव के 14 व 2 दलों के बजाय इन्हीं दलों के बैनरतले या फिर निर्दल प्रत्याशियों ने चुनाव में भाग्य आजमाया था।
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सभी सीटों पर इस तरह मिली कांग्रेस को कड़ी टक्कर
जिले की अब खैर तब टप्पल के नाम से बनी सीट पर कुल 91956 मतदाता थे, जिनमें से 44978 ने मतदान किया। उस चुनाव में कांग्रेस के देवदत्त सिंह 24080 वोट पाकर जीते, जबकि निर्दल महावीर सिंह ने 10730 मत हासिल किए थे। इसी तरह कुल 71225 मतदाताओं वाली अलीगढ़ सीट पर कुल 41231 मतदाताओं ने मतदान किया, जिसमें से कांग्रेस के अनंतराम वर्मा को 20655 मत मिले और दूसरे स्थान पर निर्दल एलएन माथुर 7270 मत लेकर आए। कोल व बरौली के दो हिस्सों में विभाजित कोल सीट पर 1 लाख 77 हजार 70 मतदाता थे, जिसमें से 1 लाख 59 हजार 705 ने मतदान किया। इस सीट पर कोल से कांग्रेस के रामप्रसाद देशमुख व बरौली से कांग्रेस के मोहनलाल गौतम निर्वाचित हुए। अतरौली पर कुल 94016 मतदाता थे, जिनमें से 54336 ने मतदान किया। यहां कांग्रेस के नेकराम शर्मा 30168 मत मिले, जबकि निर्दल दिग्गज यादव नेता व स्वतंत्रता सेनानी बाबू सिंह 24168 मत लेकर आए थे। कांटे की टक्कर में यह सीट उस समय मात्र 6 हजार मतों से कांग्रेस जीत पाई थी। गंगीरी सीट पर कुल 93999 में से 51228 ने मतदान किया, जिसमें कांग्रेस के श्रीनिवास 29918 मत लेकर निर्वाचित हुए, जबकि निर्दल श्याम सुंदर को 13774 मत मिले थे। सिकंदराराऊ पर कुल 87275 वोटरों में से 49408 ने मतदान किया, जिसमें से कांग्रेस के ठा.मलखान सिंह को 18707 मत मिले और जनसंघ के ओंकार सिंह को 13450 मत मिले। इस सीट पर भी कांग्रेस कांटे की टक्कर में मात्र 5257 मतों के अंतर से जीती। जिले की दूसरी सबसे बड़ी हाथरस सीट पर कुल 1 लाख 75 हजार 496 में से 1 लाख 61 हजार 352 मत पड़े, जिसमें हरदयाल सासनी क्षेत्र व नंद कुमार देव वाशिष्ठ हाथरस क्षेत्र के विधायक बने। दोनों कांग्रेसी थे। आखिरी इगलास सीट पर 84421 मतों में से 49361 मत पड़े, जिसमें निर्दल किशोरीरमण सिंह 19856 मत पाए, जबकि दूसरी निर्दल लक्ष्मी सिंह 14542 मत पाकर पराजित हुईं।
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अब जितने से हार जीत, तब पड़ते थे उतने वोट
उस दौर के चुनाव व इस दौर के चुनाव के अंतर पर गौर करें तो इस दौर में जितने मत के अंतर से हार जीत होती है। उस दौर में उतने मत पड़ते थे। ये आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं।
ये थे विधानसभा वार विधायक
1-टप्पल-देवदत्त सिंह
2-अलीगढ़-अनंतराम वर्मा
3-कोल-रामप्रसाद देशमुख (आरक्षित वर्ग, अलीगढ़ देहात/कोल क्षेत्र)
4-कोल-मोहनलाल गौतम (बरौली क्षेत्र)
5-अतरौली-नेकराम शर्मा
6-गंगीरी-कुं.श्रीनिवास शर्मा
7-सिकंदराराऊ-ठा.मलखान सिंह
8-हाथरस-हरदयाल सिंह (आरक्षित वर्ग, सासनी क्षेत्र)
9-हाथरस-नंद कुमार देव वाशिष्ठ (हाथरस क्षेत्र)
10-इगलास-किशोरी रमण सिंह