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शराब कांडः सीबीआई जांच हो.. पीड़ितों को 50 लाख का मुआवजा मिले
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जिले में शराब से हुई मौतों पर सपा ने सीबीआई जांच और पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजे देने की मांग उठाई है। शुक्रवार को शराब से कई मौतों के बाद पूर्व विधायक हाजी जमीर उल्लाह खां सहित तमाम सपा नेता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पूर्व विधायक ने कहा कि शराब में जहरीला पदार्थ मिलाने वाले मिलावटखोर, उनको संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारी और सरकार इन मौतों की जिम्मेदार है। ये भी आशंका है कि यह राजनीतिक हत्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसकी सीबीआई जांच कराई जाए। इस प्रकरण में सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर जहरीली शराब का कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे कैसे हो रहा था, जबकि इसकी सप्लाई सरकार द्वारा होती है। मृतकों के परिजनों को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा मिले। आबकारी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा कि ये मौतें जिला प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। अब भी प्रशासन मौत को लेकर लीपापोती कर रहा है। महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी और महानगर महासचिव मनोज यादव ने भाजपा के नेता और स्थानीय विधायक पर शराब माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगाया। कहा कि इस सरकार में अफसरशाही निरंकुश है। मौतों के आंकड़े छिपाने के लिए पुलिस प्रशासन उनके परिजनों को बहला फुसला कर और दबाब बना कर बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार करा रहा है। जिला उपाध्यक्ष/प्रवक्ता रत्नाकर पाण्डेय कहा कि योगी सरकार में जहरीली शराब से मौतों की कई घटनाएं हो चुकी है। शराब माफिया व प्रशासन के सांठगांठ से यह अवैध व्यापार कई जिलों में उद्योग बन चुका है। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचने वालों में जिला महासचिव मुकेश महेश्वरी, जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र सिंह यादव, बबलू होल्कर, सोमेश चौधरी, संजय शर्मा के साथ सनी सारस्वत आदि शामिल रहे। इधर, सपा व्यापार सभा के महानगर अध्यक्ष शशांक वार्ष्णेय ने पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
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सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा कि ये मौतें जिला प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। अब भी प्रशासन मौत को लेकर लीपापोती कर रहा है। महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी और महानगर महासचिव मनोज यादव ने भाजपा के नेता और स्थानीय विधायक पर शराब माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगाया। कहा कि इस सरकार में अफसरशाही निरंकुश है। मौतों के आंकड़े छिपाने के लिए पुलिस प्रशासन उनके परिजनों को बहला फुसला कर और दबाब बना कर बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार करा रहा है। जिला उपाध्यक्ष/प्रवक्ता रत्नाकर पाण्डेय कहा कि योगी सरकार में जहरीली शराब से मौतों की कई घटनाएं हो चुकी है। शराब माफिया व प्रशासन के सांठगांठ से यह अवैध व्यापार कई जिलों में उद्योग बन चुका है। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचने वालों में जिला महासचिव मुकेश महेश्वरी, जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र सिंह यादव, बबलू होल्कर, सोमेश चौधरी, संजय शर्मा के साथ सनी सारस्वत आदि शामिल रहे। इधर, सपा व्यापार सभा के महानगर अध्यक्ष शशांक वार्ष्णेय ने पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
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