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डिप्टी सीएम के दौरे की सूचना लीक होने के पीछे भेदिए का हाथ

Sun, 11 Feb 2018 01:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़ Updated Sun, 11 Feb 2018 01:38 AM IST
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Vector hand behind leaking leak information of deputy CM tour
dinesh sharma - फोटो : अमर उजाला
‘अतरौलिया बोर्ड ’ के स्कूलों पर छापेमारी के लिए आ रहे डिप्टी सीएम के कार्यक्रम की सूचना लीक होना कहीं नकल माफिया और जिला प्रशासन की बाबू लॉबी के किसी भेदिये की साठगांठ का हिस्सा तो नहीं। बेशक इस मामले में सहायक सूचना निदेशक कार्रवाई की जद में आ गए। मगर इसे लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं और सवाल खड़ा हो रहा है कि जब तक कलेक्ट्रेट कार्यालय से सूचना जारी नहीं होगी, तब तक सहायक सूचना निदेशक उसे सार्वजनिक क्यों करेंगे। अगर इसे गोपनीय रखना था तो इससे उनको अवगत क्यों नहीं कराया गया। हालांकि हकीकत का खुलासा तो किसी जांच के बाद ही होगा। 
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यूपी बोर्ड परीक्षा में अतरौली के परीक्षा सेंटरों पर सामूहिक नकल लंबे समय से प्रशासन ही नहीं शासन की भी आंख की किरकिरी बनी हुई है। यही कारण है कि इसे ‘अतरौलिया बोर्ड’ का नाम तक दिया गया है। इसे रोकने के लिए तमाम प्रयास हुए हैं, लेकिन नकल माफिया इस कदर हावी हैं कि सभी प्रयास अब तक व्यर्थ साबित हुए हैं। शिक्षा राज्य मंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के नाते योगी सरकार ने पिछले साल हुई फजीहत के बाद इसे गंभीरता से लिया है।
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यही कारण है कि डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को शुक्रवार को औचक निरीक्षण के लिए आना पड़ा। अपने कार्यक्रम की गोपनीयता बरकरार रखने व स्थानीय प्रशासन को भ्रम में रखने के लिए उन्होंने अलीगढ़ ही नहीं यूपी के आठ जिलों को अपने निरीक्षण का कार्यक्रम भेजा। सख्त हिदायत भी दी कि यह कार्यक्रम सार्वजनिक न होने पाए। उसके बावजूद अलीगढ़ में उनका कार्यक्रम न केवल लीक हुआ, बल्कि समाचार पत्रों तक पहुंच गया। खुद डिप्टी सीएम परीक्षा केंद्रों पर पत्रकारों की भीड़ देखकर चौंक गए और उनके मुंह से निकल गया कि आप लोग पहले से कैसे आ गए। पता चला कि कार्यक्रम तो सार्वजनिक रूप से छपा है तो उनकी नाराजगी सामने आई।
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मामले की गाज भले ही सहायक सूचना निदेशक पर गिरा दी गई हो, लेकिन सवाल यह उठ रहे हैं कि जब कार्यक्रम गोपनीय था और देर रात एडीएम सिटी कार्यालय आया था तो यह सहायक सूचना निदेशक तक कैसे पहुंचा। 

अगर पहुंचा भी तो डिप्टी सीएम की हिदायत से उन्हें क्यों नहीं अवगत कराया गया। वरिष्ठ अफसर होने के नाते एडीएम से तो इतनी बड़ी  गलती की उम्मीद कम ही है, शक की सुई बाबू लाबी के किसी भेदिये पर है। कहा जा रहा है कि भेदिये के   सीधे संपर्क नकल माफिया से हैं। चर्चा है कि इसी साठगांठ के चलते डिप्टी सीएम का कार्यक्रम लीक कर दिया गया। 


यह कहना या यह चर्चा गलत है कि सूचना लीक करने के पीछे कोई बाबू लॉबी या उसका सदस्य है और उसकी नकल माफिया से साठ-गांठ है। चूंकि सहायक सूचना निदेशक को डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में रहना भी था। यह जानकारी उन्हें वहां रहने के लिए दी गई थी। उन्होंने एक तो सूचना सार्वजनिक कर दी और वह मौजूद भी नहीं रहे। इसके चलते उन्हें दोषी मानकर उन पर कार्रवाई की गई है।   -ऋषिकेश भाष्कर याशोद जिलाधिकारी 
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