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जब तक बच्चा घर नहीं आ जाता, अटकी रहती है जान
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sun, 10 Sep 2017 02:13 AM IST
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स्कूल की छुट्टी होने के बाद बस में सवार होती छात्रा।
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले सात साल के बच्चे की हत्या के बाद यहां के अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होने लगे हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि जब तक बच्चा स्कूल से घर नहीं आ जाता, जान अटकी रहती है।
देश के तमाम स्कूलों में एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं, उसे देखते हुए अलीगढ़ में भी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जानी चाहिए। तमाम अभिभावक एक स्वर में बोले कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई झोल नहीं होना चाहिए। अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन लगातार बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाती रही है। एसोसिएशन का मानना है कि जैसी फीस ली जा रही है, वैसे ही सुविधाएं और सुरक्षा भी मिलनी चाहिए।
जमीनी हकीकत देखें तो अलीगढ़ के दो चार स्कूलों को छोेड़कर ज्यादातर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि गुरुग्राम में बच्चे की हत्या के बाद शहर के स्कूल प्रबंधन उनके यहां होने वाली सुरक्षा में छेद को भरने में लग गए हैं। लेकिन छिटपुट प्रयासों से सुरक्षा को चाकचौबंद नहीं बनाया जा सकता, अभिभावकों को एकजुट होकर स्कूलों पर दबाव बनाना होगा कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए अभेद्य व्यवस्था बनाएं।
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स्कूल परिसर ही सब लोगों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। कक्षा तक बच्चे और शिक्षक के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति के आने की अनुमति नहीं है। यही नहीं बसों में जीपीएस भी लगा है, जिससे बस का लोकेशन का पता चल जाता है। बस में आने वाले बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। स्कूल में बालक व बालिका के शौचालय अलग-अलग हैं।- अनूप गुप्ता, निदेशक, विजडम पब्लिक स्कूल
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बस में आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। हर फ्लोर पर इंचार्ज है। ट्रांसपोर्टेशन इंचार्ज हैं, जो ड्राइवर व कंडक्टर पर नजर रखते हैं। स्टूडेंट के शौचालय इस्तेमाल करने के लिए ड्राइवर और कंडक्टर को इजाजत नहीं है। उनके लिए अलग से इंतजाम है। - श्याम कुंतेल, प्रिंसिपल, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
गुरुग्राम में बच्चे की हत्या में स्कूल प्रशासन की चूक है। कंडक्टर के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जो स्कूलों के लिए एक नजीर बन जाए। स्कूल में बच्चे खासतौर छोटे बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। छोेटे बच्चों के शौचालय तक आने के लिए सबको इजाजत नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था में झोल की गुंजाइश नहीं होनी दी जानी चाहिए।-प्रवीन अग्रवाल, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल डेवलेपमेंट सोसाइटी
गुरुग्राम की घटना बेहद दुखद है। स्कूल में ऐसी घटना घटने से चिंतित होना लाजिमी है। बच्चों की सुरक्षा का खास ख्याल होना चाहिए।
ममता केशरवानी, रामबाग कॉलोनी
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई वाहनों में जीपीएस नहीं लगा है। डीआईओएस से सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं को मुहैया कराने के लिए एनओसी ले ली जाती है, मगर उस पर अमल नहीं होता है। जिस तरह से भारी भरकम फीस ली जाती है, वैसे ही बच्चों को सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। - अनुराग गुप्ता, प्रभारी, अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। बच्चे स्कूल में कहां आते-जाते हैं, उसका टीचर या स्टाफ ध्यान रखें।
- कामिनी यादव, सुरेंद्र नगर
स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कोई घटना घट जाती है, तब एक-दो दिन सावधानी बरती जाती है, लेकिन उसके बाद फिर पुराने ढर्रे पर व्यवस्था चलने लगती है।
प्रदीप के गुप्त, विद्यानगर कॉलोनी
घटना के बाद झाड़ लेते पल्ला
शहर के नामचीन स्कूलों में लगे वाहन से उस समय स्कूल प्रबंधन पल्ला झाड़ लेते हैं, जब कोई घटना घट जाती है। कई स्कूलों से जुड़े वाहनों में जीपीएस नहीं लगे हैं। अधिकांश वाहन बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं। कई स्कूलों में चल रही बसें दरअसल स्कूल से अटैच ही नहीं हैं। इनमें कोई हादसा होने पर स्कूल साफ कह देतेहैं कि इनसे हमारा कोई ताल्लुक नहीं है। कई वाहन एलपीजी सिलेंडर से चलते हैं, जो बच्चों के जीवन के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।
यह है सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन
- वाहन के सामने और पीछे दोनों तरफ स्कूल बस लिखा हो।
- किराए के वाहन पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- निर्धरित क्षमता से अधिक बच्चे न बैठें।
फर्स्ट एड बॉक्स और ग्रिल जरूरी। चालक का आई साइड टेस्ट जरूरी।
- अग्निशमन व्यवस्था हो, जरूरी नंबर लिखे हों।
- चालक के अतिरिक्त वाहन में एक व्यक्ति सहायता के लिए।
- वाहन में स्कूल बैग रखने की जगह सुरक्षित हो।
- वाहन में कोई शिक्षक भी हो। स्पीड़ कंट्रोल डिवाइस होना जरूरी।
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देश के तमाम स्कूलों में एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं, उसे देखते हुए अलीगढ़ में भी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जानी चाहिए। तमाम अभिभावक एक स्वर में बोले कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई झोल नहीं होना चाहिए। अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन लगातार बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाती रही है। एसोसिएशन का मानना है कि जैसी फीस ली जा रही है, वैसे ही सुविधाएं और सुरक्षा भी मिलनी चाहिए।
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जमीनी हकीकत देखें तो अलीगढ़ के दो चार स्कूलों को छोेड़कर ज्यादातर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि गुरुग्राम में बच्चे की हत्या के बाद शहर के स्कूल प्रबंधन उनके यहां होने वाली सुरक्षा में छेद को भरने में लग गए हैं। लेकिन छिटपुट प्रयासों से सुरक्षा को चाकचौबंद नहीं बनाया जा सकता, अभिभावकों को एकजुट होकर स्कूलों पर दबाव बनाना होगा कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए अभेद्य व्यवस्था बनाएं।
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स्कूल परिसर ही सब लोगों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। कक्षा तक बच्चे और शिक्षक के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति के आने की अनुमति नहीं है। यही नहीं बसों में जीपीएस भी लगा है, जिससे बस का लोकेशन का पता चल जाता है। बस में आने वाले बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। स्कूल में बालक व बालिका के शौचालय अलग-अलग हैं।- अनूप गुप्ता, निदेशक, विजडम पब्लिक स्कूल
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बस में आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। हर फ्लोर पर इंचार्ज है। ट्रांसपोर्टेशन इंचार्ज हैं, जो ड्राइवर व कंडक्टर पर नजर रखते हैं। स्टूडेंट के शौचालय इस्तेमाल करने के लिए ड्राइवर और कंडक्टर को इजाजत नहीं है। उनके लिए अलग से इंतजाम है। - श्याम कुंतेल, प्रिंसिपल, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
गुरुग्राम में बच्चे की हत्या में स्कूल प्रशासन की चूक है। कंडक्टर के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जो स्कूलों के लिए एक नजीर बन जाए। स्कूल में बच्चे खासतौर छोटे बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। छोेटे बच्चों के शौचालय तक आने के लिए सबको इजाजत नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था में झोल की गुंजाइश नहीं होनी दी जानी चाहिए।-प्रवीन अग्रवाल, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल डेवलेपमेंट सोसाइटी
गुरुग्राम की घटना बेहद दुखद है। स्कूल में ऐसी घटना घटने से चिंतित होना लाजिमी है। बच्चों की सुरक्षा का खास ख्याल होना चाहिए।
ममता केशरवानी, रामबाग कॉलोनी
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई वाहनों में जीपीएस नहीं लगा है। डीआईओएस से सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं को मुहैया कराने के लिए एनओसी ले ली जाती है, मगर उस पर अमल नहीं होता है। जिस तरह से भारी भरकम फीस ली जाती है, वैसे ही बच्चों को सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। - अनुराग गुप्ता, प्रभारी, अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। बच्चे स्कूल में कहां आते-जाते हैं, उसका टीचर या स्टाफ ध्यान रखें।
- कामिनी यादव, सुरेंद्र नगर
स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कोई घटना घट जाती है, तब एक-दो दिन सावधानी बरती जाती है, लेकिन उसके बाद फिर पुराने ढर्रे पर व्यवस्था चलने लगती है।
प्रदीप के गुप्त, विद्यानगर कॉलोनी
घटना के बाद झाड़ लेते पल्ला
शहर के नामचीन स्कूलों में लगे वाहन से उस समय स्कूल प्रबंधन पल्ला झाड़ लेते हैं, जब कोई घटना घट जाती है। कई स्कूलों से जुड़े वाहनों में जीपीएस नहीं लगे हैं। अधिकांश वाहन बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं। कई स्कूलों में चल रही बसें दरअसल स्कूल से अटैच ही नहीं हैं। इनमें कोई हादसा होने पर स्कूल साफ कह देतेहैं कि इनसे हमारा कोई ताल्लुक नहीं है। कई वाहन एलपीजी सिलेंडर से चलते हैं, जो बच्चों के जीवन के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।
यह है सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन
- वाहन के सामने और पीछे दोनों तरफ स्कूल बस लिखा हो।
- किराए के वाहन पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- निर्धरित क्षमता से अधिक बच्चे न बैठें।
फर्स्ट एड बॉक्स और ग्रिल जरूरी। चालक का आई साइड टेस्ट जरूरी।
- अग्निशमन व्यवस्था हो, जरूरी नंबर लिखे हों।
- चालक के अतिरिक्त वाहन में एक व्यक्ति सहायता के लिए।
- वाहन में स्कूल बैग रखने की जगह सुरक्षित हो।
- वाहन में कोई शिक्षक भी हो। स्पीड़ कंट्रोल डिवाइस होना जरूरी।