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Aligarh News: साढ़े तीन महीने म्यांमार के केके पार्क में फंसे रहे हाथरस के दो भाई

Wed, 10 Dec 2025 02:32 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़ Updated Wed, 10 Dec 2025 02:32 AM IST
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Two brothers from Hathras were stranded in KK Park in Myanmar for three and a half months.
जिले की सादाबाद तहसील के दो सगे भाई म्यांमार के केके पार्क में साढ़े तीन महीने तक फंसे रहे। इन दोनों से नौकरी के नाम पर 2.35 लाख रुपये ठगे गए। बैंकॉक में 80 हजार रुपये महीने की नौकरी लगवाने के बहाने पहले थाईलैंड और फिर वहां से म्यांमार भेज दिया गया। भारतीय दूतावास की मदद से 18 नवंबर को दोनों भाई स्वदेश लौटे। इनमें से एक ने अब साइबर सेल में मुंबई के एक व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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सादाबाद तहसील के गांव गढ़उमराव के रहने वाले समीर अली ने साइबर सेल में नवी मुंबई, बेलापुर गांव के प्रमोद यादव के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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समीर ने बताया कि उसकी फोन पर प्रमोद से विदेश में नौकरी लगवाने के लिए बात हुई थी। प्रमोद में बैंकॉक में नौकरी होने की जानकारी दी थी तथा वेतन 80 हजार रुपये बताया था। यह भी बताया था कि कंपनी दो साल का वीजा देगी तथा रहना-खाना कंपनी की तरफ से होगा। इतना अच्छा ऑफर देख सगीर ने अपने भाई सगीर अली की भी नौकरी के लिए बात की।
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समीर ने बताया कि एक व्यक्ति की नौकरी लगवाने के लिए 1.20 लाख रुपये मांगे गए। इस तरह उन्होंने 26 से 30 जुलाई के बीच यूपीआईडी के माध्यम से प्रमोद के खाते में कुल 2.35 लाख रुपये भेजे थे।






रुपये देने के बाद 30 जुलाई को ही समीर व सगीर की फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग आदि जानकारी पहुंच गई। समीर ने बताया कि 31 जुलाई को दोनों मुंबई से थाईलैंड पहुंचे। थाईलैंड पहुंचकर पता चला कि उनके साथ धोखा हुआ है।



सादाबाद के युवक-युवती की तरह ही उन्हें भी सड़क मार्ग से कई घंटे की यात्रा के बाद बॉर्डर पार कराकर म्यांमार के केके पार्क पहुंचा दिया गया। वहां पर उनसे साइबर ठगी का काम कराया गया। दोनों ने वहां से फोन कर प्रमोद से बात भी की थी, लेकिन उसने वहीं रहने के लिए धमकाया और फोन काट दिया। साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी की तलाश की जा रही है।







चीन के युवा कर रहे साइबर गुलामी
रिपोर्ट में समीर ने बताया कि केके पार्क में चीन के लोगों का कब्जा है। वे एक तरह से साइबर गुलामी करा रहे हैं। समीर के अनुसार उन्हें थाईलैंड में रूबी ग्रुप ऑफ कंपनी, मीशो में कस्टमर सर्विस रिप्रजेंटेटिव के पद पर भेजा गया था, लेकिन गुमराह कर म्यांमार ले जाया गया। समीर ने बताया कि जब साइबर ठगी करने के लिए मना किया तो वहां के एजेंटों ने मारपीट की तथा पासपोर्ट जब्त कर लिए। तीन दिन उन्हें भूखा भी रखा गया। इसलिए मजबूरी में गलत काम करना पड़ा।

रिफ्यूजी शिविर में रहना पड़ा
बचाव अभियान के दौरान वे फौज की मदद से केके पार्क से बाहर आए। उन्हें म्यांमार में ही रिफ्यूजी कैंप में कुछ दिन बिताने पड़े। इसके बाद उन्हें थाईलैंड भेज दिया गया। थाईलैंड से 18 नवंबर को एयरफोर्स के विमान से 125 भारतीयों के साथ वे भी गाजियाबाद पहुंचे, जहां पूछताछ के बाद उन्हें फिरोजाबाद की बस में बैठाया गया। इसके बाद वे हाथरस पहुंचे।

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हाथरस के युवक-युवती भी हुए हैं शिकार
हाथरस। हाल ही में एक युवती और एक युवक के म्यांमार में फंसने का मामला प्रकाश में आया था। स्वदेश लौटने के बाद युवती ने 18 नवंबर को साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में हाथरस पुलिस ने हिमाचल के संजय राणा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद उसके साथी सचिन राणा की गिरफ्तारी हुई, जिसने थाईलैंड में रहकर युवाओं की तस्करी करने में मदद की थी। अब इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। जिसमें सादाबाद के दो भाइयों के साथ ठगी हुई है।
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