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तीन तलाक बिलः कहीं खुशी, कहीं चिंता
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राज्यसभा में तीन तलाक का ऐतिहासिक बिल पास होने पर शहर की मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर है। उन्होंने इसे अपनी आजादी का दिन बताया। हालांकि विरोध में भी कुछ सुर निकले। कई बुद्धिजीवियों ने भी इस बिल की तारीफ की है।
तीन तलाक पर तीन साल की सजा ज्यादा है। अगर यह तीन या छह महीने की होती तो बेहतर होता। इससे घर भी बच जाता और शौहर को सबक भी मिल जाती। तीन साल के बाद जब शौहर जेल से बाहर आए, तो मुमकिन नहीं है कि इस रिश्ते में वही मिठास रहे। -मुफ्ती मोहम्मद जाहिद खान, सुन्नी थियोलॉजी एएमयू
तीन तलाक कानून पूर्ण रूप से महिलाओं के खिलाफ है। पति जेल में तो बीवी, बच्चे कैसे जिंदा रहेंगे। जब एक बार में तीन तलाक मान्य नहीं है, तो फिर सजा किस अपराध की। जेल काटकर आने के बाद कोई पति अपनी पत्नी संग कैसे रह सकेगा। सरकार ने करीब 20 लाख महिलाओं के बारे मे क्यों नहीं सोचा, जिनके पतियों ने बिना तलाक के अपनी पत्नियों को छोड़ रखा है।
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-जरीना आगा, समाज सेविका
हिंदुस्तान के कानून पर अमल करना हर हिंदुस्तानी की जिम्मेदारी है। अल्लाह तआला व उसके रसूल मोहम्मद मुस्तफा (सअ) का कानून हर मुसलमान पर फर्ज है।
-गुलजार अहमद, समाजसेवी
तीन तलाक बिल का स्वागत करती हूं। तलाक को लेकर शरीयत में जो जिक्र है, उसे मुसलमानों को मानना चाहिए। आने वाले वक्त में इसके नतीजे कैसे होंगे, यह देखना होगा।
-शाजिया सिद्दीकी, समाज सेविका
तीन तलाक हमारा पर्सनल मामला है। किसी तरह का फेरबदल ठीक नहीं है। सरकार धार्मिक मामलों पर बहस करने के लिए नहीं बनी है। एक मजहब को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
- हमजा सुफयान, निवर्तमान उपाध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
तीन तलाक बिल निंदनीय है। हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार तलाक पर एक साल की सजा है। हमें जाल में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। शौहर तीन साल जेल में रहेगा तो बीवी-बच्चों को कौन पालेगा।
- मैमूना अंसारी, निवर्तमान सचिव, वीमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन
मुस्लिम महिलाओं की आजादी का दिन है। तीन तलाक के लिए कानून बनना ऐतिहासिक कदम है। आज मुस्लिम महिलाएं रूढ़िवादी प्रथा से मुक्त हो गई हैं। सरकार के इस साहसिक कदम की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।
-सबा साजिद, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी
तीन तलाक पर बना यह कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए एक सुकून देने वाला है, जिसकी दरकार लंबे समय से थी। अब इस कुप्रथा पर लगाम लगाने की खातिर कानून बन गया है। इसके लिए मोदी सरकार बधाई के पात्र है। मुस्लिम महिलाओं को जश्न मनाना चाहिए, मिठाई बांटनी चाहिए।
- यासमीन खालिद, तलाकशुदा महिला
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तीन तलाक पर तीन साल की सजा ज्यादा है। अगर यह तीन या छह महीने की होती तो बेहतर होता। इससे घर भी बच जाता और शौहर को सबक भी मिल जाती। तीन साल के बाद जब शौहर जेल से बाहर आए, तो मुमकिन नहीं है कि इस रिश्ते में वही मिठास रहे। -मुफ्ती मोहम्मद जाहिद खान, सुन्नी थियोलॉजी एएमयू
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तीन तलाक कानून पूर्ण रूप से महिलाओं के खिलाफ है। पति जेल में तो बीवी, बच्चे कैसे जिंदा रहेंगे। जब एक बार में तीन तलाक मान्य नहीं है, तो फिर सजा किस अपराध की। जेल काटकर आने के बाद कोई पति अपनी पत्नी संग कैसे रह सकेगा। सरकार ने करीब 20 लाख महिलाओं के बारे मे क्यों नहीं सोचा, जिनके पतियों ने बिना तलाक के अपनी पत्नियों को छोड़ रखा है।
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-जरीना आगा, समाज सेविका
हिंदुस्तान के कानून पर अमल करना हर हिंदुस्तानी की जिम्मेदारी है। अल्लाह तआला व उसके रसूल मोहम्मद मुस्तफा (सअ) का कानून हर मुसलमान पर फर्ज है।
-गुलजार अहमद, समाजसेवी
तीन तलाक बिल का स्वागत करती हूं। तलाक को लेकर शरीयत में जो जिक्र है, उसे मुसलमानों को मानना चाहिए। आने वाले वक्त में इसके नतीजे कैसे होंगे, यह देखना होगा।
-शाजिया सिद्दीकी, समाज सेविका
तीन तलाक हमारा पर्सनल मामला है। किसी तरह का फेरबदल ठीक नहीं है। सरकार धार्मिक मामलों पर बहस करने के लिए नहीं बनी है। एक मजहब को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
- हमजा सुफयान, निवर्तमान उपाध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
तीन तलाक बिल निंदनीय है। हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार तलाक पर एक साल की सजा है। हमें जाल में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। शौहर तीन साल जेल में रहेगा तो बीवी-बच्चों को कौन पालेगा।
- मैमूना अंसारी, निवर्तमान सचिव, वीमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन
मुस्लिम महिलाओं की आजादी का दिन है। तीन तलाक के लिए कानून बनना ऐतिहासिक कदम है। आज मुस्लिम महिलाएं रूढ़िवादी प्रथा से मुक्त हो गई हैं। सरकार के इस साहसिक कदम की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।
-सबा साजिद, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी
तीन तलाक पर बना यह कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए एक सुकून देने वाला है, जिसकी दरकार लंबे समय से थी। अब इस कुप्रथा पर लगाम लगाने की खातिर कानून बन गया है। इसके लिए मोदी सरकार बधाई के पात्र है। मुस्लिम महिलाओं को जश्न मनाना चाहिए, मिठाई बांटनी चाहिए।
- यासमीन खालिद, तलाकशुदा महिला