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Aligarh News: परंपरा बनी रोजगार, महिलाएं जवे-सेवई से भर रहीं आमदनी की थाली
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केशव नगर स्थित एक घर में जवे बनातीं महिलाएं।
- फोटो : samvad
रक्षा बंधन का त्योहार नजदीक आते ही शहर के घरों में पारंपरिक जवे और सेंवई बनाने का काम तेज हो गया है। महिलाएं जहां त्योहार की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं यह काम उनके लिए अतिरिक्त आय का भी सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। महिला समूह आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
केशव नगर निवासी शशि शर्मा ने बताया कि वह अपने महिला समूह के साथ मिलकर जवे और सेंवई तैयार कर रही हैं। तैयार उत्पाद शहर के विभिन्न बाजारों और दुकानों तक पहुंचाए जा रहे हैं। बाजार में जवे और सेंवई करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहे हैं, जिससे महिलाओं को अच्छा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मैदा से तैयार होने वाले इन उत्पादों का प्रतिदिन एक से दो किलोग्राम तक उत्पादन हो जाता है।
इस कार्य में आरती, विद्या देवी और राजकुमारी भी सहयोग कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि हर वर्ष रक्षा बंधन पर इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है।
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परंपरा के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल
रक्षाबंधन पर जवे और सेंवई बनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। बदलते समय में महिला स्वयं सहायता समूहों ने इसे स्वरोजगार का माध्यम बना लिया है। त्योहार के मौसम में बढ़ती मांग से महिलाओं की आमदनी बढ़ती है, वहीं ग्राहकों को घर में बने ताजे और पारंपरिक उत्पाद भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
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केशव नगर निवासी शशि शर्मा ने बताया कि वह अपने महिला समूह के साथ मिलकर जवे और सेंवई तैयार कर रही हैं। तैयार उत्पाद शहर के विभिन्न बाजारों और दुकानों तक पहुंचाए जा रहे हैं। बाजार में जवे और सेंवई करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहे हैं, जिससे महिलाओं को अच्छा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मैदा से तैयार होने वाले इन उत्पादों का प्रतिदिन एक से दो किलोग्राम तक उत्पादन हो जाता है।
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इस कार्य में आरती, विद्या देवी और राजकुमारी भी सहयोग कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि हर वर्ष रक्षा बंधन पर इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है।
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परंपरा के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल
रक्षाबंधन पर जवे और सेंवई बनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। बदलते समय में महिला स्वयं सहायता समूहों ने इसे स्वरोजगार का माध्यम बना लिया है। त्योहार के मौसम में बढ़ती मांग से महिलाओं की आमदनी बढ़ती है, वहीं ग्राहकों को घर में बने ताजे और पारंपरिक उत्पाद भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।