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रुपये जमा करने गए थे, पहुंच गए हवालात
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sat, 12 Nov 2016 02:14 AM IST
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पुराने नोट बदलने के लिए लाइन में लगी गृहणियां।
- फोटो : अमर उजाला
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1000 और 500 के पुराने नोट बंद होने के बाद अब इन नोटों को बैंक में जमा करना भी किसी मुसीबत से कम नहीं है। शुक्रवार को बैंक की लंबी लाइन में लगे एक अध्यापक और चतुर्थश्रेणी कर्मचारी ने बैंक कर्मियों के धीमे काम पर नाराजगी जाहिर करते हुए शोर मचाया तो पुलिस पकड़ ले गई।
गए थे बैंक रुपया जमा करने और घर पर सूचना पहुंची कि शांतिभंग में हवालात में बंद हो गए हैं। कामकाज छोड़कर परिजन उनकी जमानत की जुगाड़ में जुट गए।
अध्यापक अरुण कुमार निवासी अतरौली एवं शिक्षा विभाग में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी विजय कुमार निवासी खोंदा कालोनी गाजियाबाद कस्बे के ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त शाखा में कैश जमा करने गए थे।
दोपहर दो बजे के बाद भी रुपया जमा नहीं हुआ तो वह बैंक कर्मियों पर धीमे काम करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। बैंक मैनेजर ने पुलिस अधिकारियों को फोन कर दिया। तुरंत ही पुलिस पहुंच गई। दोनों को पकड़कर थाने ले गई। शांतिभंग में उनका चालान कर दिया।
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दवा के लिए लाइन में लग रहा कैंसर पीड़ित
अर्राना निवासी गौरीशंकर कैंसर से पीड़ित हैं। हर हफ्ते दो से तीन हजार रुपये की दवा का खर्च है। शुक्रवार को बैंक में लाइन में लगकर मायूस लौटे गौरीशंकर ने कहा कि अचानक बड़े नोट बंद होने से दवा नहीं खरीद पाया हूं। कल (गुरुवार) से कतार में लगने के बाद भी बैंक में नोट बदलने का नंबर नहीं आया है।
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गए थे बैंक रुपया जमा करने और घर पर सूचना पहुंची कि शांतिभंग में हवालात में बंद हो गए हैं। कामकाज छोड़कर परिजन उनकी जमानत की जुगाड़ में जुट गए।
अध्यापक अरुण कुमार निवासी अतरौली एवं शिक्षा विभाग में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी विजय कुमार निवासी खोंदा कालोनी गाजियाबाद कस्बे के ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त शाखा में कैश जमा करने गए थे।
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दोपहर दो बजे के बाद भी रुपया जमा नहीं हुआ तो वह बैंक कर्मियों पर धीमे काम करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। बैंक मैनेजर ने पुलिस अधिकारियों को फोन कर दिया। तुरंत ही पुलिस पहुंच गई। दोनों को पकड़कर थाने ले गई। शांतिभंग में उनका चालान कर दिया।
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दवा के लिए लाइन में लग रहा कैंसर पीड़ित
अर्राना निवासी गौरीशंकर कैंसर से पीड़ित हैं। हर हफ्ते दो से तीन हजार रुपये की दवा का खर्च है। शुक्रवार को बैंक में लाइन में लगकर मायूस लौटे गौरीशंकर ने कहा कि अचानक बड़े नोट बंद होने से दवा नहीं खरीद पाया हूं। कल (गुरुवार) से कतार में लगने के बाद भी बैंक में नोट बदलने का नंबर नहीं आया है।