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एएमयू में धरना देने वाले छात्रों को उठाकर बाहर फेंक देना चाहिए
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सांसद सतीश कुमार गौतम ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में धरना दे रहे छात्रों को उठाकर बाहर फेंक देना चाहिए। सांसद ने एएमयू छात्रों एवं वीसी को लेकर एक बार फिर भड़काऊ बयान देकर माहौल को गरमा दिया है।
रविवार को उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक कहावत है कि जो बातों से नहीं मानते... वह कैसे मानते हैं जगजाहिर है। उनके साथ दूसरे तरीके से पेश आना चाहिए। उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि वीसी को चाहिए कि धरना दे रहे छात्रों को तत्काल निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखाएं। आज एएमयू अराजकता का अड्डा बन गई है। जहां लोग 40 साल से जमे पड़े हैं। एएमयू में वीसी होना न होना के बराबर है। एएमयू वीसी से यूनिवर्सिटी नहीं चल रही है तो लिखकर केंद्र सरकार को दे देना चाहिए।
उन्हाेंने छात्रों से कहा कि पढ़ने आए हैं तो पढ़ाई करें। राजनीति करनी है तो एएमयू छोड़ कर बाहर आएं। हम बताएंगे कि राजनीति कैसे की जाती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ननकाना साहिब में सिखों पर हुए हमले के मामले में एएमयू के छात्र चुप हैं। जबकि दुनिया में कही कुछ हो जाए तो सबसे पहले विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने कहा कि एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिलाने को संकल्पित हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब एएमयू में एससी, एसटी एवं ओबीसी के छात्र प्रवेश पाएंगे तब देखूंगा कि यह कैसे हंगामा करेंगे।
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रविवार को उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक कहावत है कि जो बातों से नहीं मानते... वह कैसे मानते हैं जगजाहिर है। उनके साथ दूसरे तरीके से पेश आना चाहिए। उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि वीसी को चाहिए कि धरना दे रहे छात्रों को तत्काल निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखाएं। आज एएमयू अराजकता का अड्डा बन गई है। जहां लोग 40 साल से जमे पड़े हैं। एएमयू में वीसी होना न होना के बराबर है। एएमयू वीसी से यूनिवर्सिटी नहीं चल रही है तो लिखकर केंद्र सरकार को दे देना चाहिए।
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उन्हाेंने छात्रों से कहा कि पढ़ने आए हैं तो पढ़ाई करें। राजनीति करनी है तो एएमयू छोड़ कर बाहर आएं। हम बताएंगे कि राजनीति कैसे की जाती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ननकाना साहिब में सिखों पर हुए हमले के मामले में एएमयू के छात्र चुप हैं। जबकि दुनिया में कही कुछ हो जाए तो सबसे पहले विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने कहा कि एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिलाने को संकल्पित हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब एएमयू में एससी, एसटी एवं ओबीसी के छात्र प्रवेश पाएंगे तब देखूंगा कि यह कैसे हंगामा करेंगे।
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