{"_id":"62c34832772de117960741fc","slug":"this-is-smart-city-to-break-build-and-then-leave-unfinished-aligarh-news-ali295344396","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : ये है स्मार्ट सिटी.. तोड़ना, बनाना और फिर अधूरा छोड़ देना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : ये है स्मार्ट सिटी.. तोड़ना, बनाना और फिर अधूरा छोड़ देना
विज्ञापन
लाल डिग्गी स्थित हैबिटेट बिल्डिंग के सामने टूटी सड़क।
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहने को अलीगढ़ स्मार्ट सिटी है। मगर हर तरफ से एक ही सवाल उठने लगा है कि शहर स्मार्ट कब होगा। रविवार को एएमयू रोड पर हैबिटेट सेंटर के सामने महिला की मौत ने तो स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को लेकर चल रहे कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रबंधन कार्य शुरू कराने के नाम पर तोड़फोड़ कर देता है, फिर अधूरे निर्माण की महीनों तक सुध नहीं लेता है। इसके चलते आसपास के रहने वाले लोगों और राहगीरों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में जगह जगह खुदे े गड्ढे, उखड़ी सड़कें क्या कर गुजरेंगी? इसके पीछे बड़ी वजह नगर निगम के अंदर की आपसी खींचतान भी मानी जा रही है।
ये हैं शहर के हालात
बारिश से पहले नगर निगम के अधिकारियों ने नालों की सफाई, बेहतर पेयजल इंतजाम तथा बारिश के दौरान जलभराव से निपटने के दावे किए थे। मगर पिछले सप्ताह हुई थोड़ी सी बारिश ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। जगह -जगह शहर में लोगों को जलभराव से जूझना पड़ा । इतना ही नहीं, पेयजल संकट से जगह जगह लोग जूझ रहे हैं।
स्मार्ट सिटी के कामों की बात करें तो इनको समय से पूरा कराने का कोई मानक नहीं है। हालात ये हैं कि आज तक अधिकांश काम पूरे नहीं हुए। शहर का सिविल लाइंस इलाका इन दिनों अधूरे कामों के कारण ज्यादा प्रभावित है। इसी तरह नाले, सीवर आदि के लिए जगह जगह गड्ढे खुदे पड़े हैं। इसे लेकर एक ही आवाज उठ रही है कि कब शहर सही होगा। कब हमारा शहर स्मार्ट होगा।
विज्ञापन
नेताओं के बोल
-इन दिनों शहर में बड़ी समस्या पेयजल संकट, बारिश के बाद जलभराव और गंदगी की है। जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। विकास कार्यों की समयबद्धता नहीं है। जगह-जगह शहर खुदा पड़ा है। विकास देखने को शहरवासी तरस गए हैं। सिविल लाइंस में बनी - बनाई सड़कों को खोदकर फिर से बनाया जा रहा है। पुराने शहर की ओर ध्यान नहीं है।-विवेक सारस्वत, महानगर अध्यक्ष भाजपा
-नगर निगम में इन दिनों मनमानी की जा रही है। गृहकर बड़ा मुद्दा है। सड़कें खुदी पड़ी हैं। कब निर्माण पूरा होगा, कुछ पता नहीं है। पार्षदों तक की सुनवाई नहीं हो रही है। नौकरशाही हावी है। ऐसे में शहर का विकास कैसे संभव है। इसका अंदाजा कोई भी खुद ही लगा सकता है।-विवेक बंसल, पूर्व विधायक
-शहर में विकास के नाम पर पांच साल से तोड़फोड़ चल रही है। पहले तोड़ना फिर बनाना यही चल रहा है। ये धन का दुरुपयोग है। स्मार्ट सिटी के नाम पर पांच साल में अभी तक एक सुविधा शहर की जनता को नहीं मिली है। ऊपर से गृह कर इस कदर थोपा जा रहा है, जिसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। नालों को जोड़ने तक का काम नहीं हुआ। -अज्जू इशहाक, पूर्व महानगर अध्यक्ष सपा
-शहर की समस्याओं से मैं वाकिफ हूं। त्योहार आ रहे हैं। इसे लेकर नगर निगम अधिकारियों, पार्षदों संग बैठक की जाएगी। जिसमें गंदगी, जलभराव, पेयजल आदि समस्या पर विस्तार से चर्चा होगी। हर स्तर पर निदान कराया जाएगा। चूंकि स्मार्ट सिटी से हमारा कोई सरोकार नहीं, इसलिए उस पर कुछ कहा नहीं जा सकता।-मो.फुरकान, मेयर
-बारिश से पहले जलभराव को लेकर बड़े निर्णय लिए गए हैं। जिसके परिणाम बारिश के दौरान देखने को मिलेंगे। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए सबमर्सिबल लगवाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी के कार्यों की मानीटरिंग की जा रही है। निर्माण में देरी पर ठेकेदारों व निर्माण एजेंसियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। रविवार की घटना में पुलिस रिपोर्ट मांगी गई है। उसी अनुसार निर्णय लिया जाएगा। -गौरांग राठी, नगर आयुक्त
पब्लिक के बोल--
-कल की घटना का मैं प्रत्यक्षदर्शी हूं। कंकरीट पर स्कूटी सवार दंपती फिसले हैं। ये निर्माण करने वाली संस्था की लापरवाही है । स्मार्ट सिटी में काम कर रहीं कुछ एजेंसियों का हाल तो ऐसा है कि एक जगह काम पूरा नहीं करतीं और दूसरी जगह खुदाई करा देती हैं। इस पर निर्णय लिए जाने की जरूरत है।-दीपक अग्रवाल, साईं विहार
-शहर में गंदगी, जलभराव और पेयजल संकट जैसी समस्याओं से आम जन परेशान है। स्मार्ट सिटी के काम देरी से होने के कारण लोग परेशान हैं। इस बारे में जल्द बड़ा बदलाव या समय से निर्णय नहीं हुआ तो नगर निगम व स्मार्ट सिटी के खिलाफ अदालत की शरण ली जाएगी।-प्रवीन नाथ शर्मा, एडवोकेट
सड़क से हटवाई गई कंकरीट
रविवार को दुर्घटना के बाद सड़क पर बिखरी पड़ी कंकरीट को सोमवार को हटवा दिया गया। हालांकि दुर्घटनास्थल के सहारे कंकरीट बिखरी पड़ी थी। मगर सोमवार को सड़क पर नहीं थी। इधर, दुर्घटना के बाद मृत महिला के परिवार में संवेदना जताने के लिए पहुंचने वालों का सिलसिला जारी था।
कूड़ा उठाने में हर महीने डेढ़ करोड़ का खर्च डीजल
शहर में सफाई व्यवस्था में स्मार्ट सिटी भी सहभागी है। मगर वह सिर्फ कूड़ा प्वाइंटों से कूड़ा उठाकर डंप यार्ड पर पहुंचाने का काम करती है। इससे इतर शहर के अंदर कूड़ा उठाने व सफाई में लगे नगर निगम के वाहन डेढ़ करोड़ से ज्यादा का प्रतिमाह डीजल पी रहे हैं। बावजूद इसके शहर गंदगी के अटा पड़ा है।
बंद पड़े रहते है पेजयल एटीएम
स्मार्ट होते हमारे शहर में पेयजल संकट के निदान के लिए आठ वाटर एटीएम लगवाए गए हैं। शमशाद, कचहरी रोड, रामलीला मैदान, अचलताल, नौरंगाबाद, रामघाट रोड, रेलवे रोड सहित आठ जगह शामिल हैं। एक वाटर एटीएम की कीमत 7.50 लाख रुपये है। इनकी देखरेख का जिम्मा भी उसी एजेंसी को है, जिसने इन्हें लगाया है। मगर इनमें से अधिकांश बंद हैं। डीएस कॉलेज के छात्र नेता बल्देव चौधरी सीटू के अनुसार रामघाट रोड व रामलीला मैदान पर लगे वाटर एटीएम तो हर समय बंद ही रहते हैं। नियमानुसार इनमें रुपये डालकर शुद्ध पानी मिलने का प्रवधान है। मगर राहगीरों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
ये हैं शहर के हालात
बारिश से पहले नगर निगम के अधिकारियों ने नालों की सफाई, बेहतर पेयजल इंतजाम तथा बारिश के दौरान जलभराव से निपटने के दावे किए थे। मगर पिछले सप्ताह हुई थोड़ी सी बारिश ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। जगह -जगह शहर में लोगों को जलभराव से जूझना पड़ा । इतना ही नहीं, पेयजल संकट से जगह जगह लोग जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
स्मार्ट सिटी के कामों की बात करें तो इनको समय से पूरा कराने का कोई मानक नहीं है। हालात ये हैं कि आज तक अधिकांश काम पूरे नहीं हुए। शहर का सिविल लाइंस इलाका इन दिनों अधूरे कामों के कारण ज्यादा प्रभावित है। इसी तरह नाले, सीवर आदि के लिए जगह जगह गड्ढे खुदे पड़े हैं। इसे लेकर एक ही आवाज उठ रही है कि कब शहर सही होगा। कब हमारा शहर स्मार्ट होगा।
विज्ञापन
नेताओं के बोल
-इन दिनों शहर में बड़ी समस्या पेयजल संकट, बारिश के बाद जलभराव और गंदगी की है। जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। विकास कार्यों की समयबद्धता नहीं है। जगह-जगह शहर खुदा पड़ा है। विकास देखने को शहरवासी तरस गए हैं। सिविल लाइंस में बनी - बनाई सड़कों को खोदकर फिर से बनाया जा रहा है। पुराने शहर की ओर ध्यान नहीं है।-विवेक सारस्वत, महानगर अध्यक्ष भाजपा
-नगर निगम में इन दिनों मनमानी की जा रही है। गृहकर बड़ा मुद्दा है। सड़कें खुदी पड़ी हैं। कब निर्माण पूरा होगा, कुछ पता नहीं है। पार्षदों तक की सुनवाई नहीं हो रही है। नौकरशाही हावी है। ऐसे में शहर का विकास कैसे संभव है। इसका अंदाजा कोई भी खुद ही लगा सकता है।-विवेक बंसल, पूर्व विधायक
-शहर में विकास के नाम पर पांच साल से तोड़फोड़ चल रही है। पहले तोड़ना फिर बनाना यही चल रहा है। ये धन का दुरुपयोग है। स्मार्ट सिटी के नाम पर पांच साल में अभी तक एक सुविधा शहर की जनता को नहीं मिली है। ऊपर से गृह कर इस कदर थोपा जा रहा है, जिसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। नालों को जोड़ने तक का काम नहीं हुआ। -अज्जू इशहाक, पूर्व महानगर अध्यक्ष सपा
-शहर की समस्याओं से मैं वाकिफ हूं। त्योहार आ रहे हैं। इसे लेकर नगर निगम अधिकारियों, पार्षदों संग बैठक की जाएगी। जिसमें गंदगी, जलभराव, पेयजल आदि समस्या पर विस्तार से चर्चा होगी। हर स्तर पर निदान कराया जाएगा। चूंकि स्मार्ट सिटी से हमारा कोई सरोकार नहीं, इसलिए उस पर कुछ कहा नहीं जा सकता।-मो.फुरकान, मेयर
-बारिश से पहले जलभराव को लेकर बड़े निर्णय लिए गए हैं। जिसके परिणाम बारिश के दौरान देखने को मिलेंगे। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए सबमर्सिबल लगवाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी के कार्यों की मानीटरिंग की जा रही है। निर्माण में देरी पर ठेकेदारों व निर्माण एजेंसियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। रविवार की घटना में पुलिस रिपोर्ट मांगी गई है। उसी अनुसार निर्णय लिया जाएगा। -गौरांग राठी, नगर आयुक्त
पब्लिक के बोल--
-कल की घटना का मैं प्रत्यक्षदर्शी हूं। कंकरीट पर स्कूटी सवार दंपती फिसले हैं। ये निर्माण करने वाली संस्था की लापरवाही है । स्मार्ट सिटी में काम कर रहीं कुछ एजेंसियों का हाल तो ऐसा है कि एक जगह काम पूरा नहीं करतीं और दूसरी जगह खुदाई करा देती हैं। इस पर निर्णय लिए जाने की जरूरत है।-दीपक अग्रवाल, साईं विहार
-शहर में गंदगी, जलभराव और पेयजल संकट जैसी समस्याओं से आम जन परेशान है। स्मार्ट सिटी के काम देरी से होने के कारण लोग परेशान हैं। इस बारे में जल्द बड़ा बदलाव या समय से निर्णय नहीं हुआ तो नगर निगम व स्मार्ट सिटी के खिलाफ अदालत की शरण ली जाएगी।-प्रवीन नाथ शर्मा, एडवोकेट
सड़क से हटवाई गई कंकरीट
रविवार को दुर्घटना के बाद सड़क पर बिखरी पड़ी कंकरीट को सोमवार को हटवा दिया गया। हालांकि दुर्घटनास्थल के सहारे कंकरीट बिखरी पड़ी थी। मगर सोमवार को सड़क पर नहीं थी। इधर, दुर्घटना के बाद मृत महिला के परिवार में संवेदना जताने के लिए पहुंचने वालों का सिलसिला जारी था।
कूड़ा उठाने में हर महीने डेढ़ करोड़ का खर्च डीजल
शहर में सफाई व्यवस्था में स्मार्ट सिटी भी सहभागी है। मगर वह सिर्फ कूड़ा प्वाइंटों से कूड़ा उठाकर डंप यार्ड पर पहुंचाने का काम करती है। इससे इतर शहर के अंदर कूड़ा उठाने व सफाई में लगे नगर निगम के वाहन डेढ़ करोड़ से ज्यादा का प्रतिमाह डीजल पी रहे हैं। बावजूद इसके शहर गंदगी के अटा पड़ा है।
बंद पड़े रहते है पेजयल एटीएम
स्मार्ट होते हमारे शहर में पेयजल संकट के निदान के लिए आठ वाटर एटीएम लगवाए गए हैं। शमशाद, कचहरी रोड, रामलीला मैदान, अचलताल, नौरंगाबाद, रामघाट रोड, रेलवे रोड सहित आठ जगह शामिल हैं। एक वाटर एटीएम की कीमत 7.50 लाख रुपये है। इनकी देखरेख का जिम्मा भी उसी एजेंसी को है, जिसने इन्हें लगाया है। मगर इनमें से अधिकांश बंद हैं। डीएस कॉलेज के छात्र नेता बल्देव चौधरी सीटू के अनुसार रामघाट रोड व रामलीला मैदान पर लगे वाटर एटीएम तो हर समय बंद ही रहते हैं। नियमानुसार इनमें रुपये डालकर शुद्ध पानी मिलने का प्रवधान है। मगर राहगीरों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।