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Aligarh: छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स कर्मी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तिरंगे में लिपटकर नहीं आने पर हंगामा

Wed, 24 Dec 2025 02:33 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Updated Wed, 24 Dec 2025 02:33 AM IST
सार

जवान के पार्थिव शरीर के साथ आए एएसआई प्रभु दयाल ने अपने उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ग्रामीणों को बताया कि बलिदानी का दर्जा नहीं मिलेगा। जो भी अन्य सुविधा सीएएफ के जवानों को मिलती हैं, वह सभी मिलेंगी।

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body of Chhattisgarh Armed Forces personnel reached the village
पार्थिव शरीर को रास्ते पर रखकर शहिद का दर्जा दिए जाने की मांग करते ग्रामीण - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (सीएएफ) में तैनात में सोनवीर सिंह का पार्थिव शरीर 23 दिसंबर को पिसावा में उनके पैतृक गांव मीरपुर दहोड़ा पहुंचा। इस दौरान उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर नहीं आने पर ग्रामीणों और परिजनों ने हंगामा शुरू कर अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। साथ ही उन्हें बलिदानी का दर्जा देने की भी मांग कर रहे थे। बाद में सीएएफ के अधिकारियों के आश्वासन पर पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।

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गांव के सोनवीर सिंह (38) पुत्र महेंद्र सिंह सीएएफ की 17वीं बटालियन में खैरागढ़ में तैनात थे। रविवार की शाम खाना खाने के दौरान उनका साथी अरविंद गौतम से विवाद हो गया था। सोनवीर ने अरविंद गौतम को थप्पड़ जड़ दिया और बात आई-गई हो गई। अरविंद ने पेट्रोलिंग के दौरान रात करीब 12 बजे सोते हुए सोनवीर पर गोली चला दी। गोली हाथ को चीरते हुए चेहरे पर जा लगी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सूचना पर परिजन मौके पर पहुंच गए और मंगलवार की शाम करीब चार बजे उनके पार्थिव शरीर को गांव लाया गया।
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एंबुलेंस के गांव नगलिया बिजना पहुंचते ही वहां मौजूद युवा भारत माता की जयघोषो के साथ एंबुलेंस के पीछे तिरंगा लहराते हुए गांव तक आए और पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। गांव से बाहर निकलते ही ग्रामीणों ने पार्थिव शरीर को श्मशान के रास्ते पर रखकर जवान को बलिदानी का दर्जा दिलाए जाने की मांग करने लगे। पार्थिव शरीर को तिरंगा में न लाने पर भी आपत्ति जताई। परिवार के एक बच्चे की नौकरी फंड आदि के विषय में साथ आए जवानों से जानकारी की गई। ग्रामीणों ने हत्या पर आक्रोश व्यक्त किया।
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जवान के पार्थिव शरीर के साथ आए एएसआई प्रभु दयाल ने अपने उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ग्रामीणों को बताया कि बलिदानी का दर्जा नहीं मिलेगा। जो भी अन्य सुविधा सीएएफ के जवानों को मिलती हैं, वह सभी मिलेंगी। तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद जवान के पार्थिव शरीर का सम्मान सहित अंतिम संस्कार कर दिया गया है। घटना से पत्नी प्रीति, बेटा देवेश कुमार, मयूर कुमार व बेटी परी का रो रो कर बुरा हाल है। सोनवीर अपने भाई राजेंद्र, संदीप व धर्मेंद्र से बड़ा था। मां अनीता देवी बचपन में ही गुजर गई थी। मौसी सुनीता देवी ने इनका पालन पोषण किया था।

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